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Manipur Violence: कौन हैं मैतेई और कुकी समुदाय, जिनके बीच मणिपुर में भड़क रही हिंसा? जानें इनका इतिहास

Manipur Violence: मणिपुर में एक बार फिर से हिंसा भड़क चुकी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि कौन हैं मैतेई और कुकी समुदाय.

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  • मणिपुर में मैतेई-कुकी समुदायों के बीच हिंसा फिर भड़की।
  • पांच साल के बच्चे, छह महीने की बच्ची की हत्या।
  • राज्य में 19 अप्रैल से अनिश्चितकालीन बंद का आह्वान।
  • मैतेई घाटी में, कुकी पहाड़ियों में निवास करते हैं।

Manipur Violence: कुछ समय की शांति के बाद मणिपुर में एक बार फिर से हिंसा बढ़ चुकी है. 5 साल के बच्चे और 6 महीने के बच्ची की हत्या, एक सुरक्षाकर्मी की हत्या और 19 अप्रैल से पूरे राज्य में बंद के साथ राज्य एक बार फिर से अस्थिरता की तरफ धकेल दिया गया है. इस संघर्ष के केंद्र में दो बड़े समुदाय हैं. मैतेई और कुकी समुदाय.  चल रही अशांति को समझने के लिए आइए जानते हैं दोनों समुदाय के इतिहास और पहचान के बारे में.

मणिपुर का सामाजिक और भौगोलिक विभाजन 

मणिपुर दो अलग-अलग क्षेत्रों में बंटा हुआ है. इंफाल घाटी और उसके आसपास के पहाड़ी जिले. यह विभाजन सिर्फ भौगोलिक ही नहीं बल्कि जातीय भी है. मैतेई समुदाय का घाटी पर दबदबा है और कुकी-जो और नागा समुदाय मुख्य रूप से पहाड़ियों में रहते हैं. 

हालांकि घाटी में राज्य की जमीन का सिर्फ 10% हिस्सा है लेकिन यहां आधी से ज्यादा आबादी रहती है. इसके उलट पहाड़ी इलाकों में लगभग 90% जमीन है. लेकिन वहां आबादी का घनत्व काफी कम है. इस असमान वितरण ने जमीन संसाधन और राजनीतिक सत्ता को लेकर होने वाले संघर्षों को आकार देने में एक बड़ी भूमिका निभाई है. 

मैतेई कौन हैं?

मैतेई समुदाय मणिपुर का सबसे बड़ा जातीय समूह है. इसकी आबादी लगभग 53% से 54% है. वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. मैतेई लोगों ने कभी प्राचीन राज्य कांगलेइपाक पर शासन किया था. इस राज्य की राजधानी कांगला थी. इस समुदाय के ज्यादातर लोग हिंदू धर्म को मानते हैं, हालांकि कुछ लोग एक स्वदेशी धर्म सनमाही और मैतेई पंगल के मुस्लिम समुदाय को भी मानते हैं.  उनकी भाषा मैतेई या मणिपुरी को आधिकारिक दर्जा प्राप्त है और इसे भारत के संविधान में मान्यता मिली हुई है.

कुकी जो कौन हैं?

कुकी-जो समुदाय मणिपुर के पहाड़ी जिलों में रहने वाले प्रमुख आदिवासी समूह में से एक हैं. वे दूसरी जनजातियों के साथ मिलकर आबादी का लगभग 40% हिस्सा बनाते हैं. ये लोग राज्य के ज्यादातर जमीन वाले हिस्से पर रहते हैं. ज्यादातर कुकी लोग ईसाई धर्म को मानते हैं और म्यांमार की चिन पहाड़ियों में रहने वाले समुदायों के साथ उनके जातीय और सांस्कृतिक संबंध है. ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश शासन के दौरान कई कुकी लोगों को इस क्षेत्र में मैतेई बहुल घाटी और नागा बहुल इलाकों के बीच एक बफर के तौर पर बसाया गया था.

क्या है विवाद? 

मैतेई और कुकी समुदाय के बीच संघर्ष जमीन के अधिकार, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों में गहराई से जुड़ा हुआ है. यह विवाद तब शुरू हुआ था जब ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति दर्जा देने की मांग के खिलाफ एकजुटता मार्च निकाला था. इस मांग का विरोध करते हुए कुकी और दूसरे जनजातियों को डर है कि अगर मैतेई को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिल जाता है तो वह पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीदने और सरकारी नौकरियों में आरक्षण पाने के पात्र हो जाएंगे. दरअसल ऐसा कहा जाता है कि मैतेई पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक रूप से मजबूत है.

यह भी पढ़ें: 100 साल से लगातार जंग जैसे हालात से जूझ रहे ये देश, जानें युद्ध के लिए कहां से जुटाते हैं पैसा?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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