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Petrol Price Hike: दो बार से 87 पैसे प्रति लीटर ही क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल के रेट, क्या है इसके पीछे की वजह?

Petrol Price Hike: पेट्रोल की कीमतों में एक बार फिर से बढ़ोतरी की गई है. आइए जानते हैं कि पिछले दो बार से यह बढ़ोतरी सिर्फ 87 पैसे की ही क्यों हो रही है.

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  • पेट्रोल-डीजल की कीमतें 87 पैसे बढ़ीं, 10 दिन में तीसरी बढ़ोतरी।
  • छोटी बढ़ोतरी से अचानक महंगाई का झटका रोका जा रहा।
  • मध्य पूर्व तनाव से कच्चे तेल की सप्लाई पर असर।
  • डायनेमिक प्राइसिंग से पेट्रोल-डीजल की रोज बदलती दरें।

Petrol Price Hike: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की चिंता के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर से बढ़ोतरी देखने को मिली है. पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. ताजा बदलाव में पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे की बढ़ोतरी की गई है और डीजल की कीमतें 91 पैसे बढ़ी हैं.  कई ग्राहकों ने गौर किया है कि हाल में कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ 87 पैसे की ही की गई है. आइए जानते हैं कि आखिर 87 पैसे की ही बढ़ोतरी क्यों हो रही है? 

अचानक महंगाई के झटकों से बचने की कोशिश 

तेल कंपनी कैलिब्रेटेड मैनर अपना रही है. ईंधन की कीमतों में छोटी-छोटी बढ़ोतरी का एक सबसे बड़ा कारण बाजार में अचानक महंगाई के झटकों को रोकना‌ है. अगर तेल कंपनी एक ही बार में पेट्रोल या फिर डीजल की कीमतें ₹5-₹10 बढ़ा दें तो पूरे देश में ट्रांसपोर्ट का खर्चा लगभग रातों-रात काफी ज्यादा बढ़ जाएगा. इसका सीधा असर सब्जी, किराने के सामान, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के जरूरी चीजों की कीमतों पर पड़ेगा. अचानक होने वाली घबराहट और लोगों के भारी विरोध से बचने के लिए तेल कंपनियां अक्सर कीमतों को धीरे-धीरे और छोटी-छोटी मात्रा में बढ़ाती हैं.

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कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी 

मिडिल ईस्ट में चल रहे भू राजनीतिक तनाव ने ग्लोबल कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट के डर को और भी बढ़ा दिया है. क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल इंपोर्ट करता है इस वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का सीधा असर देश में ईंधन की कीमतों पर पड़ता है. भारतीय तेल कंपनियां इंपोर्ट की बढ़ती लागत की वजह से लगातार बढ़ते वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं. यही वजह है कि इस नुकसान का कुछ हिस्सा धीरे-धीरे कीमतों में सोची समझी बढ़ोतरी करके कवर किया जा रहा है.

डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम 

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय रुपया और अमेरिकी डॉलर के बीच की विनिमय दर से जुड़ी होती है. रोजाना बदलने वाली कीमतों की इस व्यवस्था के तहत तेल कंपनी ग्लोबल कच्चे तेल के बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव, ट्रांसपोर्ट की लागत, रिफायनिंग मार्जिन और मुद्रा की चाल पर लगातार नजर रखती है. 

इन गणनाओं में कई बदलते कारक शामिल होते हैं. यही वजह है की अंतिम खुदरा मूल्य समायोजन अक्सर 87 पैसे या फिर इसी तरह की बिना राउंड ऑफ की गई सटीक संख्या के रूप में सामने आते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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