ChatGPT या Meta AI से बम बनाने का तरीका पूछा तो हो सकती है जेल, जान लें कानून
डिजिटल दुनिया की हर गतिविधि पर कानून की नजर होती है, जहां अनजाने में की गई एक छोटी सी गलती भी देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानी जा सकती है. आइए जानें कि AI से कौन सा सवाल पूछना भारी पड़ सकता है.

- सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार कड़ी नजर रखती हैं.
आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई हमारे जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा बन चुका है. लोग अपनी हर छोटी-बड़ी उलझन को सुलझाने के लिए चैटजीपीटी या मेटा एआई जैसे आधुनिक टूल्स की मदद ले रहे हैं. इंटरनेट की इस जादुई दुनिया में जहां हर सवाल का जवाब चंद सेकेंड्स में मिल जाता है, वहीं कुछ चीजें ऐसी भी हैं जिन्हें खोजना आपको बहुत भारी पड़ सकता है. अगर आप एआई से बम या हथियार बनाने का तरीका पूछते हैं, तो यह केवल एक साधारण सर्च नहीं रह जाता बल्कि आपको जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है. भारत का कानून इस तरह की संदिग्ध हरकतों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाता है, चलिए जानें.
एआई का सुरक्षा कवच
जब आप चैटजीपीटी, मेटा एआई या गूगल जैसे बड़े एआई प्लेटफॉर्म पर जाकर देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले सवाल पूछते हैं, तो इनके सुरक्षा फिल्टर तुरंत सक्रिय हो जाते हैं. ये आधुनिक टूल्स हिंसा फैलाने, हथियार बनाने या किसी भी अवैध गतिविधि से जुड़ी जानकारी देने से साफ तौर पर इनकार कर देते हैं. एआई कंपनियां इस तरह के संवेदनशील मामलों पर बहुत सख्ती बरतती हैं. अगर कोई यूजर बार-बार इस तरह की प्रतिबंधित चीजें जानने की कोशिश करता है, तो कंपनी उसका एआई अकाउंट हमेशा के लिए ब्लॉक कर देती है.
कितनी सख्त हैं कानूनी धाराएं?
भारत में इंटरनेट के जरिए देश की शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ बेहद कड़े कानूनी प्रावधान मौजूद हैं. अगर कोई व्यक्ति आतंकी इरादे से एआई पर बम बनाने की विधि खोजता है, तो उस पर यूएपीए यानी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. इस बेहद सख्त कानून के तहत आरोपी को आसानी से जमानत नहीं मिलती और जुर्म साबित होने पर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. इसके अलावा नए कानून भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया जाता है.
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एजेंसियों का कड़ा पहरा
देश की सुरक्षा के लिए काम करने वाली तमाम बड़ी एजेंसियां जैसे एनआईए और राज्यों की साइबर सेल इंटरनेट की दुनिया पर हर पल अपनी पैनी नजर रखती हैं. जब भी कोई यूजर डिजिटल स्पेस में बम बनाने या अवैध हथियार खरीदने जैसे संदिग्ध कीवर्ड्स टाइप करता है, तो सुरक्षा तंत्र तुरंत अलर्ट हो जाता है. भले ही एआई टूल आपको उस सवाल का जवाब न दे, लेकिन आपका आईपी एड्रेस और सर्च हिस्ट्री सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ जाती है. गड़बड़ी का अंदेशा होने पर एजेंसियां तुरंत पूछताछ या गिरफ्तारी कर सकती हैं.
उत्सुकता भी पड़ सकती है भारी
कई बार लोग केवल अपनी उत्सुकता को शांत करने या मनोरंजन के लिए एआई से ऐसे अजीबोगरीब सवाल पूछ लेते हैं. कानून की नजर में आपके काम के पीछे छिपा इरादा सबसे ज्यादा मायने रखता है. अगर कोई छात्र या रिसर्चर गलती से ऐसा कुछ सर्च करता है, तो उसे कानूनी जांच के दौरान अपनी बेगुनाही का पक्का सबूत देना होगा. इरादा गलत न होने के बाद भी ऐसी संवेदनशील चीजों को इंटरनेट पर टटोलने की वजह से आपको पुलिस की कड़ी पूछताछ और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ सकते हैं.
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