Air India Pilot Marijuana Drug Case : प्लेन उड़ाने से पहले पायलट के कौन-से होते हैं टेस्ट, क्यों नहीं पता चला गांजा?
Air India Pilot Marijuana Drug Case : एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 में उड़ान के दौरान अचानक विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया. यह एयरबस A320 विमान था और इसमें कुल 145 लोग सवार थे.

Air India Pilot Marijuana Drug Case : 4 अगस्त को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 में हवा के बीच अचानक विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया. फुकेट से दिल्ली आ रहे एयरबस A320 में उस समय 145 लोग सवार थे, जिनमें 8 क्रू मेंबर शामिल थे. इस घटना में कई यात्री और क्रू मेंबर घायल हुए. मामले की जांच के दौरान पायलट-इन-कमांड के डोप टेस्ट को लेकर सामने आई जानकारी ने एविएशन सेफ्टी पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. रिपोर्टों के मुताबिक, पहले टेस्ट के नॉन-नेगेटिव आने के बाद कंफर्मेटरी टेस्ट कराया गया और उसमें पायलट के सैंपल में मारिजुआना यानी गांजा पाए जाने की पुष्टि हुई. ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि जब पायलटों के लिए शराब और साइकोएक्टिव पदार्थों को लेकर इतने सख्त नियम हैं और उड़ान से पहले होने वाली जांच में इसका पता क्यों नहीं चला. ऐसे में आइए जानते हैं कि प्लेन उड़ाने से पहले पायलट के कौन-से टेस्ट होते हैं और इसमें क्यों गांजा नहीं पता चला.
प्लेन उड़ाने से पहले पायलट के कौन-से होते हैं टेस्ट
पायलट और क्रू मेंबर के लिए ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट बेहद जरूरी है. इसमें मशीन में फूंक मारकर सांस में अल्कोहल की मात्रा जांची जाती है. नियम के मुताबिक रीडिंग 0.000 होनी चाहिए. उड़ान से पहले और उड़ान के बाद ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट किया जाता है. इसके अलावा पायलटों का डोप या साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट भी होता है. इसमें यूरिन या ब्लड सैंपल के जरिए गांजा, कोकीन, अफीम और एम्फेटामिन जैसे पदार्थों की जांच की जाती है, हालांकि यह टेस्ट हर फ्लाइट में नहीं होता है. नियमों के तहत हर साल कम से कम 10 प्रतिशत फ्लाइट क्रू और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों का रैंडम ड्रग टेस्ट किया जाता है. सुरक्षा से जुड़ी घटना होने या किसी व्यक्ति पर शक होने पर भी टेस्ट जरूरी हो सकता है.
फ्लाइट से पहले पायलट के होते हैं ये टेस्ट भी
1. ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट - पायलट की सांस में अल्कोहल की जांच की जाती है. रीडिंग 0.000 होनी चाहिए.
2. डोप-ड्रग टेस्ट - पायलट के यूरिन या ब्लड सैंपल की जांच कर गांजा, कोकीन, अफीम और एम्फेटामिन जैसे साइकोएक्टिव पदार्थों का पता लगाया जाता है.
3. मेडिकल फिटनेस टेस्ट - पायलट की आंखों की रोशनी, सुनने की क्षमता, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक फिटनेस की जांच तय मेडिकल नियमों के अनुसार की जाती है.
4. पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट - उड़ान के बाद भी पायलट और क्रू का ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट किया जा सकता है, जिससे ड्यूटी के दौरान शराब के सेवन की जांच हो सके.
5. कंफर्मेटरी ड्रग टेस्ट - अगर शुरुआती ड्रग टेस्ट में रिपोर्ट नॉन-नेगेटिव आती है, तो दूसरे सैंपल की विस्तृत जांच की जाती है. पॉजिटिव आने पर मेडिकल रिव्यू ऑफिसर यह भी देखता है कि इसकी वजह किसी डॉक्टर की बताई दवा तो नहीं है.
6. फिटनेस और थकान की जांच - पायलट को पर्याप्त आराम और नींद मिलना भी जरूरी है. DGCA के FDTL नियम पायलटों की ड्यूटी और आराम के समय को कंट्रोल करते हैं.
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इसमें क्यों गांजा नहीं पता चला?
ड्रग टेस्ट की प्रक्रिया में सैंपल को दो अलग-अलग कंटेनरों में रखा जाता है. पहले सैंपल की जांच होती है. अगर रिपोर्ट नॉन-नेगेटिव आती है, तो संबंधित पायलट को ड्यूटी से हटा दिया जाता है और दूसरे सैंपल का कंफर्मेटरी टेस्ट कराया जाता है. एयर इंडिया की फ्लाइट के मामले में भी पहले टेस्ट के नॉन-नेगेटिव आने के बाद दूसरा टेस्ट कराया गया. रिपोर्टों के अनुसार, कंफर्मेटरी जांच में मारिजुआना की पुष्टि हुई. इसके बाद मेडिकल रिव्यू ऑफिसर यह भी जांचता है कि पॉजिटिव रिपोर्ट किसी डॉक्टर की दी गई दवा की वजह से तो नहीं आई.
टेस्ट से इनकार करने पर भी सख्त नियम
अगर कोई पायलट या संबंधित कर्मचारी ड्रग टेस्ट कराने से इनकार करता है, तो DGCA इसे गंभीरता से लेता है. पहली बार इनकार करने पर कर्मचारी को ड्यूटी से हटाया जाता है और 48 घंटे के भीतर टेस्ट कराना होता है. नियमों का दोबारा उल्लंघन होने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है.
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