Zero Electricity Bill Villages: भारत के इन गांवों में नहीं आता बिजली का बिल, वजह जानकर नहीं होगा यकीन
Zero Electricity Bill Villages: भारत में कुछ ऐसे गांव भी हैं जहां बिजली का बिल बिल्कुल भी नहीं आता. आइए जानते हैं उन गांव के बारे में.

- सरकारी फंडिंग और जल प्रबंधन से गांवों को मिली ऊर्जा आजादी।
Zero Electricity Bill Villages: भारत के कई गांव में अब लोग बिना मासिक बिजली बिल की चिंता किए रह रहे हैं. जहां कहीं शहरों में बिजली की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं वहीं कुछ गांवों ने बड़े पैमाने पर सोलर पावर सिस्टम, स्मार्ट ग्रिड और एडवांस्ड बैट्री स्टोरेज टेक्नोलॉजी के जरिए लगभग पूरी तरह से ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है. आइए जानते हैं इन्हीं गांवों के बारे में.
गुजरात का मोढेरा गांव
मोढेरा में जीरो बिजली बिल मॉडल सिर्फ छतों पर सोलर पैनल लगाकर नहीं बनाया गया था. इसके बजाय पूरे गांव में बिना किसी रूकावट के बिजली की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा तीन स्तरीय ऊर्जा सिस्टम विकसित किया गया था. गांव से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित सुज्जनपुर में लगभग 12 हेक्टेयर जमीन पर एक बड़ा 6 मेगावाट का जमीन पर लगा सोलर पावर प्लांट बनाया गया था. दिन के समय यह पावर प्लांट गांव की ज्यादातर बिजली की जरूरत को पूरा करता है.
इस प्रोजेक्ट में एक 15 मेगावाट का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी शामिल है. यह दिन के दौरान पैदा हुई अतिरिक्त सोलर एनर्जी को स्टोर करता है. रात में गांव अपने आप बैटरी पावर पर चला जाता है जिस वजह से सूरज डूबने के बाद भी बिना किसी रूकावट के बिजली मिलती रहती है.
स्मार्ट मीटर बिजली के इस्तेमाल पर नजर रखने में मदद करते हैं
इस गांव में 1600 से ज्यादा घरों में पारंपरिक बिजली मीटरों के बजाय डिजिटल स्मार्ट मीटर लगाए गए थे. यह स्मार्ट सिस्टम इस बात पर नजर रखते हैं कि कोई घर कितनी बिजली इस्तेमाल करता है और छतों पर लगे सोलर पैनल के जरिए कितनी अतिरिक्त सोलर एनर्जी वापस पावर ग्रिड में भेजी जाती है.
इस प्रोजेक्ट की सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह में से एक सरकारी फंडिंग थी. रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर 65 करोड़ से ज्यादा का खर्च आया था. इसे भारत सरकार और गुजरात सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी पहलों के जरिए 50: 50 की साझेदारी में मिलकर फाइनेंस किया था.
एक और जाना माना उदाहरण
जल संरक्षण, कृषि सुधार और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल के अपने सफल मॉडल की वजह से इस गांव को अक्सर भारत के सबसे अमीर गांव में से एक कहा जाता है. सिर्फ टेक्नोलॉजी पर निर्भर रहने के बजाय यह गांव कुशल जल प्रबंधन पर काफी ज्यादा ध्यान देता है. गन्ने जैसी ज्यादा पानी चाहने वाली फसलों पर रोक लगा दी गई, जिस वजह से सिंचाई से जुड़ी बिजली की ज्यादा खपत को कम करने में मदद मिली.
इसी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के सफल मॉडलों से प्रेरित होकर कई राज्य अब अपने खुद के सोलर पावर गांव विकसित कर रहे हैं. सतारा जिले का मान्याचीवाड़ी महाराष्ट्र का पहला पूरी तरह से सोलर पावर गांव बन गया है. यहां घर और किसान दोनों को काफी कम या फिर बिल्कुल भी बिजली का बिल नहीं देना पड़ता.
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