Cockroach Janta Party Protest: क्या कोई भी कर सकता है जंतर मंतर पर आंदोलन? जानें, कैसे मिलती है इसके लिए इजाजत
Cockroach Janta Party Protest: कॉकरोच जनता पार्टी आज जंतर मंतर पर आंदोलन कर रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या यहां कोई भी आंदोलन कर सकता है और कैसे मिलती है इसकी मंजूरी.

- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हेतु पुलिस की अनुमति अनिवार्य।
- अनुमति हेतु दिल्ली पुलिस को आवेदन, NOC व संपर्क दें।
- प्रदर्शन सुबह 10-5 बजे, 1000 लोगों तक ही सीमित।
- प्रदर्शन शांतिपूर्ण, हथियार वर्जित, यातायात बाधित नहीं।
Cockroach Janta Party Protest: शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भारत में एक मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार है. दिल्ली का जंतर मंतर लंबे समय से सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए देश के सबसे प्रमुख स्थानों में से एक रहा है. आज कॉकरोच जनता पार्टी जंतर-मंतर पर एक आंदोलन करने जा रही है. इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके कर रहे हैं. इस आंदोलन में काफी लोग इकट्ठा हो रहे हैं और शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारे लगा रहे हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या कोई भी जंतर-मंतर पर आंदोलन कर सकता है और इसके लिए इजाजत कैसे मिलती है?
आंदोलन के लिए अनुमति की जरूरत क्यों?
भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्वक इकट्ठा होने के अधिकार की गारंटी देता है. अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने, सुरक्षा को पक्का करने और यातायात और दैनिक जीवन में व्यवधान को रोकने के लिए जिम्मेदार हैं. इस वजह से आयोजकों को जंतर मंतर पर कोई भी आंदोलन, रैली या फिर धरना आयोजित करने से पहले आधिकारिक मंजूरी लेनी होती है.
अनुमति प्रक्रिया कानून परिवर्तन एजेंसियों को भीड़ को कंट्रोल करने, सुरक्षा जोखिमों का आकलन करने और इस बात को पक्का करने में मदद करती है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण और कानूनी सीमाओं के अंदर रहे.
यह भी पढ़ेंः क्या TMC के किसी सांसद को इस्तीफा दिलाकर खुद MP बन सकती हैं ममता? जान लीजिए नियम
कैसे मिलती है इजाजत?
प्रस्तावित आंदोलन से कई दिन पहले आयोजकों को दिल्ली पुलिस को एक औपचारिक आवेदन जमा करना होता है. आवेदन आमतौर पर नई दिल्ली जिला पुलिस या फिर संबंधित पुलिस स्टेशन के जरिए से संसाधित किया जाता है. आवेदन के साथ आयोजकों को उस जगह या फिर जमीन के लिए जिम्मेदार प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लेना होता है जहां पर प्रदर्शन की योजना बनाई गई है.
अधिकारियों को एक नामित संपर्क अधिकारी की डिटेल्स की भी जरूरत होती है जो सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन स्थितियों के संबंध में पुलिस के साथ सीधे कोऑर्डिनेटर कर सके. इसके अलावा आयोजकों को भीड़ को कंट्रोल करने के लिए जिम्मेदार स्वयंसेवकों की एक सूची जमा करनी होगी. उनके नाम और संपर्क की जानकारी पहले से ही दी जाती है ताकि पुलिस घटना के दौरान प्रभावी ढंग से कोऑर्डिनेटर कर सके.
क्या होते हैं नियम?
सख्त शर्तों के साथ प्रदर्शन की अनुमति दी जाती है. जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति आमतौर पर सुबह 10:00 बजे से शाम के 5:00 के बीच ही दी जाती है. प्रदर्शनकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वह इस समय के बाद कार्यक्रम स्थल को छोड़ दें. अधिकारी भीड़ के आकार को भी कंट्रोल करते हैं. क्योंकि जंतर मंतर एक सार्वजनिक स्थान है इस वजह से भीड़भाड़ और सुरक्षा जोखिमों को रोकने के लिए आंदोलन आमतौर पर लगभग 1000 प्रतिभागियों तक ही सीमित किया जाता है.
प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहना चाहिए. लाठी, हथियार या फिर ऐसा कोई भी सामान जिसका इस्तेमाल हिंसा के लिए किया जा सकता हो ले जाना प्रतिबंधित है. आयोजन इस बात को पक्का करने के लिए भी जिम्मेदार हैं कि सड़कें साफ रहें और सार्वजनिक यातायात बाधित ना हो.
यह भी पढ़ेंः भारतीय नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर लगाने का किसने लिया था फैसला, जानें क्या था इसका इतिहास?

























