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कुछ भी बोल सकता है विपक्ष का नेता, संसद में बोलने का नियम क्या?

Kiren Rijiju Mallikarjun Kharge Clash: बीते दिन संसद में मल्लिकार्जुन खड़गे और किरेन रिजिजू के बीच जमकर बहस देखने को मिली. जिसने यह सवाल खड़े किए कि क्या विपक्ष को लोकसभा में कुछ भी बोलने का अधिकार है.

Kiren Rijiju Mallikarjun Kharge Clash: दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर गृहमंत्री के बयान की मांग को लेकर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. खड़गे ने सभापति से गृहमंत्री को सदन में बुलाने का निर्देश देने का आग्रह किया, जिस पर रिजिजू से उनकी तीखी बहस हो गई. इस बहस ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संसद में बोलने की कोई तय सीमा होती है? चलिए जानें.

सदन में रिजिजू से क्यों हुई खड़गे की बहस?

राज्यसभा में चर्चा के दौरान जब सत्ता पक्ष ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बार-बार बोलने पर आपत्ति जताई, तो माहौल गर्मा गया. खड़गे ने सभापति के सामने अपनी बात रखते हुए कहा, "क्या अब मुझे रिजिजू से सीखना पड़ेगा. वे चेयरमैन के चेंबर में जाकर बोलते हैं कि रोज मैं ही यहां आकर बोलता हूं. अगर मैं नियम नहीं पढ़ूंगा तो क्या उनकी दी हुई चीजें पढ़ूं? क्या बोलना है, कब बोलना है और कैसे बोलना है, यह तय करना मेरा अधिकार है." उनके इस बयान के बाद संसदीय मर्यादा और कार्य संचालन के नियमों पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है.

संसदीय आचरण का आधार लोकसभा नियम 349

सदन में सांसदों के व्यवहार और अनुशासन को बनाए रखने के लिए लोकसभा की नियम पुस्तिका का नियम 349 सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है. इसमें सांसदों के आचरण से जुड़े कुल 23 उपखंड शामिल हैं, जो बताते हैं कि सदन की कार्यवाही के दौरान क्या किया जा सकता है और क्या नहीं:

  • नियम 349(1) के तहत कोई भी सांसद भाषण के दौरान ऐसी किताब, अखबार या पत्र नहीं पढ़ सकता, जिसका सदन के विषय से कोई संबंध न हो.
  • नियम 349(2) स्पष्ट करता है कि जब कोई सदस्य बोल रहा हो, तो शोर मचाकर या किसी अन्य तरीके से रुकावट नहीं डाली जाएगी.
  • नियम 349(12) के अनुसार, कोई भी सदस्य स्पीकर की कुर्सी की तरफ पीठ करके न तो बैठेगा और न ही खड़ा होगा.
  • नियम 349(16) के तहत सदन में कोई झंडा, प्रतीक या तस्वीर दिखाना मना है. 

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भाषण के दौरान पालन किए जाने वाले नियम 352

जब कोई सांसद अपनी बात रखना शुरू करता है, तो नियम 352 की पाबंदियां लागू हो जाती हैं. 

  • नियम 352(1) के तहत अदालत में विचाराधीन मामलों पर बोलना मना है. 
  • 352(2) व्यक्तिगत हमलों को रोकता है. 
  • नियम 352(3) के अनुसार किसी राज्य विधानसभा के खिलाफ आपत्तिजनक बात नहीं की जा सकती है. 
  • नियम 352(5) के तहत राष्ट्रपति, संवैधानिक पदों या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पर रोक है. 
  • नियम 352(6) बहस के दौरान राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रपति या अधिकारियों के नाम के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देता है. 
  • इसके अलावा, नियम 352(11) के मुताबिक बिना अनुमति लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ा जा सकता.

आरोप लगाने और सवाल पूछने की तय प्रक्रिया

सदन में बिना साक्ष्य के किसी पर आरोप लगाना नियमों का उल्लंघन है. नियम 353 स्पष्ट करता है कि जब तक स्पीकर की अग्रिम मंजूरी न हो, कोई भी सदस्य किसी व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक या आपराधिक आरोप नहीं लगा सकता है. नियम 354 के अनुसार, राज्यसभा में दिए गए भाषण का संदर्भ लोकसभा में तब तक नहीं दिया जा सकता, जब तक वह किसी मंत्री का बयान या सरकारी नीति से जुड़ा न हो. वहीं, नियम 355 के तहत यदि किसी सदस्य को दूसरे सांसद से सवाल पूछना हो, तो उसे सीधे पूछने के बजाय स्पीकर के माध्यम से ही पूछना अनिवार्य होता है.


कुछ भी बोल सकता है विपक्ष का नेता, संसद में बोलने का नियम क्या?

राज्यसभा का नियम 238A

खड़गे ने बहस के बीच में नियम 238A का भी जिक्र दिया. राज्यसभा में किसी सांसद या लोकसभा सदस्य पर गंभीर या मानहानिकारक आरोप लगाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए नियम 238A एक अहम व्यवस्था प्रदान करता है:

  • कोई भी सदस्य किसी अन्य सांसद पर मानहानिकारक या गंभीर आरोप तब तक नहीं लगा सकता, जब तक वह इसकी लिखित सूचना सभापति और संबंधित मंत्री को पहले से न दे दे.
  • सभापति को अधिकार है कि वे ऐसे किसी भी आरोप को रोक सकते हैं जो उन्हें सदन की गरिमा के खिलाफ लगे.
  • यह नियम सुनिश्चित करता है कि व्यक्तिगत द्वेष या बिना प्रमाण के किसी पर कीचड़ न उछाला जाए और सदन में जनहित की गरिमा बनी रहे.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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