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सिर्फ हुमायूं नहीं इन लोगों की कब्रें भी हैं इस मकबरे में, फिर इसे क्यों कहते हैं हुमायूं टॉम्ब?

हाल ही में 15 अगस्त 2025 की सुबह, जब देश स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मना रहा था, तभी इसी मकबरे के परिसर में एक दुखद हादसा हो गया. मकबरे के पास बनी पत्ते शाह दरगाह के दो कमरों की छत गिर गई.

दिल्ली में मौजूद हुमायूं का मकबरा भारत की सबसे खास ऐतिहासिक इमारतों में से एक है. इसे देखकर हर कोई इसकी खूबसूरती और भव्यता का दीवाना हो जाता है. हाल ही में 15 अगस्त 2025 की सुबह, जब देश स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मना रहा था, तभी इसी मकबरे के परिसर में एक दुखद हादसा हो गया. मकबरे के पास बनी पत्ते शाह दरगाह के दो कमरों की छत गिर गई, जिससे 5 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए. हालांकि हुमायूं का मुख्य मकबरा पूरी तरह सुरक्षित है. इसी बीच इस मकबरे को लेकर हर तरफ चर्चाएं तेज हो गई हैं. लोग कई तरह के सवाल कर कर रहें. ऐसे में एक सवाल अक्सर मन में आता है कि अगर इसमें सिर्फ हुमायूं ही नहीं, बल्कि कई और भी कब्रें हैं, तो फिर इसे सिर्फ हुमायूं का मकबरा क्यों कहा जाता है. तो आइए जानते हैं कि इस मकबरे में सिर्फ हुमायूं नहीं किन लोगों की कब्रें भी हैं और इसे हुमायूं टॉम्ब क्यों कहते हैं.

इस मकबरे में सिर्फ हुमायूं नहीं इन लोगों की कब्रें भी हैं?
दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित हुमायूं का मकबरा साल 1569-70 में बनकर तैयार हुआ था. यह भारत का पहला गार्डन टॉम्ब यानी बगीचे के बीच बना मकबरा है. इसे हुमायूं की पत्नी बेगा बेगम (हाजी बेगम) ने अपने पति की याद में बनवाया था. इस मकबरे को मीराक मिर्जा गियास, एक फारसी वास्तुकार ने डिजाइन किया था. यह इमारत मुगल वास्तुकला का पहला बड़ा उदाहरण मानी जाती है, जिसे देखकर ही बाद में ताजमहल जैसी इमारतों की प्रेरणा ली गई. हालांकि इसका नाम हुमायूं का मकबरा है, लेकिन इसके अंदर सिर्फ हुमायूं की कब्र नहीं है.यहां पर मुगल परिवार के लगभग 150 से ज्यादा सदस्यों की कब्रें मौजूद हैं. इनमें हुमायूं की पत्नियां,उनके बेटे, वंशज और मुगल शाही परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं. इसलिए इसे मुगल वंश का कब्रिस्तान भी कहा जाता है. 

इसे हुमायूं टॉम्ब क्यों कहते हैं?
यह मकबरा सबसे पहले मुगल सम्राट हुमायूं की याद में बनवाया गया था. वह दूसरे मुगल शासक थे, और उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने एक शानदार इमारत बनवाकर उन्हें सम्मान दिया था. यह इमारत उस समय किसी भी भारतीय सम्राट के लिए बनी सबसे पहली ऐसी इमारत थी, जो इस पैमाने पर बनाई गई हो. मकबरे की पूरी योजना, डिजाइन और भव्यता सिर्फ हुमायूं के सम्मान में बनाई गई थी. बाद में, जब मुगल शाही परिवार के अन्य सदस्यों की मृत्यु हुई, तो उन्हें भी इसी परिसर में दफनाया गया. इसलिए, इसका मूल उद्देश्य और पहली कब्र हुमायूं की होने के कारण इसे हुमायूं टॉम्ब कहते हैं. 

यह भी पढ़े : इस महिला ने बनवाया था हुमायूं का मकबरा, जानिए कितना आया था खर्च

 

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