हवाई जहाज के कौन से पुर्जे बनाता है भारत, जिसके बिना अधूरा है दुनिया का एविएशन सेक्टर?
दुनिया के बड़े-बड़े विमान भारत में बने पुर्जों के बिना उड़ ही नहीं सकते. पीएम मोदी ने भी अपने भाषण में जिन पुर्जों का जिक्र किया है, चलिए आज हम आपको बताएं कि कौन से पुर्जे भारत में बनते हैं.

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस आत्मविश्वास के साथ भारत की विकास यात्रा का जिक्र किया, उसी दौरान उन्होंने एविएशन सेक्टर में भारत की भूमिका को भी रेखांकित किया. पीएम ने साफ कहा कि देश ने कई रिफॉर्म किए हैं. अब हमारे MSME नेटवर्क पर दुनिया का भरोसा और मजबूत हो रहा है. हो सकता है कि हम हवाई जहाज नहीं बनाते होंगे, लेकिन MSME इसके कई पुर्जे बनाता है. पीएम के इस भाषण के क्रम में यह जान लेना जरूरी हो जाता है कि आखिर भारत हवाई जहाज के कौन से पुर्जे बनाता है.
भारत कौन-कौन से विमान के पुर्जे बनाता है?
भारत में हवाई जहाज के स्ट्रक्चरल यानी ढांचे से जुड़े कई अहम हिस्से तैयार होते हैं. इसमें पंखों के अंदर लगने वाले मजबूत फ्रेम, फ्लैप, ब्रैकेट और फ्यूजलेज के हिस्से शामिल हैं. इसके अलावा लैंडिंग गियर से जुड़े धातु के स्ट्रक्चर पार्ट्स भी भारत में बनते हैं, जो टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान विमान का पूरा भार संभालते हैं.
इंजन से लेकर वायरिंग तक भारत की पकड़
एविएशन इंजन को विमान का दिल कहा जाता है और इसके कई संवेदनशील हिस्से भारत में तैयार हो रहे हैं. टर्बाइन ब्लेड, कास्टिंग, कंप्रेसर और बेहद सटीक प्रिसीजन पार्ट्स भारतीय कंपनियां बना रही हैं, जिनका इस्तेमाल GE और Rolls-Royce जैसे दिग्गज करते हैं. इसके साथ ही पूरे विमान का इलेक्ट्रिकल हार्नेस, यानी वायरिंग और केबल सिस्टम भी भारत में तैयार होता है, जो कॉकपिट से लेकर टेल तक बिजली और सिग्नल पहुंचाता है.
कॉकपिट और इंटीरियर में भी भारतीय योगदान
आज के आधुनिक विमानों में सिर्फ मजबूत ढांचा ही नहीं, बल्कि एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स भी उतने ही जरूरी हैं. भारत में एवियोनिक्स से जुड़ी कई सब-असेंबली बनती हैं, जिनका इस्तेमाल कॉकपिट सिस्टम में होता है. इसके अलावा सीट फ्रेम, केबिन पैनल, कार्गो डोर और इंटीरियर के कई हिस्से भी भारत की फैक्ट्रियों से निकलकर दुनिया भर के विमानों में लगते हैं.
कौन सी कंपनियां बना रही हैं यह ताकत?
इस क्षेत्र में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, महिंद्रा एयरोस्पेस, डायनामैटिक टेक्नोलॉजीज और सैकड़ों प्राइवेट MSME कंपनियां सक्रिय हैं. HAL जहां तेजस जैसे स्वदेशी फाइटर जेट और ध्रुव, रुद्र जैसे हेलीकॉप्टर बना रहा है, वहीं टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां एयरबस और बोइंग की ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा हैं.
दुनिया का भरोसा और भारत का भविष्य
पीएम मोदी ने जिस भरोसे की बात की, उसकी जड़ यही है कि भारत ने गुणवत्ता, समय और लागत तीनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है. आज भारत फ्रेजाइल फाइव से निकलकर दुनिया की टॉप इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है और एविएशन सेक्टर इसका बड़ा उदाहरण है. भले पूरा विमान भारत में न बनता हो, लेकिन उसके जरूरी पुर्जे बनाकर भारत दुनिया के आसमान में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुका है.
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Source: IOCL
























