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Switzerland Bunker Law: स्विट्जरलैंड में हर घर में बंकर बनाना क्यों जरूरी, जानें क्यों बनाया गया यह नियम?

Switzerland Bunker Law: स्विट्जरलैंड में हर घर में बंकर बनाना जरूरी है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह और क्यों बनाया गया यह नियम.

Switzerland Bunker Law: स्विट्जरलैंड में बंकर होना कोई लग्जरी फीचर या फिर सर्वाइवल का शौक नहीं है, बल्कि यह एक कानूनी जरूरत है. देश में दुनिया के सबसे बड़े सिविलियन प्रोटक्शन सिस्टम में से एक है. दरअसल न्यूक्लियर वॉर, केमिकल अटैक या किसी भी बड़ी राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में हर निवासी के पास एक सुरक्षित अंडरग्राउंड शेल्टर होना चाहिए. यही इसका मुख्य लक्ष्य है. 

1963 का कानून, जिसने सब कुछ बदल दिया 

इस सिस्टम की नींव कोल्ड वॉर के दौरान रखी गई थी. 1963 में बढ़ते ग्लोबल न्यूक्लियर तनाव के बीच स्विट्जरलैंड ने एक फेडरल सिविल डिफेंस कानून को पास किया था.  इसने हर नागरिक को एक सुरक्षित सेंटर स्पेस का अधिकार दिया. इस कानून के तहत कोई भी नई रेजिडेंशियल बिल्डिंग बनाने वाले को उसके नीचे एक बंकर बनाना होगा.

अगर प्राइवेट बंकर बनाना स्ट्रक्चर के हिसाब से नामुमकिन है तो प्रॉपर्टी के मालिक को एक कंट्रीब्यूशन फीस देनी होगी. फिर सरकार इस फंड का इस्तेमाल पास में एक पब्लिक कम्युनिटी सेंटर बनाने के लिए करती है. 

न्यूट्रल लेकिन कभी भी बिना सुरक्षा के नहीं 

स्विट्जरलैंड दुनिया भर में अपनी न्यूट्रलता के लिए जाना जाता है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वह कोई सुरक्षा नहीं करेगा. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान स्विट्जरलैंड ने देखा कि पोलैंड जैसे देश डिप्लोमेटिक कोशिशों के बावजूद कितनी जल्दी खत्म हो गए. उस सबक ने इसकी लंबे समय की रक्षा सोच को आकार दिया.

इसके नतीजे में स्विट्जरलैंड ने टोटल डिफेंस स्ट्रेटजी को अपनाया. यह तरीका मिलिट्री तैयारी और आम लोगों की सुरक्षा दोनों को जोड़ता है. बंकरों का देश भर में फैला नेटवर्क उस स्ट्रेटजी का एक बड़ा हिस्सा बन गया जिसे ना सिर्फ सैनिकों बल्कि पूरी आबादी की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया था.

पूरी आबादी के लिए पनाह की जगह 

स्विट्जरलैंड दुनिया का सिर्फ अकेला ऐसा देश है जो एक ही समय में अपनी पूरी आबादी से ज्यादा लोगों को जमीन के नीचे पनाह दे सकता है. लगभग 9 मिलियन लोगों के साथ देश में लगभग 3,70,000 प्राइवेट और पब्लिक बंकर हैं.

कानून के मुताबिक हर व्यक्ति के पास कम से कम एक स्क्वायर मीटर सुरक्षित जगह होनी चाहिए. इस जबरदस्त कैपेसिटी का मतलब है कि नेशनल इमरजेंसी में थ्योरी के हिसाब से हर नागरिक को एक सुरक्षित शेल्टर में रखा जा सकता है.

क्यों बनाए गए यह शेल्टर? 

यह बंकर जमीन के नीचे बने साधारण कमरों से काफी ज्यादा एडवांस्ड होते हैं. इन्हें मजबूत कंक्रीट की दीवारों से बनाया जाता है. यह जमीन के ऊपर भारी स्ट्रक्चरल  कोलैप्स से बचने के लिए काफी मजबूत होते हैं. कई बंकर एडवांस्ड एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम से लैस होते हैं. यह रेडिएशन, जहरीली गैस और बायोलॉजिकल कॉन्टैमिनेंट्स से बचाने के लिए डिजाइन किए गए हैं. इन शेल्टर के अंदर आमतौर पर वेंटीलेशन सिस्टम, पानी का स्टोरेज, खाने का सामान, मेडिकल किट और बेसिक सर्वाइवल इंफ्रास्ट्रक्चर होता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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