एक्सप्लोरर

प्रॉक्सी वॉर से ब्लैक-चैनल टॉक तक... ईरान जंग में इस्तेमाल हो रहे इन 10 शब्दों का क्या है मतलब?

Iran Israel US War Worlds: पश्चिम एशिया की जंग ने दुनिया को युद्ध के नए शब्दों से रूबरू कराया है. प्रॉक्सी वॉर के जरिए परदे के पीछे की लड़ाई से लेकर लॉइटरिंग म्यूनिशन जैसे शब्द इस वक्त चलन में हैं.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • प्रॉक्सी वॉर में तीसरे गुटों के जरिए दुश्मन को कमजोर किया जाता है.

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष केवल मिसाइलों और ड्रोनों का खेल नहीं है, बल्कि यह कूटनीति और सैन्य शब्दावली की एक जटिल बिसात भी है. जब हम टीवी या अखबारों में पश्चिम एशिया की जंग की खबरें देखते हैं, तो 'प्रॉक्सी वॉर', 'डिटरेंस' और 'बैक-चैनल टॉक' जैसे शब्द बार-बार कान में सुनाई पड़ते हैं. ये शब्द केवल किताबी परिभाषाएं नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे हजारों लोगों की जान और देशों का भविष्य टिका होता है. इस महायुद्ध को गहराई से समझने के लिए इन 10 सैन्य और कूटनीतिक शब्दों का असली मतलब जानना बेहद जरूरी है, जो आज की तारीख में युद्ध का नया व्याकरण बन चुके हैं.

लॉइटरिंग म्यूनिशन

आधुनिक युद्ध में अब केवल सीधी मिसाइलें नहीं चलतीं, बल्कि 'लॉइटरिंग म्यूनिशन' ने जंग का तरीका बदल दिया है. ये ऐसे घातक हथियार हैं जिन्हें हवा में छोड़कर भुला दिया जाता है. ये काफी देर तक आसमान में किसी शिकारी की तरह मंडराते रहते हैं और अपने सही शिकार (टारगेट) का इंतजार करते हैं. जैसे ही इन्हें अपना लक्ष्य दिखता है, ये सीधे उससे टकराकर खुद को धमाके के साथ उड़ा लेते हैं. इन्हें 'कामेकाजी ड्रोन' भी कहा जाता है क्योंकि ये हमले के साथ खुद को भी खत्म कर लेते हैं. ईरान-इजरायल तनाव में इन सुसाइड ड्रोन्स का खौफ सबसे ज्यादा देखा जा रहा है.

प्रिसिजन स्ट्राइक

आजकल की जंग में अंधाधुंध बमबारी के बजाय 'प्रिसिजन स्ट्राइक' पर जोर दिया जाता है. इसका सीधा मतलब है- सर्जिकल स्ट्राइक जैसी सटीकता. इसमें स्मार्ट मिसाइलों और गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल होता है जो केवल चुने हुए सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आसपास के रिहायशी इलाकों और आम नागरिकों को कम से कम नुकसान पहुंचता है, जिसे सैन्य भाषा में 'कोलैटरल डैमेज' कम करना कहते हैं. इजरायल अक्सर इसी तकनीक का दावा कर ईरान के ठिकानों को ध्वस्त करता है.

यह भी पढ़ें: LPG Shortage: क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलते ही भारत में खत्म हो जाएगी LPG की किल्लत, इसमें कितना लगेगा वक्त?

एनर्जी वेपनाइजेशन

युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि रसोई और फैक्ट्रियों में भी लड़ा जाता है. 'एनर्जी वेपनाइजेशन' का मतलब है जब कोई देश अपनी ऊर्जा शक्ति जैसे तेल, गैस या बिजली की सप्लाई को हथियार बना ले. ईरान जैसे देश, जो तेल के बड़े उत्पादक हैं, वे दुनिया पर दबाव बनाने के लिए सप्लाई रोक सकते हैं या कीमतें बढ़ा सकते हैं. इससे दुश्मन देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है और वहां का आम जीवन ठप हो जाता है. बिना एक भी गोली चलाए किसी देश को घुटनों पर लाने का यह सबसे कारगर तरीका माना जाता है.

वॉर फटीग

किसी भी लंबी खिंचती जंग का सबसे बुरा पहलू है 'वॉर फटीग' यानी युद्ध की थकान. जब महीनों या सालों तक लड़ाई चलती है, तो देश का खजाना खाली होने लगता है, सैनिकों की कमी हो जाती है और जनता का मनोबल टूटने लगता है. लोग युद्ध से ऊबने लगते हैं और शांति की मांग करने लगते हैं. जब किसी देश की लड़ने की इच्छाशक्ति और संसाधन जवाब देने लगें, तो उसे वॉर फटीग की स्थिति कहा जाता है. रूस-यूक्रेन के बाद अब पश्चिम एशिया में भी धीरे-धीरे यह स्थिति दिखने लगी है.

प्रॉक्सी वॉर

ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग का एक बड़ा हिस्सा 'प्रॉक्सी वॉर' है. इसका मतलब है कि दो बड़े देश सीधे एक-दूसरे से न लड़कर किसी तीसरे छोटे गुट, आतंकवादी संगठन या विद्रोहियों का इस्तेमाल करते हैं. ईरान पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वह हिजबुल्लाह या हमास जैसे गुटों के जरिए इजरायल पर हमले करवाता है. इसमें मुख्य देश सीधे तौर पर युद्ध में शामिल नहीं दिखता, लेकिन वह पैसे, हथियार और ट्रेनिंग देकर अपने दुश्मन को कमजोर करता रहता है. इसे ही परोक्ष या छद्म युद्ध कहा जाता है. 

बैक-चैनल टॉक

अक्सर जब दुनिया को लगता है कि अब परमाणु युद्ध हो जाएगा, तब परदे के पीछे 'बैक-चैनल टॉक' चल रही होती है. यह आधिकारिक राजनयिक बैठकों से अलग होती है. इसमें भरोसेमंद दूत या तीसरे देश के मध्यस्थ चुपचाप दोनों पक्षों से बात करते हैं. चूंकि यह बातचीत सार्वजनिक नहीं होती, इसलिए दोनों देश खुलकर अपनी शर्तें रख पाते हैं और बिना अपनी साख खोए समझौते की जमीन तैयार करते हैं. कई बार बड़े युद्धविराम की नींव इन्ही गुप्त मुलाकातों में रखी जाती है.

डिटरेंस

'डिटरेंस' का सीधा अर्थ है- दुश्मन के मन में इतना डर पैदा कर देना कि वह हमला करने की हिम्मत ही न जुटा पाए. यह शक्ति प्रदर्शन और आधुनिक हथियारों के संतुलन पर टिका होता है. जब किसी देश को पता होता है कि अगर उसने हमला किया, तो सामने वाला देश उसे पूरी तरह बर्बाद कर देगा, तो वह पीछे हट जाता है. परमाणु हथियार डिटरेंस का सबसे बड़ा उदाहरण हैं. ईरान और इजरायल दोनों ही एक-दूसरे को अपनी मिसाइल ताकत दिखाकर युद्ध को टालने (डिटरेंस बनाने) की कोशिश करते रहते हैं.

रेड लाइन

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में 'रेड लाइन' एक ऐसी चेतावनी है जिसे पार करने का मतलब है- सीधा महायुद्ध. कोई भी देश अपनी एक सीमा या शर्त तय कर देता है, जैसे कि अगर हमारे परमाणु केंद्र पर हमला हुआ, तो हम पूरी ताकत से पलटवार करेंगे. यही वह रेड लाइन होती है. अगर विरोधी पक्ष इस सीमा को लांघता है, तो उसे कड़े सैन्य जवाब का सामना करना पड़ता है. ईरान-इजरायल के बीच रेड लाइन्स लगातार बदल रही हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है.

एस्केलेशन और डी-एस्केलेशन

जंग में जब छोटे हमले बड़े हमलों में बदल जाएं, घातक हथियारों का प्रयोग बढ़ जाए और लड़ाई नए इलाकों में फैल जाए, तो उसे 'एस्केलेशन' कहते हैं. इसके ठीक उलट, जब दोनों पक्ष हमले रोक दें, बातचीत शुरू करें और तनाव कम करें, तो उसे 'डी-एस्केलेशन' कहा जाता है. पूरी दुनिया की कोशिश हमेशा डी-एस्केलेशन की होती है, लेकिन पश्चिम एशिया में फिलहाल एस्केलेशन यानी तनाव बढ़ता ही जा रहा है.

ऑफ-रैंप

युद्ध में जब दोनों पक्ष फंस जाते हैं और किसी को जीत नहीं मिलती, तब 'ऑफ-रैंप' की तलाश की जाती है. यह एक ऐसा डिप्लोमेटिक रास्ता है जो दोनों देशों को बिना यह जताए कि वे हार गए हैं, युद्ध रोकने का मौका देता है. इसे 'फेस सेविंग' (इज्जत बचाना) भी कहते हैं. ऑफ-रैंप के जरिए कोई तीसरा देश बीच-बचाव करता है और एक ऐसा समझौता करवाता है जिससे दोनों देश अपने-अपने घर वापस लौट सकें और दुनिया को कह सकें कि उन्होंने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं.

यह भी पढ़ें: US Fighter Jets: ईरान के अलावा कौन-कौन से देश गिरा चुके हैं अमेरिकी फाइटर जेट, भारत ने कितने मारे?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

जहां है दिल्ली का जिमखाना, वहां कितने में है जमीन? जानें रियल एस्टेट के दाम
जहां है दिल्ली का जिमखाना, वहां कितने में है जमीन? जानें रियल एस्टेट के दाम
Power Consumption in UP: एक दिन में कितनी बिजली खपा देते हैं यूपी वाले, जानें कितनी है डिमांड?
एक दिन में कितनी बिजली खपा देते हैं यूपी वाले, जानें कितनी है डिमांड?
UCC in India: अब तक कितने राज्यों में लागू हो चुका है UCC? यहां देख लें पूरी लिस्ट
अब तक कितने राज्यों में लागू हो चुका है UCC? यहां देख लें पूरी लिस्ट
किसे मिलती है IPL ट्रॉफी जीतने वाली टीम की प्राइज मनी, फ्रेंचाइजी मालिक या प्लेयर्स?
किसे मिलती है IPL ट्रॉफी जीतने वाली टीम की प्राइज मनी, फ्रेंचाइजी मालिक या प्लेयर्स?
Advertisement

वीडियोज

Bihar News: मलमास मेले में बड़ा हादसा, झूले से गिरा युवक गंभीर | Crime | MalmashMela | Mela Accident
Mahindra XEV 9s Ownership Review (Pack 2) | #mahindra #mahindraxev9s #review #autolive
US Iran Ceasefire Update: होर्मुज के पास विस्फोट या गोलीबारी? | Hormuz Strait | Breaking
Mercedes-Benz to launch it’s first plug in hybrid in India with new S-Class | #mercedes #autolive
Sansani | Coimbatore News: एकतरफा प्यार का 'बमबाज' दिलजला! | CCTV | Breaking News | Crime News
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement
Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
गुड न्यूज कभी भी आ सकती है! ईरान संग डील पर मार्को रुबियो का यू-टर्न, अब बोले- 'अभी कुछ भी....' 
गुड न्यूज कभी भी आ सकती है! ईरान संग डील पर मार्को रुबियो का यू-टर्न, अब बोले- 'अभी कुछ भी....' 
बिहार: विधान परिषद की 9 सीटों पर चुनाव का ऐलान, नीतीश कुमार की सीट पर भी उपचुनाव, नतीजे कब?
बिहार: विधान परिषद की 9 सीटों पर चुनाव का ऐलान, नीतीश कुमार की सीट पर भी उपचुनाव, नतीजे कब?
Explained: इजरायल को ताकत देने वाला अब्राहम अकॉर्ड क्या है, ट्रंप क्यों अरब देशों पर साथ देने का बना रहे दबाव?
इजरायल को ताकत देने वाला अब्राहम अकॉर्ड क्या है, ट्रंप क्यों बोले- अरब देशों को साथ देना होगा?
RCB QUALIFIER-1 IPL 2026: क्वालीफायर-1 से पहले RCB को मिली बड़ी खुशखबरी, विराट कोहली के साथ वापसी करेंगे फिल सॉल्ट!
क्वालीफायर-1 से पहले RCB को मिली बड़ी खुशखबरी, विराट कोहली के साथ वापसी करेंगे फिल सॉल्ट!
Chand Mera Dil BO Day 4: मंडे को 50 फीसदी घटी ‘चांद मेरा दिल’ की कमाई, लेकिन 15 करोड़ का आंकड़ा छूने से है इंचभर दूर, जानें- कलेक्शन
मंडे को 50 फीसदी घटी ‘चांद मेरा दिल’ की कमाई, जानें- चौथे दिन कितना किया कलेक्शन?
क्यों भट्टी की तरह जल रही दिल्ली? ताजा रिपोर्ट ने बताई असली वजह, हीट स्ट्रेस की चपेट में 75 फीसदी राजधानी
क्यों भट्टी की तरह जल रही दिल्ली? ताजा रिपोर्ट ने बताई असली वजह, हीट स्ट्रेस की चपेट में 75 फीसदी राजधानी
Ebola Virus: अफ्रीका में तेजी से फैल रहा इबोला वायरल, जानिए क्या हैं इससे बचाव के उपाय?
अफ्रीका में तेजी से फैल रहा इबोला वायरल, जानिए क्या हैं इससे बचाव के उपाय?
NEET UG Re-Exam 2026 : नीट री एग्जाम के लिए किन किन राज्यों में स्टूडेंट्स को मिलेंगी फ्री बस, यहां देख लें लिस्ट
नीट री एग्जाम के लिए किन किन राज्यों में स्टूडेंट्स को मिलेंगी फ्री बस, यहां देख लें लिस्ट
Embed widget