Holi 2026: होली कैसे मनाते थे मुगल बादशाह, जानें बाबर से लेकर बहादुर शाह जफर तक के रिवाज?
Holi 2026: होली का त्योहार आ चुका है. इसी बीच आइए जानते हैं कि मुगल समय में मुगल शासक होली कैसे मनाते थे.

Holi 2026: होली को अक्सर ही एक हिंदू त्योहार के तौर पर देखा जाता है. लेकिन मुगल दरबार में भी इसकी एक खास जगह थी. मुगल काल में यह त्योहार संस्कृतिक मेल और हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक बन गया था. शाही दरबारों में इसे ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी के नाम से जाना जाता था.
अकबर कैसे मनाता था होली का त्योहार?
अकबर ने होली को एक शाही त्योहार में बदल दिया था. आईन-ए-अकबरी के मुताबिक होली की तैयारी महीनों पहले से ही शुरू हो जाती थी. त्योहारों के लिए लंबी दूरी तक रंग छिड़कने वाली खास पानी की तोपों का इंतजाम किया जाता था. महल के अंदर केसर और गुड़हल से बने प्राकृतिक रंग सोने और चांदी के बर्तन में तैयार किए जाते थे. ऐसा कहा जाता है कि अकबर आम लोगों के साथ होली खेलने के लिए किले से बाहर निकला था.
जहांगीर के राज में होली
जहांगीर के राज में होली का जश्न और भी बेहतर होता था. यह त्योहार महफिल-ए-होली के तौर पर मनाया जाता था. इसमें शाही दरबार में संगीत और डांस की महफिल होती थी. उसके जमाने की एक मशहूर छोटी पेंटिंग में जहांगीर अपनी पत्नी नूरजहां और हरम की औरतों के साथ होली खेलते हुए दिख रहा है.
शाहजहां की ईद-ए-गुलाबी
शाहजहां के राज में होली को बड़े पैमाने पर ईद-ए-गुलाबी के नाम से जाना जाता था. यह त्योहार दिल्ली के लाल किले में बड़े पैमाने पर मनाया जाता था. इस दिन संगीत, कव्वाली और डांस इवेंट होते थे. इनमें अमीर और दरबारी शामिल होते थे.
औरंगजेब के समय में होली
औरंगजेब को अक्सर एक धर्मनिष्ठ और रूढ़िवादी शासक के तौर पर दिखाया जाता है. हालांकि उसने खुद ज्यादा खर्चीले जश्न को बढ़ावा नहीं दिया लेकिन ऐतिहासिक बातों से पता चलता है कि शाइस्ता खान जैसे अमीर और सेनापति होली मनाते रहे. कुछ इतिहासकारों का कहना है कि औरंगजेब ने बाद में बड़े सार्वजनिक जश्न पर रोक लगा दी थी.
बहादुर शाह जफर की होली
आखिरी मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर होली का काफी शौकीन था. उसने अपने हिंदू मंत्रियों को अपने माथे पर गुलाल लगाने की इजाजत दी. जफर ने खुद कई होरियां बनाए. होरियां होली के गानों को कहा जाता था. उसके समय में लाल किले के पीछे और राजघाट तक यमुना के किनारे बड़े मेले लगते थे.
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