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India Bloc Rally: रामलीला मैदान में किस मुगल बादशाह ने कराई थी रामलीला, कब हुआ था पहला प्रदर्शन?

India Bloc Rally: दिल्ली के रामलीला मैदान में हाल ही में इंडिया गठबंधन की एक बड़ी रैली हुई. आइए जानते हैं कि क्या है इस रामलीला मैदान का इतिहास. जानें यहां सबसे पहले रामलीला किसने करवाई थी.

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  • बहादुर शाह जफर ने 1835 में पहली रामलीला करवाई थी।
  • शाहजी का तालाब भरकर बना आज का रामलीला मैदान।
  • 1975 में जेपी की ऐतिहासिक रैली ने आपातकाल को जन्म दिया।

India Bloc Rally: दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की एक रैली को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ चुकी है कि क्या यह आंदोलन सफल था या फिर फ्लॉप. कांग्रेस ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जनता का धन्यवाद किया है और भाजपा ने वहां खाली पड़ी कुर्सियों की तरफ इशारा किया. 

इन अलग-अलग दावों के बीच लोगों का ध्यान इस मैदान के लंबे इतिहास की तरफ भी गया है. कई लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर रामलीला मैदान में किस मुगल बादशाह ने रामलीला करवाई थी और इस मैदान में पहला प्रदर्शन कब हुआ था? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब.

बहादुर शाह जफर और पहली रामलीला 

दिल्ली में पहली आधिकारिक रामलीला की शुरुआत 1835 के आस-पास बहादुर शाह जफर के शासनकाल में हुई थी. मुगल सेना में काम कर रहे हिंदू सैनिकों ने लाल किले के पीछे यमुना नदी के रेतीले किनारे पर रामलीला मंचन की शुरुआत की थी. बहादुर शाह जफर खुद किले में बनी एक बालकनी या फिर कोठरी से वहां से इस मंचन को देखा करते थे.

यह मंचन दिल्ली की बहुभाषी संस्कृति को दर्शाता था. उस दौर में रोजमर्रा की बातचीत और दरबार में उर्दू और फारसी भाषाओं का आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता था. इस वजह से रामलीला के मूल संवादों को उर्दू और फारसी की शायरी और छंदों के रूप में तैयार किया गया था. इससे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के दर्शकों को इन मंचनों को समझने में आसानी हुई.


India Bloc Rally: रामलीला मैदान में किस मुगल बादशाह ने कराई थी रामलीला, कब हुआ था पहला प्रदर्शन?

शाहजी का तालाब से रामलीला मैदान तक 

आज का रामलीला मैदान इन शुरुआती मंचन की मूल जगह नहीं था. 1930 के दशक से पहले पुरानी दिल्ली में तुर्कमान गेट और अजमेरी गेट के बीच की जगह पर मुगलकालीन का एक बड़ा जलाशय हुआ करता था. इसे शाहजी का तालाब कहा जाता था. इस जलाशय के साथ एक काफी सुंदर बगीचा भी था. 

1930 के दशक की शुरुआत में अंग्रेजों ने इस तालाब को मिट्टी से भर दिया और उस जगह को समतल कर दिया. ऐसा इसलिए किया ताकि पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली के बीच की दूरी को कम किया जा सके. जब यह जलाशय भर गया तो वह खुली जगह आम जनता के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो गई. जब रामलीला के आयोजन यमुना नदी के किनारे से हटाए गए तो उन्हें इस नए बनाए गए मैदान में भेज दिया गया. 

दिल्ली की श्री रामलीला कमेटी ने यहां रामलीला का मंचन शुरू किया. बाद में यह जगह रामलीला मैदान के नाम से जानी जाने लगी. 


India Bloc Rally: रामलीला मैदान में किस मुगल बादशाह ने कराई थी रामलीला, कब हुआ था पहला प्रदर्शन?

25 जून 1975 को जेपी की ऐतिहासिक रैली 

आगे चलकर रामलीला मैदान राजनीतिक लामबंदी का एक जरूरी केंद्र बन गया. यहां हुई सबसे अहम सभाओं में से एक 25 जून 1975 को हुई थी जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया था. विपक्षी दल एकजुट हुए और उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में एक बड़ी रैली निकाली. इस मैदान में लाखों लोग इकट्ठा हुए थे. 

जेपी ने इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ संपूर्ण क्रांति छेड़ दी. उन्होंने सेना, पुलिस और सरकारी कर्मचारियों से यह अपील की कि वह किसी भी असंवैधानिक या फिर गैर कानूनी आदेश को मानने से इनकार कर दें. अपने भाषण के दौरान उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता की एक मशहूर पंक्ति सुनाई कि "सिंहासन खाली करो कि जनता आती है."

यह भी पढ़ें: क्या आम आदमी भी बुक कर सकता है रामलीला ग्राउंड, इसके लिए कितना खर्चा?

रैली और आपातकाल का लागू होना 

यह रैली इस जगह के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हुई. 25 जून 1975 की आधी रात को इंदिरा गांधी सरकार ने पूरे देश में आपातकाल लागू कर दिया. तड़के ही जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित विपक्ष के कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया.

यह भी पढ़ें: भारत के 5 सबसे बड़े जन आंदोलन कौन से, क्या रहा था उनका रिजल्ट

स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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