80 साल में कितनी बदली भारत की सुरक्षा? अभी कितनी है सैन्य ताकत
Indian Military Power: 1947 से अब तक भारतीय सेना स्वदेशी हथियारों, आधुनिक तकनीक और परमाणु शक्ति के दम पर दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति बन चुकी है.

Indian Military Power: कल भारत ने अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया है. 1947 में मिली आजादी के बाद से लेकर अब तक के लगभग आठ दशकों में भारतीय सेना ने एक औपनिवेशक विरासत से निकलकर दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य शक्तियों में अपनी जगह बनाई है. शुरुआती दिनों में सीमित संसाधनों और विदेशी हथियारों के सहारे चलने वाली फौज आज पूरी तरह आधुनिक, स्वदेशी और तकनीकी रूप से सशक्त बन चुकी है. 1947 के कश्मीर युद्ध से लेकर 1971 की ऐतिहासिक जीत और कारगिल युद्ध तक, सेना ने हर मोर्चे पर देश की सीमाओं को सुरक्षित रखा है. आइए विस्तार से जानते हैं कि 80 सालों में भारत की सुरक्षा और सैन्य क्षमता कितनी बदली है.
ब्रिटिश कमान से भारतीय नेतृत्व तक का सफर
आजादी के वक्त भारतीय सेना की बागडोर ब्रिटिश अधिकारियों के हाथों में थी, लेकिन 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने के साथ ही भारतीयकरण की शुरुआत हुई. इसके बाद 1955 में प्रशासनिक बदलाव करते हुए थल, नौ और वायु सेना प्रमुखों को स्वतंत्र और समान अधिकार दिए गए. हाल के वर्षों में सेना ने अपनी पोशाक, परंपराओं और प्रतीकों से औपनिवेशिक छाप को पूरी तरह हटाकर भारतीय सांस्कृतिक पहचान को अपनाया है.
रक्षात्मक रणनीति से आक्रामक कार्रवाई तक बदलाव
1947-48, 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने अपनी वीरता साबित की. 1984 के ऑपरेशन मेघदूत के तहत दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा कर भारत ने साम्रिक बढ़त हासिल की. समय के साथ भारत की सुरक्षा नीति भी बदली है. अब सेना केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर सीमा पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने और दुश्मनों को करारा जवाब देने में सक्षम है.
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विदेशी हथियारों से स्वदेशी तकनीक की ओर
आजादी के समय भारत हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था, लेकिन अब मेक इन इंडिया के तहत देश रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है. आज भारतीय सेना के पास ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, अग्नि सीरीज की मिसाइलें, अर्जुन टैंक और प्रचंड जैसे हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर मौजूद हैं. वायुसेना राफेल और स्वदेशी तेजस से लैस है, तो नौसेना आईएनएस विक्रांत जैसे स्वदेशी विमान वाहक पोत और परमाणु पनडुब्बियों के दम पर हिंद महासागर में एक बड़ी ताकत बन चुकी है.
परमाणु क्षमता और आधुनिक युद्धक तकनीक
1974 और 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद भारत एक घोषित परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना, जिससे देश की सुरक्षा को मजबूती मिली. आज का युद्ध सिर्फ गोलियों से नहीं लड़ा जाता, इसलिए भारतीय सेना ने खुद को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वॉरफेयर, अंतरिक्ष आधारित निगरानी और ड्रोन तकनीक से पूरी तरह लैस कर लिया है.
सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
1947 में महिलाओं की भूमिका केवल सेना के मेडिकल कोर तक सीमित थी. लेकिन आज समय बदल चुका है. भारतीय सेना में अब महिलाओं को कॉम्बैट भूमिकाओं, फाइटर पायलट के रूप में, परमानेंट कमीशन और उच्च प्रशासनिक पदों पर तैनात किया जा रहा है, जो महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है.
वैश्विक शांति और भारत का दबदबा
संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति अभियानों में भारतीय सेना हमेशा सबसे आगे रही है. कांगो, सूडान जैसे देशों में भारतीय सैनिकों ने अपनी बहादुरी और मानवीय दृष्टिकोण से वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है.

दुनिया में चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत सैन्य ताकत के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर है. अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत का स्थान आता है. सक्रिय सैनिकों की संख्या में भारत दूसरे नंबर पर है और देश का रक्षा बजट दुनिया के शीर्ष तीन बजटों में शामिल है.
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