'विमल पान मसाला' एड पर शाहरूख-अजय देवगन को नोटिस, क्या हो सकता है एक्शन?
SRK-Ajay Vimal Controversy: शाहरुख खान और अजय देवगन की मुश्किलें बढ़ चुकी हैं. विमल के विज्ञापन को लेकर उन्हें कारण बताओं नोटिस भेजा गया है. आइए जानते हैं पूरी जानकारी.

- महाराष्ट्र FDA ने अभिनेताओं को विमल विज्ञापन पर नोटिस भेजा।
- विज्ञापन को प्रतिबंधित पान मसाला का सरोगेट प्रचार बताया गया।
- फूड एक्ट उल्लंघन पर ₹10 लाख तक जुर्माना संभव।
- अभिनेताओं को 15 दिन में जवाब-दस्तावेज देने होंगे।
SRK-Ajay Vimal Controversy: महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन के लिए कारण बताओं नोटिस जारी किया है. रेगुलेटर का यह आरोप है कि ये विज्ञापन पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन के दायरे में आ सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पान मसाला पर राज्य में प्रतिबंध है. एक्टर्स को अपना पक्ष रखने और एंडोर्समेंट से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई है. यह मामला सिर्फ एक विज्ञापन तक सीमित नहीं है. इसी बीच आइए जानते हैं कि इन एक्टर्स के खिलाफ क्या एक्शन लिया जा सकता है.
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने यह नोटिस क्यों जारी किए?
11 अगस्त 2026 की तारीख वाले 9 पन्नों के ये नोटिस महाराष्ट्र के फूड सेफ्टी कमिश्नर और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन प्रमुख तुकाराम मुंडे ने जारी किए थे. रेगुलेटर ने मुख्य रूप से फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के प्रावधानों का हवाला दिया.
इस एक्ट की धारा 24 उन विज्ञापनों पर रोक लगाती है जो खाद्य उत्पादों के संबंध में झूठे, गुमराह करने वाले या फिर धोखा देने वाले हों. फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन का तर्क यह है कि पान मसाला से मजबूती से जुड़ी ब्रांड पहचान के तहत विमल इलायची का प्रचार करने से यह धारणा बन सकती है कि उपभोक्ताओं को प्रतिबंधित उत्पाद खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
दूसरा प्रावधान धारा 30 (2) (a) है. महाराष्ट्र ने राज्य में पान मसाला, तंबाकू और गुटखा निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर 13 जुलाई 2026 से 1 साल का प्रतिबंध लगाया है. इस वजह से रेगुलेटर यह जांच कर रहा है कि क्या उसी ब्रांड से जुड़ा विज्ञापन उस प्रतिबंध को दरकिनार कर सकता है.

सेरोगेट एडवरटाइजिंग क्या है?
मुख्य कानूनी सवाल सेरोगेट एडवरटाइजिंग का है. ऐसा तब होता है जब कोई कंपनी किसी प्रतिबंधित उत्पाद का सीधे विज्ञापन नहीं कर सकती और इसके बजाय उसी या फिर उससे मिलती-जुलती ब्रांड पहचान का इस्तेमाल करके किसी दूसरे उत्पाद का प्रचार करती है.
उदाहरण के लिए प्रतिबंधित उत्पाद बेचने वाली कंपनी उसी ब्रांड नाम के तहत इलायची, सोडा या फिर दूसरी अनुमति प्राप्त आइटम का विज्ञापन कर सकती है. हालांकि विज्ञापन तकनीकी रूप से कानूनी उत्पादन का प्रचार करता है, लेकिन रेगुलेटर यह जांच सकते हैं कि क्या इसकी ब्रांडिंग, रंग, पैकेजिंग, टैगलाइन और कुल मिलाकर प्रस्तुति उपभोक्ताओं को प्रतिबंधित उत्पाद की याद दिलाती है या नहीं.
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एक्टर्स से कौन से दस्तावेज देने को कहा गया?
रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटिस में सिर्फ एक साधारण स्पष्टीकरण से काफी ज्यादा जानकारी मांगी गई है. एक्टर और उनकी एजेंसियों से उनसे उनके एंडोर्समेंट एग्रीमेंट से जुड़े सबूत देने को कहा गया है. इसमें उनके एंडोर्समेंट एग्रीमेंट और कैंपेन ब्रीफ की कॉपी, पेमेंट या फिर दूसरे फायदे की जानकारी और विज्ञापन स्वीकार करने से पहले की गई जरूरी जांच पड़ताल के सबूत शामिल हैं. यह फर्क काफी ज्यादा जरूरी है. शो कॉज नोटिस से ही कोई दोषी साबित नहीं होता था. आगे की कार्रवाई सही है या फिर नहीं यह तय करने से पहले रेगुलेटर को जवाब और सबूत पर विचार करना होगा.

क्या सजा हो सकती है?
अगर अधिकारी इस नतीजे पर पहुंचता है कि विज्ञापन में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 का उल्लंघन किया है तो सेक्शन 53 के तहत खाने पीने की चीजों के गुमराह करने वाले विज्ञापन के लिए ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है.
कंज्यूमर प्रोटक्शन एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला केंद्रीय कंज्यूमर प्रोटक्शन अथॉरिटी को भेज दिया गया है. इसके पास गुमराह करने वाले विज्ञापनों और एंडोर्समेंट के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है. पहली बार उल्लंघन करने पर एंडोर्सर को 1 साल तक प्रोडक्ट का एंडोर्समेंट करने से रोका जा सकता है और ₹10 लाख तक का जुर्माना भी लग सकता है. बार-बार उल्लंघन करने पर एंडोर्समेंट पर रोक 3 साल तक बढ़ाई जा सकती है और जुर्माना 50 लाख तक हो सकता है.
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