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तेल नहीं, 220 मिलियन टन जिंक-लेड का खजाना! क्या ईरान की जंग के पीछे छिपा है असली खेल?

पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के कारण अमेरिका और यूरोप के बाजार ईरान के लिए लगभग बंद हैं. इसी वजह से अमेरिका की कोई भी लेड खनन कंपनी ईरान में काम नहीं करती, जबकि ईरान चीन जैसे देशों के जरिए अपने खनिज निर्यात को जारी रखे है.

ईरान को लेकर अक्सर चर्चा तेल और हॉर्मुज तक सीमित रहती है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि असली तस्वीर इससे कहीं बड़ी है. ईरान दुनिया की 3% से अधिक जिंक और लेड खदानों का घर है. यही वजह है कि उसके खनिज संसाधन भी वैश्विक शक्तियों के लिए बेहद अहम बन चुके हैं.

पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के कारण अमेरिका और यूरोप के बाजार ईरान के लिए लगभग बंद हैं. इसी वजह से अमेरिका की कोई भी लेड खनन कंपनी ईरान में काम नहीं करती, जबकि ईरान चीन जैसे एशियाई देशों के जरिए अपने खनिज निर्यात को जारी रखे हुए है.

विदेश मामलों के एक्सपर्ट्स रॉबिंदर सचदेव कहते हैं, 'ये जंग बिल्कुल हॉर्मुज और तेल की सिर्फ नहीं है बल्कि ये विचारधारा की भी है और साथ ही क्रिटिकल मिनिरल की भी. जहां ईरान में दुनिया की 3% से ज्यादा जिंक और लेड की खदान हैं तो उसके ऊपर भी दुनिया की नजर है, क्योंकि आज के दौर में देशों को विकास के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत है.'

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास कॉपर का बड़ा भंडार भी है, जिसकी अमेरिका समेत पूरी दुनिया को जरूरत है. ऐसे में साफ है कि यह संघर्ष केवल तेल और हॉर्मुज तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक खनिज और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से भी जुड़ा हुआ है.

ईरान के पास छिपा है, दुनिया का बड़ा जिंक-लेड खजाना!

तेल और गैस के लिए मशहूर ईरान के पास एक और ऐसी प्राकृतिक संपदा है, जो ग्लोबल उद्योगों के लिए बेहद अहम मानी जाती है. ईरान के पास 22 करोड़ टन से अधिक जिंक और लेड अयस्क का भंडार है, जो दुनिया के कुल भंडार का करीब 5% माना जाता है. इसी वजह से ईरान एशिया का चौथा सबसे बड़ा जिंक और लेड उत्पादक देश बन चुका है.

ईरान के खनन उद्योग की सबसे बड़ी ताकत अंगौरान (Angouran) और मेहदियाबाद (Mehdiabad) खदानें हैं. जंजान प्रांत में स्थित अंगौरान खदान मध्य पूर्व की सबसे बड़ी लेड और जिंक खदान मानी जाती है. यहां 1.6 करोड़ टन से अधिक उच्च गुणवत्ता वाला अयस्क मौजूद है, जिसमें औसतन 26% जिंक और 6% लेड है.

ईरान हर साल करीब 4.5 लाख टन जिंक इंगोट बनाने की क्षमता रखता है. इसकी लगभग 80% उत्पादन 15 देशों को निर्यात किया जाता है. इससे सालाना करीब 2 अरब डॉलर की निर्यात क्षमता बनती है. मौजूदा भंडार में लगभग 1.1 करोड़ टन जिंक और 50 लाख टन लेड धातु मौजूद है. यही वजह है कि ऊर्जा के साथ-साथ खनिज क्षेत्र भी ईरान की अर्थव्यवस्था और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम आधार साबित हो सकता है.

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ईरान की खदानों पर किसका है असली दबदबा?

ईरान का लेड खनन उद्योग पूरी तरह घरेलू सरकारी और निजी कंपनियों के नियंत्रण में है, लेकिन इसकी असली ताकत चीन और रूस के साथ बने रणनीतिक रिश्तों से आती है. पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने अपने खनिज कारोबार को ऐसे नेटवर्क के सहारे खड़ा किया है, जिसमें निवेश, तकनीक और सबसे बड़ा बाजार—तीनों की भूमिका चीन और रूस निभा रहे हैं.

ईरान में लेड के साथ जिंक और चांदी का खनन मुख्य रूप से Iran Zinc Mines Development Co. (IZMDC), Bama Mining & Industrial Co., Zarin Industrial and Mining Group और Calsimin Co. जैसी घरेलू कंपनियां करती हैं. हालांकि, इन खदानों का सीधा मालिकाना रूस या चीन के पास नहीं है.

चीन की भूमिका सबसे बड़े खरीदार की है. चीनी कंपनियां ईरान से सेमी प्रोसेस्ड लीड और जिंक कंसंट्रेट खरीदती हैं. इसके अलावा China Nonferrous Metal Mining Group (CNMC) जैसी इंजीनियरिंग कंपनियां ईरान में धातु प्रसंस्करण और स्मेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में भी सहयोग करती हैं.

वहीं, रूस निवेश और खनिज खोज परियोजनाओं में साझेदार के तौर पर सक्रिय है. Ural Mining and Metallurgical Company (UMMC) जैसी रूसी कंपनियां पहले भी ईरान की बड़ी खनन परियोजनाओं में कंसोर्टियम निवेश पर बातचीत कर चुकी हैं.

लेड और जिंक क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?

लेड और जिंक आधुनिक उद्योग, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे की रीढ़ माने जाते हैं. दुनिया में उत्पादित 80% से अधिक लेड का उपयोग लेड-एसिड बैटरियां बनाने में होता है, जो वाहनों को स्टार्ट करने, टेलीकॉम बैकअप और ऑफ-ग्रिड ऊर्जा भंडारण के लिए जरूरी हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सोल्डरिंग, एक्स-रे मशीनों और परमाणु संयंत्रों में रेडिएशन से सुरक्षा के लिए भी लेड का व्यापक इस्तेमाल होता है.

वहीं, जिंक दुनिया में एल्युमिनियम और तांबे के बाद सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली Non Ferrous धातु है. इसका सबसे बड़ा उपयोग स्टील और लोहे पर गैल्वनाइजिंग के जरिए जंग रोकने में होता है. जिंक पीतल (ब्रास), रबर, पेंट, सनस्क्रीन, दवाइयों और कई उपभोक्ता उत्पादों में भी अहम भूमिका निभाता है. साथ ही यह मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और कोशिकाओं के विकास के लिए भी एक आवश्यक खनिज है.

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शिवांक मिश्रा साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और इस वक्त एबीपी न्यूज़ में बतौर प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं. उनकी विशेषज्ञता साइबर सुरक्षा, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मामलों की गहन पड़ताल में है. कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों के शरण मॉड्यूल से लेकर भारत में दवा कंपनियों की अवैध वसूली जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं. क्रिकेट और फुटबॉल देखना और खेलना पसंद है.
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