2026 में भारत में कितनी है मुस्लिम आबादी? क्या कहती हैं रिपोर्ट्स
क्या भारत में मुस्लिम आबादी का आंकड़ा 22 करोड़ पार कर गया है? ग्लोबल रिपोर्ट्स के चौंकाने वाले अनुमानों और आगामी डिजिटल सेंसस के बीच जानिए देश के बदलते जनसांख्यिकीय समीकरण का पूरा सच

भारत की बदलती जनसंख्या और धार्मिक आबादी का ढांचा हमेशा से ही नीति निर्माताओं, जनसांख्यिकी विशेषज्ञों और आम जनता के बीच गहरी चर्चा का विषय रहा है. समय-समय पर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर देश की आबादी को लेकर कई तरह के दावे और इन्फोग्राफिक्स वायरल होते रहते हैं. ऐसे में देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं और प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के मन में यह उठता है कि वर्तमान वर्ष 2026 में भारत में मुस्लिम आबादी कितनी है और इस पर विभिन्न रिपोर्ट्स क्या कहती हैं.
अगर आधिकारिक आंकड़ों की बात करें, तो भारत सरकार की तरफ से अभी तक वर्ष 2026 के लिए कोई आधिकारिक धर्म-वार जनगणना डेटा जारी नहीं किया गया है. देश में आखिरी आधिकारिक जनगणना साल 2011 में हुई थी. हालांकि, विभिन्न घरेलू व अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों की जनसांख्यिकीय रिपोर्ट और अनुमानों के आधार पर 2026 में भारत की मुस्लिम आबादी की एक स्पष्ट तस्वीर सामने आती है.
आधिकारिक जनगणना 2011 के आंकड़े क्या थे?
2026 की स्थिति को समझने के लिए हमें सबसे पहले 2011 की जनगणना के आधारभूत आंकड़ों को जानना होगा. साल 2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार, भारत की कुल 121 करोड़ की आबादी में मुस्लिमों की जनसंख्या लगभग 17.22 करोड़ थी. प्रतिशत के लिहाज से यह कुल आबादी का 14.23 प्रतिशत हिस्सा था. इस आबादी के साथ इस्लाम भारत का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है और इंडोनेशिया के बाद भारत दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है.
साल 2026 में क्या है स्थिति?
पिछले कुछ सालों में भारत की कुल जनसंख्या बढ़कर लगभग 144 से 146 करोड़ के बीच पहुंचने का अनुमान है, इसलिए सभी धार्मिक समूहों की आबादी में भी आनुपातिक वृद्धि हुई है. विभिन्न रिसर्च रिपोर्ट्स और जनसंख्या प्रोजेक्शन चार्ट्स के मुताबिक, साल 2026 तक भारत में मुस्लिम आबादी बढ़कर लगभग 20 करोड़ से 22 करोड़ के बीच पहुंचने का अनुमान लगाया गया है.
प्रतिशत के आधार पर देखें तो यह आंकड़ा कुल भारतीय जनसंख्या का लगभग 14.5 से 15 प्रतिशत के आसपास बैठता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि स्वाभाविक है क्योंकि यह ट्रेंड 2011 की जनगणना के बाद से लगातार जारी अनुमानित विकास दर पर आधारित है.
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भविष्य के अनुमानों पर क्या कहती है प्यू रिसर्च की रिपोर्ट?
प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2050 तक भारत की जनसंख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. इस रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, साल 2050 तक भारत में हिंदुओं की आबादी लगभग 1.3 बिलियन (76.7%) और मुस्लिमों की आबादी बढ़कर लगभग 31.1 करोड़ हो सकती है, जो कुल आबादी का 18.4 प्रतिशत होगा.
विशेषज्ञों का कहना है कि मुस्लिम आबादी में इस वृद्धि का मुख्य कारण उनकी औसत आयु का कम होना है, जिसके कारण आने वाले कुछ दशकों तक यह आनुपातिक बदलाव दिखाई दे सकता है. कुल मिलाकर, वर्तमान 2026 में भारत की मुस्लिम आबादी का व्यावहारिक और वैज्ञानिक अनुमान 20 से 22 करोड़ (करीब 15%) के बीच ही बैठता है, और किसी भी सटीक डेटा के लिए आगामी आधिकारिक सरकारी जनगणना के परिणामों का इंतजार करना होगा.
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