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Iran US Tension: ईरान के आसपास कितने देशों में मौजूद हैं अमेरिकी एयरबेस, क्या यहां से हमला करने से पहले ट्रंप को लेनी होगी परमीशन?

Iran US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जारी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि ईरान के आसपास कौन से ऐसे देश हैं जहां पर अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं.

Iran US Tension: ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, बढ़ती मौतों और तेहरान और वाशिंगटन के बीच धमकियों के आदान-प्रदान के बीच ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के रिश्तों में काफी ज्यादा तनाव बना हुआ है. पश्चिम एशिया की तरफ अमेरिकी नौसेना की गतिविधि और ईरान के अपने एयर स्पेस के कुछ हिस्सों को बंद करने के फैसले ने संभावित सैन्य कार्रवाई के बारे में अटकलों को तेज कर दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि ईरान के आसपास कितने देश में अमेरिकी एयरबेस मौजूद है और क्या यहां पर हमला करने से पहले ट्रंप को परमिशन लेनी होगी.

ईरान के आसपास के देश जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं 

ईरान के आसपास कम से कम 6 देश में बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे या एयर बेस हैं. इनमें से ज्यादातर ठिकाने फारसी खाड़ी के पार हैं.

कतर

कतर में इस क्षेत्र का सबसे जरूरी अमेरिकी बेस है. अल उदीद एयर बेस मध्य पूर्व में सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य सुविधा है. यहां लगभग 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और यह अमेरिकी सेंट्रल कमांड के फारवर्ड हेड क्वार्टर के रूप में भी काम करता है. अल उदीद से अमेरिका पूरे पश्चिम एशिया में हवाई अभियानों का कोऑर्डिनेशन करता है.

बहरीन 

बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवा बेड़ा है. इसका हेड क्वार्टर नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन में है. यह बेस फारसी खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री रास्तों की निगरानी में बड़ी भूमिका निभाता है.

कुवैत 

कुवैत में कैंप आरिफजान और अली अल सलेम एयरबेस जैसी बड़ी सुविधाएं हैं. यह इस क्षेत्र में काम कर रहे अमेरिकी बलों के लिए लॉजिस्टिक्स हब, सैनिकों की तैनाती केंद्र और हवाई परिवहन बेस के रूप में काम करते हैं. 

संयुक्त अरब अमीरात 

संयुक्त अरब अमीरात अमेरिकी बलों को अल-धाफरा एयर‌ बेस तक पहुंचाने की मंजूरी देता है. यहां एडवांस्ड लड़ाकू विमान और निगरानी ड्रोन तैनात हैं. इसके अलावा जेबेल अली बंदरगाह अक्सर अमेरिकी विमान वाहक पोतों और युद्ध पोतों की मेजबानी करता है.

इराक 

इराक पश्चिमी इराक में ऐन एल असद एयर बेस और कुर्द क्षेत्र में एरबिल एयर बेस जैसे ठिकानों पर अमेरिकी सैन्य कर्मचारियों की मेजबानी करता है. यहां का इस्तेमाल आतंकवाद विरोधी अभियानों, खुफिया जानकारी साझा करने और प्रशिक्षण के लिए किया जाता है. 

सऊदी अरब 

सऊदी अरब भी प्रिंस सुल्तान एयर बेस जैसी जगहों पर अमेरिकी बलों की मेजबानी करता है. यहां मिसाइल रक्षा प्रणाली और अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. हालांकि अमेरिकी उपस्थित पिछले सालों की तुलना में शांत है. 

क्या इन ठिकानों से हमला करने के लिए अमेरिका को इजाजत लेनी होगी 

अमेरिका इन ठिकानों से मेजबान देश की सहमति के बिना कानूनी तौर पर हमला कर ही नहीं सकता. यह ठिकाने अमेरिका के इलाके के नहीं है. किसी भी आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए मेजबान सरकार से मंजूरी लेनी होगी. जनवरी 2026 तक ज्यादातर खाड़ी देशों ने अमेरिका ईरान के संभावित संघर्ष में सार्वजनिक रूप से तटस्थ रहने का संकेत दिया है. इनमें से कई देशों ने कथित तौर पर वाशिंगटन को कहा है कि उनके ठिकानों और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए नहीं किया जा सकता.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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