क्या सऊदी अरब को बचाने के लिए परमाणु हमला भी कर सकता है पाकिस्तान, जानें क्या है सीक्रेट डील?
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए एक सीक्रेट समझौते के तहत सऊदी में 8,000 पाकिस्तानी सैनिक और लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं. आइए जानें कि क्या पाक परमाणु हथियार भी चला सकता है.

- आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को वित्तीय मदद मिली.
मिडिल ईस्ट की सुलगती राजनीति के बीच पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा रक्षा समझौता सामने आया है. इस गोपनीय समझौते के तहत पाकिस्तान ने न केवल सऊदी अरब की धरती पर अपनी सेना और आधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती कर दी है, बल्कि जरूरत पड़ने पर रियाद की रक्षा के लिए अपनी परमाणु मिसाइलों के इस्तेमाल तक का रणनीतिक विकल्प खुला रखा है. वैश्विक मंच पर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता का दावा करने वाले पाकिस्तान का यह कदम दुनिया भर के रक्षा जानकारों को हैरान कर रहा है.
सीक्रेट डील से बढ़ी हलचल
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में तहलका मचा दिया है. तीन सुरक्षा अधिकारियों और दो सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी सेना भेज दी है. हालांकि, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय, वहां की सेना और सऊदी सरकार ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. दोनों देशों के बीच पिछले साल हुए इस बड़े रक्षा समझौते की तमाम शर्तों को पूरी तरह गोपनीय और सीक्रेट रखा गया है.
सऊदी अरब में पाक सैनिकों की जमीनी मोर्चे पर भारी तैनाती
इस समझौते को जमीन पर उतारते हुए पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने लगभग 8,000 सैनिक भेज दिए हैं. सैनिकों के साथ-साथ पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों (JF-17) का एक पूरा स्क्वाड्रन और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी सऊदी अरब की धरती पर तैनात किया जा चुका है. दोनों देशों का कहना है कि वे किसी भी बाहरी हमले या आक्रामकता की स्थिति में एक-दूसरे के साथ खड़े होंगे और मिलकर दुश्मन का मुकाबला करेंगे. इस कदम से मिडिल ईस्ट का सैन्य समीकरण पूरी तरह बदल गया है.
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क्या परमाणु हमला भी करेगा पाकिस्तान?
इस समझौते की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात पाकिस्तान का परमाणु सुरक्षा कवच (न्यूक्लियर अंब्रेला) है. रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते (SMDA) के तहत, दोनों देशों ने तय किया है कि किसी भी एक पर होने वाले विदेशी हमले को दोनों देशों पर आक्रमण माना जाएगा. पाकिस्तान के रक्षा विभाग के आधिकारिक बयानों और संकेतों के मुताबिक, अगर सऊदी अरब की संप्रभुता पर कोई बड़ा खतरा आता है, तो पाकिस्तान उसे बचाने के लिए अपनी परमाणु क्षमताओं और शस्त्रागार का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेगा.
मिडिल ईस्ट का नया संतुलन
पाकिस्तान का यह कदम सीधे तौर पर मध्य पूर्व, विशेष रूप से ईरान और यमन के हूती विद्रोहियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है. इजरायल के हालिया आक्रामक रुख और क्षेत्रीय तनावों के बीच सऊदी अरब अपनी सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है. ऐसे में पाकिस्तान की परमाणु ढाल सऊदी अरब को एक बड़ी राहत देती है. हैरान करने वाली बात यह है कि यह तैनाती तब हुई जब पाकिस्तान खुद को ईरान और अमेरिका के बीच शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा था.
दोनों देशों के अपने हित
इस बेहद गोपनीय और बड़े रक्षा समझौते के पीछे दोनों देशों के अपने-अपने मजबूत रणनीतिक और आर्थिक हित छिपे हैं. एक तरफ जहां सऊदी अरब क्षेत्रीय तनावों के बीच अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ भारी कंगाली और आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को इसके बदले रियाद से एक बड़ा वित्तीय मदद का पैकेज मिला है. इस सौदे ने पाकिस्तान को आर्थिक ऑक्सीजन देने के साथ-साथ खाड़ी देशों में उसकी सैन्य अहमियत को भी दोबारा स्थापित कर दिया है.
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