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क्या जानवर के कटने के बाद भी मांस से लगाया जा सकता है हलाल और झटके का फर्क

काटे गए मांस को देखकर या उसकी सामान्य जांच से हलाल और झटके में फर्क काफी हद तक किया जा सकता है. हालांकि सही जांच के लिए लेबोरेटरी टेस्ट करना पड़ता है.

हलाल और झटका किसी जानवर का मांस तैयार करने की दो अलग-अलग विधिया हैं. इन दोनों तरीकों में जानवर को काटने का ढंग अलग होता है, जिसके कारण मांस की गुणवत्ता, स्वाद और धार्मिक महत्व को लेकर चर्चा होती रहती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या जानवर के काटे जाने के बाद मांस को देखकर या उसकी जांच करके यह पता लगाया जा सकता है कि वह हलाल है या झटका? चलिए जानते हैं.
 
क्या होता है झटका और हलाल

झटका मीट में छुरी से जानवर की गर्दन की नस और सांस लेने वाली नली को काट दिया जाता है. गर्दन पर छुरी चलाने के बाद जानवर का पूरा खून निकलने का इंतजार किया जाता है. हलाल करने के दैरान जानवर की गर्दन को फौरन अलग नहीं किया जाता बल्कि जब वह मर जाता है तब उसके हिस्से किए जाते हैं. इस तरह इस्लाम में मान्यता है कि हलाल मीट को खाने से जनवर की गोश्त से बीमारी नहीं फैलती. दूसरी ओर, झटका में जानवर को एक ही झटके में तेजी से काटा जाता है, जिसमें सिर को धड़ से अलग कर दिया जाता है. यह माना जाताहै कि इस प्रक्रिया में जानवर को कम दर्द होता है. अब सवाल ये है कि क्या जानवर के कटने के बाद भी हलाल और झटके का फर्क पता लगाया जा सकता है? तो कुछ तरीकों से काफी हद तक पता लगाया जा सकता है चलिए जानते हैं.

खून की मौजूदगी

हलाल मांस में इस्लामी तरीके में गले की नस काटकर जानवर का खून पूरी तरह बहा दिया जाता है, इसलिए मांस में खून बहुत कम होता है. जबकि झटका में जानवर को एक झटके में मार दिया जाता है जिससे उसका पूरा खून शरीर में रह जाता है, इसलिए झटका मांस हलाल की तुलना में थोड़ा ज्यादा लाल और गाढ़ा दिख सकता है.

टेक्सचर और नरमी

हलाल मांस अपेक्षाकृत ज्यादा नरम और मुलायम होता है. जबकि झटका मांस में खून जमे रहने की वजह से यह कभी-कभी थोड़ा सख्त या चबाने में हार्ड हो सकता है.

गंध से लगाया जा सकता है पता

हलाल और झटका मांस को गंध से भी पता लगाया जा सकता है हलाल मांस से आमतौर पर बदबू कम आती है. जबकि झटका मांस में खून बचा होने की वजह से कभी-कभी गंध जल्दी आने लगती है. हालांकि प्रैक्टिकल तौर पर पक्का पता लगाने के लिए लेबोरेटरी टेस्ट करना पड़ता है. सिर्फ आंखों से देखकर हमेशा सही पहचान करना संभव नहीं होता.

About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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