मिडिल ईस्ट जंग का असर, हवाई यात्रा होगी महंगी, एअर इंडिया ने बढ़ाया किराया, दिल्ली से लंदन का टिकट लाख रुपये पार
मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर अब आम यात्रियों की जेब पर भी पड़ने लगा है. भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी कर दी है.

मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर अब आम यात्रियों की जेब पर भी पड़ने लगा है. भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.
क्यों बढ़ा किराया?
ईरान-इजरायल जंग और होर्मुज रूट पर बाधा आने के बाद से कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. इससे जेट फ्यूल के दाम तेजी से बढ़े हैं. जानकारों का कहना है कि जेट फ्यूल एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा होता है. खर्च बढ़ने पर एयरलाइंस के पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता.
इसके अलावा करीब 10 से 12 देशों ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है, जिसकी वजह से विमानों को लंबे रास्ते से उड़ान भरनी पड़ रही है. इससे फ्यूल की खपत 15 से 20 फीसदी तक बढ़ गई है और उड़ान का समय भी 4 घंटे तक बढ़ गया है.
कितने महंगे हुए टिकट?
दिल्ली से लंदन का किराया जो आमतौर पर 32 से 40 हजार रुपये के बीच रहता था, जो सोमवार को 90,178 रुपये तक पहुंच गया. दिल्ली से अबू धाबी का टिकट 11,875 से बढ़कर 17000 रुपये हो गया जबकि अबू धाबी से दिल्ली वापसी का किराया 42,990 रुपये तक पहुंच गया.
एअर इंडिया ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज
बढ़ती जेट फ्यूल कीमतों के बीच एअर इंडिया ने डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है. कंपनी का कहना है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से ऑपरेटिंग लागत बढ़ गई है जिसके चलते यह कदम उठाया गया है. इसके कारण आने वाले दिनों में यात्रियों को हवाई टिकट के लिए पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है.
एअर इंडिया ने घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर कितना फ्यूल सरचार्ज का ऐलान किया?
- घरेलू और SAARC रूट पर 399 का फ्यूल सरचार्ज लगेगा.
- मिडिल ईस्ट रूट पर 10 डॉलर और साउथईस्ट एशिया रूट पर 60 डॉलर सरचार्ज.
- फेज-2 में नॉर्थ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया रूट पर 200 डॉलर तक सरचार्ज लगाने की तैयारी.
- 1,770 इंटरनेशनल फ्लाइट्स कैंसिल
रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक 28 फरवरी से 5 मार्च के बीच भारतीय एयरलाइंस को 1,770 इंटरनेशनल फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ीं. दुनियाभर में यह संख्या 27,000 से ज्यादा बताई जा रही है. इस वजह से एयरलाइंस को सिर्फ रेवेन्यू का नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि अतिरिक्त एयरपोर्ट चार्ज और फ्यूल खर्च भी बढ़ा है.
ICRA का अनुमान - 17,000-18,000 करोड़ का घाटा
ICRA का अनुमान है कि इस साल यानी FY26 में भारतीय एयरलाइंस को करीब 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये का नेट लॉस हो सकता है. IndiGo और SpiceJet के शेयर सोमवार को क्रमश: 3.4 प्रतिशत और 6.64 प्रतिशत गिरे.
सरकार से राहत की मांग
एयरलाइंस ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री से जेट फ्यूल पर टैक्स में राहत देने और एयरपोर्ट फीस घटाने की मांग की है. साथ ही कहा जा रहा है कि सरकार को फेयर कैप हटाना चाहिए ताकि एयरलाइंस बाजार के हिसाब से किराया तय कर सकें.
Source: IOCL



























