पाकिस्तान में बिना टिकट पकड़े जाने पर कितनी मिलती है सजा, जान लें पड़ोसी देश के रेलवे के नियम?
Pakistan Railways Rules: पाकिस्तान में बिना टिकट ट्रेन यात्रा करने पर यात्री से उस स्टेशन से पकड़े जाने पर सजा सख्त मिलती है. उसे जुर्माने के साथ-साथ अतिरिक्त किराया भी चुकाना होता है.

- धोखाधड़ी पाए जाने पर तीन महीने तक की जेल हो सकती है.
Pakistan Railways Rules: ट्रेन में बिना वैध टिकट सफर करना न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना रवैया है, बल्कि यह कानूनन एक गंभीर अपराध भी है. भारत में जहां रेलवे एक्ट की धारा 137 के तहत बिना टिकट यात्रियों पर जुर्माना और जेल का सख्त नियम लागू है, वहीं हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी इसको लेकर बेहद कड़े कानून बनाए गए हैं. अगर कोई शख्स पाकिस्तान रेलवे की ट्रेनों में बिना टिकट पकड़ा जाता है, तो उसे भारी आर्थिक हर्जाना भुगतना पड़ता है. इतना ही नहीं, मौके पर जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे सीधे सलाखों के पीछे भी जाना पड़ सकता है.
पाकिस्तान रेलवे का कड़ा नियम
पाकिस्तान में रेल यात्रा के दौरान बिना टिकट पकड़े जाने पर यात्री को तुरंत सजा भुगतनी पड़ती है. वहां के नियमों के मुताबिक, चेकिंग स्टाफ यात्री के सफर की शुरुआत वाले स्टेशन से लेकर पकड़े जाने वाले स्थान तक की पूरी दूरी का आकलन करता है. इसके बाद यात्री से उस पूरी दूरी का मूल किराया वसूला जाता है. पाकिस्तान रेलवे प्रशासन अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस नियम को लेकर यात्रियों को लगातार आगाह करता रहता है ताकि ट्रेनों में होने वाली अवैध यात्राओं पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके.
दोहरी मार और अतिरिक्त जुर्माना
पड़ोसी देश में केवल मूल किराया वसूल कर ही यात्रियों को नहीं छोड़ दिया जाता है. पकड़े गए यात्री पर दोहरी आर्थिक मार पड़ती है. नियम के अनुसार, यात्री को तय की गई दूरी के मूल किराए के साथ-साथ, उसी किराए के बराबर की रकम अतिरिक्त जुर्माने (पेनल्टी) के रूप में भी चुकानी पड़ती है. यानी अगर किसी सफर का मूल किराया एक हजार रुपये है, तो बिना टिकट पकड़े जाने पर उसे एक हजार रुपये किराए के और एक हजार रुपये जुर्माने के, यानी कुल दो हजार रुपये देने होते हैं.
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रेलवे पुलिस की सीधी कस्टडी
यदि कोई मुसाफिर ट्रेन के भीतर चेकिंग स्टाफ को मौके पर किराया और जुर्माने की रकम देने से साफ मना कर देता है, या वह इसे चुकाने में पूरी तरह असमर्थ होता है, तो मामला तुरंत कानूनी हो जाता है. इसके अलावा, अगर यह साबित हो जाए कि यात्री जानबूझकर धोखाधड़ी के इरादे से बिना टिकट सफर कर रहा था, तो उसे अगले स्टेशन पर सीधे रेलवे पुलिस के हवाले कर दिया जाता है. पुलिस कस्टडी में जाने के बाद यात्री की मुश्किलें कानूनी तौर पर और ज्यादा बढ़ जाती हैं.
तीन महीने तक जेल का प्रावधान
रेलवे पुलिस द्वारा पकड़े गए डिफॉल्टर यात्री को सीधे रेलवे मजिस्ट्रेट या संबंधित अदालत के सामने पेश किया जाता है. अदालत में मामला पहुंचने के बाद यदि यात्री के खिलाफ बिना टिकट यात्रा और धोखाधड़ी का दोष पूरी तरह सिद्ध हो जाता है, तो सजा का सख्त प्रावधान है. रेलवे एक्ट 1890 के तहत दोषी पाए जाने वाले शख्स को अधिकतम 3 महीने तक की कैद की सजा का सामना करना पड़ सकता है. अदालत चाहे तो जेल के साथ आर्थिक जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ दे सकती है.
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