India vs Pakistan Child Safety: किस देश में बच्चियां ज्यादा सुरक्षित... भारत या पाकिस्तान? आंकड़ों में जानें जवाब
India vs Pakistan Child Safety: भारत और पाकिस्तान में बच्चों के खिलाफ अपराध के आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं. रिपोर्टिंग सिस्टम और कानूनों के अंतर के बीच सुरक्षा की स्थिति समझना जरूरी है.

India vs Pakistan Child Safety: हाल ही में पाकिस्तान के कराची शहर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां महज 18 महीने की मासूम बच्ची के साथ बेहद भयानक दुष्कर्म हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया और लोगों में गुस्सा और गम दोनों देखने को मिला. ऐसी दर्दनाक घटनाओं के बाद अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर बच्चों के लिए कौन सा देश ज्यादा सुरक्षित है, भारत या पाकिस्तान. इस सवाल का सीधा जवाब देना आसान नहीं है, क्योंकि दोनों देशों में अपराध दर्ज करने का तरीका, कानून और रिपोर्टिंग सिस्टम अलग-अलग होता है. फिर भी अगर उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देखें तो, इस बात को साबित किया जा सकता है कि आज के समय में पाकिस्तान और भारत के बीच सुरक्षित देश कौन सा है?
भारत में बच्चों के खिलाफ अपराध के आंकड़े
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अपराध के मामले 6 प्रतिशत कम हुए हैं, जो 2023 में 62.4 लाख से घटकर 2024 में 58.5 लाख हो गए हैं. साल 2024 में भारत में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1,87,702 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 5.9% ज्यादा हैं. इनमें ज्यादातर मामले पॉक्सो एक्ट से जुड़े हुए थे, जिसमें यौन उत्पीड़न, अपहरण और तस्करी जैसे अपराध शामिल हैं. भारत की आबादी करीब 140 करोड़ है, इसलिए यही वजह है कि इतने बड़े देश में मामलों की संख्या ज्यादा है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि भारत में रिपोर्टिंग सिस्टम पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा मजबूत है, जिसके कारण भारत के लोग बढ़-चढ़कर मामला दर्ज करवाते हैं.
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पाकिस्तान में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े आंकड़े
पाकिस्तान में बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'साहिल' की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के पहले छह महीनों यानी जनवरी से जून के बीच वहां बच्चों के खिलाफ अपराध के 1,914 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 1,015 मामले यौन शोषण के थे. पाकिस्तान की आबादी करीब 24 करोड़ है, इस हिसाब से यह आंकड़ा भी चिंताजनक माना जा रहा है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 11 से 15 साल के 598 बच्चे, 16 से 18 साल के 356 बच्चे और 6 से 10 साल के 329 बच्चे इन घटनाओं का शिकार बने हैं. खास बात यह है कि पाकिस्तान में यह आंकड़ा सरकार की जगह एक गैर-सरकारी संस्था जुटाती है, जिससे यह माना जाता है कि वहां असल मामलों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि बहुत से मामले दर्ज ही नहीं हो पाते.
आंकड़ों से क्या निकलता है नतीजा?
इन आंकड़ों को ध्यान से देखें तो यह साफ है कि बच्चों के खिलाफ अपराध भारत और पाकिस्तान, दोनों ही देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं. सीधे आंकड़ों की तुलना करना पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि दोनों देशों की आबादी, कानूनी ढांचा और रिपोर्टिंग व्यवस्था अलग-अलग है. भारत में जहां आधिकारिक सरकारी संस्था NCRB हर साल अपराधों की रिपोर्ट जारी करती है, वहीं पाकिस्तान में यह काम मुख्य रूप से गैर-सरकारी संगठनों पर निर्भर रहता है. जिससे वहां के असली आंकड़े छिपे रहने की आशंका ज्यादा रहती है.
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