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स्टेशन मास्टर को अब क्यों कहा जाएगा यार्ड मास्टर, जान लें दोनों में क्या है अंतर?

भारतीय रेलवे ने दो दशक पुराने इंतजार को खत्म करते हुए 'यार्ड मास्टर' और 'ट्रैफिक इंस्पेक्टर' के पदों को 'स्टेशन मास्टर' कैडर में शामिल कर दिया है. आइए इन दोनों में फर्क क्या है जान लेते हैं.

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  • यार्ड मास्टर का काम बड़े यार्ड में ट्रेनों के रखरखाव व शंटिंग पर केंद्रित.

भारतीय रेलवे अपनी व्यवस्था को समय के साथ लगातार आधुनिक और बेहतर बना रहा है. इसी कड़ी में रेलवे बोर्ड ने प्रशासनिक स्तर पर एक बेहद ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसका इंतजार पिछले बीस सालों से भी ज्यादा समय से किया जा रहा था. रेलवे ने अब 'यार्ड मास्टर' और 'ट्रैफिक इंस्पेक्टर' जैसे पुराने हो चुके अलग-अलग पदनामों को पूरी तरह खत्म करने का आदेश जारी कर दिया है. इन सभी अलग-अलग पदों को अब सीधे तौर पर 'स्टेशन मास्टर' के मुख्य कैडर के साथ जोड़ दिया गया है, जिससे रेल संचालन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

दो दशक पुराना ऐतिहासिक फैसला लागू

रेलवे बोर्ड के इस नए और बड़े आदेश के बाद अब इन तीनों ही विभागों के कर्मचारियों की पहचान बिल्कुल एक समान हो जाएगी. इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब सभी रेल कर्मी स्टेशन मास्टर कैडर की मुख्यधारा का हिस्सा बन जाएंगे. इसके चलते उन्हें आगे चलकर राजपत्रित अधिकारी (गैजेटेड ऑफिसर) बनने का एक शानदार और बड़ा अवसर मिल सकेगा. रेलवे प्रशासन अब अपनी जरूरत के हिसाब से एक ही अधिकारी को स्टेशन संचालन, यार्ड के प्रबंधन या फिर निरीक्षण की बड़ी जिम्मेदारी आसानी से सौंप सकेगा.

प्रमोशन की पुरानी दीवारें हुईं ध्वस्त

इस विलय से पहले ये तीनों ही पद अलग-अलग 'पॉकेट्स' यानी सीमित दायरों में बंटे हुए थे, जिससे कर्मचारियों के करियर की तरक्की रुक जाती थी. पुराने नियमों के मुताबिक, एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर प्रमोशन पाने के बाद भी केवल सेफ्टी या इंस्पेक्शन शाखा तक ही सीमित रह जाता था. इसी तरह, एक यार्ड मास्टर तरक्की पाकर ज्यादा से ज्यादा चीफ यार्ड मास्टर के पद तक ही पहुंच पाता था. इस व्यवस्था के कारण इन कर्मचारियों के सामने ऊंचे पदों पर जाने के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाते थे.

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बड़े अधिकारियों की कुर्सी तक का सफर

अब इस नए बदलाव के बाद पदोन्नति यानी प्रमोशन के नियम पूरी तरह बदल गए हैं. नए कैडर विलय के चलते अब कोई भी कर्मचारी स्टेशन मास्टर से प्रमोट होकर सीधे स्टेशन अधीक्षक बन सकेगा. इसके बाद उनका सफर सहायक परिचालक प्रबंधक (ग्रुप बी राजपत्रित) तक पहुंचेगा. इतना ही नहीं, काबिल कर्मचारी आगे बढ़ते हुए मंडल परिचालन प्रबंधक (ग्रुप ए सीनियर स्केल) और अंत में वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (ग्रुप ए जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव) जैसे बेहद रसूखदार और ऊंचे पदों पर भी आसानी से आसीन हो सकेंगे.

कौन होता है स्टेशन मास्टर?

अगर दोनों पदों में अंतर की बात करें, तो स्टेशन मास्टर भारतीय रेलवे का सबसे मुख्य और जिम्मेदारी वाला चेहरा होता है. आसान शब्दों में कहें तो वह किसी भी रेलवे स्टेशन का पूरी तरह से मुख्य प्रभारी (इन-चार्ज) माना जाता है. स्टेशन पर जितनी भी ट्रेनें आती और जाती हैं, उनका सुरक्षित संचालन करना स्टेशन मास्टर की ही जिम्मेदारी होती है. इसके अलावा यात्रियों की पूरी सुरक्षा, स्टेशन की व्यवस्था और वहां काम करने वाले बाकी सभी छोटे-बड़े रेल कर्मचारियों को संभालना इसी अधिकारी के जिम्मे होता है.

स्टेशन मास्टर के मुख्य काम

एक स्टेशन मास्टर का सबसे पहला और बड़ा काम ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना होता है. किस ट्रेन को किस प्लेटफॉर्म पर लाना है और कब रवाना करना है, इसका अंतिम फैसला वही लेता है. इसके साथ ही सिग्नल देना, ट्रैक को स्विच करना, स्टेशन पर साफ-सफाई बनाए रखना, ट्रेनों की आवश्यक घोषणाएं करवाना और यात्रियों की समस्याओं को दूर करना इसी के दायरे में आता है. किसी भी आपातकालीन स्थिति या दुर्घटना के समय तुरंत बड़े फैसले लेने की जिम्मेदारी भी इसी की होती है.

क्या होता है यार्ड मास्टर?

इसके विपरीत, यार्ड मास्टर की भूमिका स्टेशन के मुख्य प्लेटफॉर्मों से थोड़ी अलग और तकनीकी होती है. यार्ड मास्टर की तैनाती आमतौर पर बहुत बड़े जंक्शनों, प्रमुख टर्मिनल स्टेशनों और मालगाड़ियों के मार्शलिंग यार्डों में की जाती है. जहां स्टेशन मास्टर मुख्य स्टेशन को संभालता है, वहीं यार्ड मास्टर का पूरा ध्यान स्टेशन के पीछे बने यार्ड के भीतर ट्रेनों के रख-रखाव, बोगियों को आपस में जोड़ने (शंटिंग), मालगाड़ियों में सामान लादने और उन्हें सही समय पर मुख्य लाइन तक सुरक्षित भेजने पर केंद्रित होता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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