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अपने बेटे को हिंदी सिखाना चाहता था यह मुगल बादशाह, खुद बनवाई थी डिक्शनरी

भारत में एक मुगल शासक ऐसा रहा है, जिसने अपने बेटे को हिंदी और ब्रजभाषा सिखाने के लिए एक विशेष शब्दकोश तैयार करवाया था. यह डिक्शनरी फारसी बोलने वालों को हिंदी समझने में मदद करती थी.

इतिहास के पन्नों में मुगल बादशाह औरंगजेब की छवि एक कट्टर और जटिल शासक की रही है. लेकिन इसी इतिहास के गलियारों से एक ऐसी कहानी निकलकर आई है जो औरंगजेब के एक बिल्कुल अलग और अनछुए पहलू को उजागर करती है. यह कहानी है एक पिता की, जिसने अपने बेटे को भारत की मिट्टी की भाषा यानी हिंदी सिखाने के लिए दुनिया का संभवतः पहला हिंदी-फारसी शब्दकोश (डिक्शनरी) तैयार करवाया था. आइए जानते हैं आखिर औरंगजेब ने अपने शहजादे के लिए यह अनोखा काम क्यों किया था.

कट्टर छवि के पीछे छिपा एक भाषाई अनुरागी पिता

मुगल साम्राज्य के छठे बादशाह औरंगजेब को अक्सर उनके सख्त शासन और धार्मिक कट्टरता के लिए याद किया जाता है. उनके भाई दारा शिकोह को उदारवादी माना गया, जिन्होंने वेदों का अनुवाद कराया, लेकिन औरंगजेब के बारे में यह तथ्य बहुत कम लोग जानते हैं कि उसने भारतीय भाषाओं के संरक्षण में भी रुचि ली थी. औरंगजेब चाहता था कि उसके वारिसों को उस जमीन की भाषा का पूरा ज्ञान हो, जिस पर उन्हें राज करना है. इसी सोच के साथ उसने अपने तीसरे बेटे आजम शाह के लिए हिंदी सीखने का मार्ग प्रशस्त किया था.

आजम शाह के लिए तैयार हुई डिक्शनरी

बीबीसी की रिपोर्ट बताती है कि शहजादा आजम शाह, जिसका पूरा नाम अबुल फैज कुतुबउद्दीन मोहम्मद आजम था, को स्थानीय भाषा और संस्कृति से जोड़ने के लिए औरंगजेब ने एक डिक्शनरी बनवाई थी. इसका नाम रखा गया ‘तोहफतुल-हिन्द’. बीबीसी की मानें तो इतिहासकार ओम प्रकाश प्रसाद की किताब ‘औरंगजेब, एक नई दृष्टि' के अनुसार, बादशाह ने मिर्जा खान बिन फखरुद्दीन मुहम्मद को आदेश दिया था कि वे एक ऐसा शब्दकोश तैयार करें, जिससे फारसी जानने वाला व्यक्ति आसानी से हिंदी और ब्रजभाषा सीख सके. यह काम करीब कई महीनों की कड़ी मेहनत के बाद 1674 में पूरा हुआ था.

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ब्रजभाषा और हिंदी के सौंदर्य का अनूठा संगम

रिपोर्ट की मानें तो पटना की मशहूर खुदाबख्श खान ओरिएंटल लाइब्रेरी में इस डिक्शनरी की प्रतिलिपि आज भी मौजूद है. लाइब्रेरी की डायरेक्टर शाइस्ता बेदार के मुताबिक, इस शब्दकोश में शब्दों का उच्चारण और उनके फारसी अर्थ बहुत ही सरल तरीके से समझाए गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि इसमें केवल अर्थ नहीं दिए गए हैं, बल्कि भारतीय कवियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपमानों को भी परिभाषित किया गया है. उदाहरण के लिए, चंपा के फूल का अर्थ समझाते हुए लिखा गया है कि यह वह पीला फूल है, जिसका इस्तेमाल हिंदुस्तानी कवि अपनी माशूका की खूबसूरती बयां करने के लिए करते हैं.

सिर्फ शब्दकोश नहीं, भारतीय ज्ञान का खजाना थी यह किताब

'तोहफतुल-हिन्द' को केवल शब्दों के अर्थ तक सीमित नहीं रखा गया था. औरंगजेब चाहता था कि उसका बेटा भारतीय विधाओं में भी पारंगत हो, इसीलिए इस ग्रंथ में भारतीय औषधि विज्ञान (आयुर्वेद), ज्योतिष शास्त्र, संगीत और अन्य कलाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारियां शामिल की गई थीं. उस समय मुगल दरबार की आधिकारिक भाषा फारसी थी, लेकिन आम जनमानस में हिंदी और ब्रज का बोलबाला था. बादशाह का मानना था कि कुशल प्रशासन के लिए स्थानीय ज्ञान और भाषा की समझ होना अनिवार्य है.

इतिहास के नजरिए से 'तोहफतुल-हिन्द' का महत्व

यह डिक्शनरी इस बात का प्रमाण है कि मुगलों के दौर में फारसी और हिंदी का मेल किस तरह एक नई संस्कृति को जन्म दे रहा था. औरंगजेब द्वारा इसे बनवाना यह दर्शाता है कि सत्ता के संघर्षों के बीच भी भाषाई तालमेल की कोशिशें जारी थीं. आज भी कई प्रमुख पुस्तकालयों में इसकी प्रतियां शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. औरंगजेब के इस कदम को आज के दौर के इतिहासकार उनकी शासन व्यवस्था के एक व्यावहारिक और सांस्कृतिक पहलू के रूप में देखते हैं, जो उनकी प्रचलित छवि से बिल्कुल अलग है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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