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सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक आम आदमी भरता है इतने टैक्स, गिनते-गिनते जाएंगे थक

Independence day 2025: लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने टैक्स रिफॉर्म पर बड़ी बात कही है. चलिए जानें कि एक आम आदमी सुबह जागने से लेकर रात में सोने तक आखिर कितने टैक्स देता है.

Independence day 2025: 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर समेत कई मसलों पर बात की है. पीएम ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम संदेश संबोधित करते हुए देश की प्रगति और सुधारों पर जोर दिया है. उन्होंने आयकर कानूनों में बड़े बदलाव का जिक्र किया, जिसमें 280 से ज्यादा धाराओं को खत्म करते हुए इनकम को टैक्स फ्री करने पर जोर दिया गया है. पीएम ने यह भी कहा है कि आयकर के कानूनों में बड़े सुधार किए गए हैं. इसे उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम कदम बताया है. 

पीएम ने टैक्स रिफॉर्म पर क्या कहा

पीएम ने आज (शुक्रवार) को कहा है कि दिवाली तक वस्तु एवं सेवा कर यानि जीएसटी में अगली पीढ़ी के लिए सुधार किए जाएंगे. इससे आम आदमी को टैक्स के लिए बहुत राहत मिलेगी, जिससे कि छोटे और मीडियम व्यापारियों को लाभ होगा. इससे दैनिक उपयोग की चीजें सस्ती हो जाएंगी और अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा. इसी क्रम में चलिए जानें कि एक आम आदमी सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक कितना टैक्स देता है.

आम आदमी कितने टैक्स देता है

भारत में आमतौर पर दो तरह के टैक्स होते हैं, एक डायरेक्ट टैक्स जो सरकारें सीधे आपसे लेती हैं और दूसरा होता है इनडायरेक्ट टैक्स जो कि अप्रत्यक्ष तौर पर आप सरकारों को देते हैं. ऐसे करीब-करीब 25 टैक्स आप सुबह उठने से लेकर रात को सोने के बीच में सरकार की जेब में भरते हैं. डायरेक्ट टैक्स में इनकम टैक्स, शेयर या फिर प्रॉपर्टी की इनकम पर लगने वाला टैक्स विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स और कॉर्पोरेट टैक्स शामिल है. इनडायरेक्ट टैक्स जैसे कि एक्साइज टैक्स, कस्टम टैक्स और जीएसटी जो कि सीधे तौर पर नहीं लिए जाते हैं. लेकिन व्यक्ति किसी सेवा या फिर खरीदारी पर इनडायरेक्टली टैक्स का भुगतान करता है. 

टैक्स भरने के मामले में दूसरे देशों के मुकाबले भारत कहां?

खबरों की मानें तो देश में 100 में सात मतदाता ऐसे हैं, जो कि टैक्स भरते हैं. भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है. आईएमएफ के आंकड़ों की मानें तो इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के आंकड़ों की मानें तो भारत जल्दी ही जर्मनी को पीछे छोड़कर अर्थव्यवस्था के आकार में दुनिया में तीसरे नंबर पर आ जाएगा. टैक्स इसलिए लगाया जाता है, क्योंकि जिनके पास पैसा नहीं है, उनको टैक्स पेयर से सरकार मदद कर सके.  

यह भी पढ़ें: ये था प्रधानमंत्री मोदी का सबसे छोटा भाषण, सिर्फ 56 मिनट में खत्म कर दी थी अपनी बात

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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