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Iran Protests: भारतीय मुसलमान ईरान क्यों जाते हैं, यहां स्टूडेंट्स को क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?

Iran Protests: ईरान में बढ़ते संघर्ष की वजह से वहां रह रहे भारतीय छात्रों को वापस लाने की तैयारी चल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि वहां पर स्टूडेंट को क्या-क्या सुविधा मिलती है.

Iran Protests: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने ईरान में मौजूद भारतीय छात्रों और नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए रफ्तार तेज कर ली है. विदेश मंत्री ने कहा है कि छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारतीय मुसलमान ईरान क्यों जाते हैं और यहां पर स्टूडेंट्स को क्या-क्या सुविधा मिलती है.

शिया धार्मिक तीर्थ यात्रा 

भारतीय मुसलमान के ईरान जाने की एक बड़ी वजह जियारत है. ईरान शिया इस्लाम के कुछ सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों का घर है. मशहद में शियाओं के आठवें इमाम, इमाम रजा का तीर्थ स्थल है. इसी तरह कुम में बीबी फातिमा मासूमा का भी तीर्थ स्थल है. 

इस्लामी शिक्षा और स्कॉलरशिप में ईरान का महत्व 

ईरान शिया इस्लामी शिक्षा के लिए दुनिया में सबसे बड़े केंद्रों में से एक है. कुम और मशहद जैसे शहरों में मशहूर सेमिनरी है. जहां पर छात्र इस्लामी न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र, दर्शन, अरबी और फारसी साहित्य की पढ़ाई करते हैं. कई भारतीय मुस्लिम छात्र धार्मिक विद्वान, मौलवी या फिर शोधकर्ता बनने के लिए ईरान जाते हैं. 

भारतीय छात्रों के लिए किफायती मेडिकल और उच्च शिक्षा

धार्मिक पढ़ाई के अलावा ईरान मेडिकल और तकनीकी शिक्षा के लिए भी एक प्रसिद्ध जगह है. ईरान में एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की तुलना में काफी कम है. आमतौर पर पूरे कोर्स के लिए लगभग 14 से 15 लाख रुपए लग जाते हैं. यह किफायती होने की वजह से मुस्लिम छात्रों के साथ-साथ बाकी भारतीय समुदाय के छात्रों को भी आकर्षित करता है. 

स्कॉलरशिप और बाकी सुविधा 

ईरानी सरकार अंतरराष्ट्रीय छात्रों को उदार छात्रवृत्ति देती है. इसमें अक्सर पूरी या फिर आंशिक ट्यूशन फीस माफी, मुफ्त या फिर सब्सिडी वाला आवास, मासिक वजीफा और स्वास्थ्य बीमा शामिल होता है. इतना ही नहीं बल्कि यूनिवर्सिटी अलग हॉस्टल भी देती है और कई जगहों पर भारतीय या फिर दक्षिण एशियाई खाने का भी इंतजाम होता है. 

इसी बीच आपको बता दें कि कई ईरानी यूनिवर्सिटी की मेडिकल डिग्रियों को भारत के नेशनल मेडिकल कमीशन और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन से मान्यता मिली हुई है. इसी के साथ यहां पर एडमिशन प्रक्रिया भी काफी आसान है और स्टूडेंट को बेसिक एलिजिबिलिटी जरूरत के अलावा कोई हाई लेवल एंट्रेंस एग्जाम नहीं देना होता.

ये भी पढ़ें: ईरान में बीते 50 साल में हुए कौन-कौन से पांच सबसे बड़े विद्रोह-प्रदर्शन? जानें पूरी कहानी

स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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