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इन मार्केट में छिपा है सेकंड हैंड कारों का खजाना, आधे दाम में मिलेंगी
Second Hand Markets: अगर किसी शख्स का बजट नई कार खरीदने के लिए कम है तो पुरानी कार उसके लिए बेहतर ऑप्शन हो सकती है. यहां कम कीमत में सेकेंड हैंड कार खरीदने का ऑप्शन मौजूद है.

सेकंड हैंड कार मार्केट
Source : Magnific
नई कार खरीदना हर किसी के बजट में नहीं होता. खासकर जब कार के साथ रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और दूसरे खर्च भी जुड़ जाते हैं तो बजट और बढ़ जाता है. ऐसे में सेकेंड हैंड कारें उन लोगों के लिए एक किफायती ऑप्शन बन सकती हैं, जो कम बजट में कार खरीदना चाहते हैं. अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो करीब 3 लाख रुपये से कम में सेकंड हैंड कारें आपको मिल सकती है.
दिल्ली में कहां सस्ती मिलेंगी गाड़ियां?
- दिल्ली का करोल बाग सेकेंड हैंड कारों के पुराने बाजारों में शामिल है. यहां छोटी हैचबैक से लेकर SUV और लग्जरी कारों तक कई तरह के ऑप्शन आपको मिल जाएंगे. एक ही इलाके में कई डीलर्स होने से ग्राहक अलग-अलग कारों की कीमत, मॉडल और कंडीशन की तुलना आसानी से कर सकते हैं. यही वजह है कि पुरानी कार खरीदने वाले कई लोग अपनी तलाश करोल बाग से शुरू करते हैं.
- मोती नगर भी दिल्ली में पुरानी कार खरीदने वालों के बीच एक जाना-पहचाना इलाका है. यहां खरीदारों को अलग-अलग कीमत और मॉडल के हिसाब से कई कारें देखने को मिल सकती हैं. इसके अलावा फाइनेंस का विकल्प भी दिया जाता है, जिससे सीमित बजट वाले ग्राहकों के लिए कार खरीदना थोड़ा आसान हो सकता है.
- वहीं दूसरी ओर पीतमपुरा और प्रीत विहार में भी पुरानी कारों की खरीद-बिक्री का कारोबार बड़े लेवल पर होता है. इन क्षेत्रों में अलग-अलग ब्रांड की कारें और कई तरह के मॉडल मिल सकते हैं. एक ही इलाके में कई ऑप्शन होने के चलते ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के मुताबिक कारों की कीमत और कंडीशन की तुलना करके बेहतर सौदा चुन सकते हैं.
कितनी सस्ती मिल रही सेकंड हैंड गाड़ियां?
- अगर किसी शख्स का बजट नई कार खरीदने के लिए कम है तो पुरानी कार उसके लिए बेहतर ऑप्शन हो सकती है. यहां 2.50 लाख रुपये से सेकेंड हैंड कार खरीदने का ऑप्शन मौजूद है. हालांकि, कार की कीमत उसके मॉडल, साल, कंडीशन, किलोमीटर और दूसरी चीजों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है.
- अगर कार खरीदते समय वारंटी की बात की जाती है तो खरीदार को कुछ ज्यादा भरोसा मिल सकता है. हालांकि, कार खरीदने से पहले यह जरूर समझ लेना चाहिए कि वारंटी में कौन-कौन से पार्ट्स और खराबियां शामिल हैं और उसकी शर्तें क्या हैं?
- सेकेंड हैंड कार का सबसे बड़ा फायदा इसकी कम कीमत होती है. जिन लोगों को रोजाना आने-जाने, परिवार के इस्तेमाल या छोटे-मोटे सफर के लिए कार चाहिए, उनके लिए पुरानी कार बजट के अंदर आ सकती है. नई कार के मुकाबले कम कीमत होने के चलते डाउन पेमेंट और लोन का बोझ भी कम हो सकता है.
- पुरानी कार खरीदते समय सिर्फ कम कीमत देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. कार की सर्विस हिस्ट्री, इंजन, गियरबॉक्स, टायर, ब्रेक, सस्पेंशन और एक्सीडेंट से जुड़े पुराने रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है. इसके अलावा RC, इंश्योरेंस और दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट भी अच्छी तरह चेक करने चाहिए. टेस्ट ड्राइव लेकर कार की रियल कंडीशन समझना भी फायदेमंद रहता है.
किन बातों का रखें ध्यान?
- सेकेंड हैंड कार खरीदते समय सिर्फ कीमत और लुक देखकर फैसला न करें. सबसे पहले कार के जरूरी डॉक्यूमेंट देखें. RC, इंश्योरेंस, PUC सर्टिफिकेट और सर्विस हिस्ट्री जरूर देखें. अगर कार पहले लोन पर थी तो लोन से जुड़े दस्तावेज भी चेक करें. इसके साथ ही RC में दर्ज इंजन नंबर और चेसिस नंबर को कार के नंबर से मिलाना जरूरी है. सर्विस हिस्ट्री से कार के मेंटेनेंस और उसकी सही देखभाल के बारे में जानकारी मिल सकती है.
- कार कितने किलोमीटर चली है, यह जानने के लिए ओडोमीटर रीडिंग जरूर चेक करें. सिर्फ मीटर पर भरोसा करने के बजाय इसे सर्विस रिकॉर्ड से मिलाना बेहतर है, क्योंकि कुछ मामलों में ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है. इसके अलावा यह भी पता करें कि कार पहले किसी बड़े हादसे में शामिल रही है या नहीं. अगर कार की कीमत बाजार के मुकाबले बहुत कम है, तो जल्दबाजी में सौदा न करें. अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर उसी मॉडल और वेरिएंट की कीमतों की तुलना करें और कार की पूरी जांच के बाद ही खरीदारी का फैसला लें.
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