अब भारत में धुआंधार निवेश करेगा चीन, सरकार ने शर्तों में दी ढील... मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला
भारत के साथ बॉर्डर से जुड़े देशों के लिए डायरेक्ट विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में बदलाव किया गया है. सरकार ने निवेश संबंधी दिशा-निर्देशों में बदलाव को मंजूरी दी है.

चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर साझा करने वालों देशों के लिए डायरेक्ट विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को और आसान बना दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट बैठक में निवेश संबंधी दिशा-निर्देशों में बदलाव को मंजूरी दी है. कैबिनेट ने 'प्रेस नोट 3 (2020)' के सख्त नियमों में संशोधन किया है. हालांकि, इन निवेश पर क्षेत्र विशेष से जुड़ी सीमाएं और प्रवेश मार्ग समेत एफडीआई नियमों की अन्य शर्तें लागू रहेंगी.
कैबिनेट ने पीएन3 के तहत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश के लिए एक निश्चित समयसीमा के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति (FDI) को मंजूरी दी. डायरेक्ट एफडीआई में बदलाव का मकसद स्टार्टअप्स और डीप टेक कंपनियों के लिए वैश्विक निधियों से ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देना और व्यापार करने में आसानी के एजेंडे को आगे बढ़ाना है.
सरकार ने जारी किया था प्रेस नोट 3 (2020)
गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद निवेश के नियमों को कड़ा किया गया था. कोरोनाकाल में सरकार ने 17 अप्रैल 2020 को जारी प्रेस नोट 3 (2020) (PN3) के माध्यम से मौजूदा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में बदलाव किया था. PN3 के अनुसार, भारत के साथ बॉर्डर साझा करने वाले किसी देश की इकाई, या जहां भारत में निवेश का लाभकारी स्वामी ऐसे किसी देश में स्थित है या उस देश का नागरिक है, सरकार की मंजूरी लेना जरूरी था. इसका मकसद भारतीय कंपनियों के 'अवसरवादी अधिग्रहण' को रोकना था. खासकर चीन की तरफ से. बता दें, गलवान घाटी में हिंसा के बाद सरकार ने 200 से ज्यादा चीनी एप्स को भारत में बैन कर दिया गया था. साथ ही चीनी निवेश के प्रस्तावों की जांच को भी सख्त किया था.
सरकार ने क्यों लिया फैसला
सूत्रों के अनुसार सरकार की ओर से उठाए गए इस बड़े कदम के पीछे व्यापारिक संतुलन और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना वजह माना जा रहा है. भारत के साथ बॉर्डर साझा करने वाला चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में चीन के साथ भारत का बिजनेस घाटा बढ़कर 99.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था. निवेश नियमों में ढील देने से भारत के बॉर्डर वाले देशों की कंपनियां भारत में प्लांट लगा सकेंगी, जिससे आयात कम करने में मदद मिल सकती है.
क्या होगा फायदा?
सरकार के निवेश नियमों आसान करने से भारत में व्यापार करने में और आसानी आएगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा. जिससे FDI में इजाफा होने की उम्मीद है. इसके अलावा नई टेक्नोलॉजी तक पहुंच, घरेलू कंपनियों के विस्तार, ग्लोबल सप्लाई चेन के एकीकरण में फायदा होगा. बढ़े हुए एफडीआई प्रवाह से घरेलू कैपिटल को बल मिलेगा, आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों को फायदा मिलेगा और आर्थिक विकास में तेजी आएगी.
Source: IOCL


























