ये हैं दुनिया के सबसे खतरनाक पेशे, जहां रोज जान हथेली पर रखकर पैसा कमाते हैं लोग
दुनिया में कुछ पेशे ऐसे हैं जहां दफ्तर की आरामदायक कुर्सी नहीं, बल्कि हर कदम पर मौत का साया मौजूद रहता है. यहां लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आजीविका कमाते हैं. ऐसे में एक चूक भी जानलेवा हो सकती है.

- ऑयल रिग्स पर काम करने वाले भयंकर तूफानों का सामना करते हैं.
दुनिया में पैसे कमाने के अनगिनत रास्ते हैं. कोई सुरक्षित केबिन में बैठकर कंप्यूटर पर काम करता है, तो कोई व्यापार और मजदूरी के जरिए अपनी रोजी-रोटी का इंतजाम करता है. लेकिन समाज का एक हिस्सा ऐसा भी है, जिसके लिए काम पर जाने का मतलब हर दिन साक्षात मौत से मुकाबला करना होता है. पेट पालने और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने के लिए ये लोग रोज अपनी जान हथेली पर रखकर घर से निकलते हैं. आज हम दुनिया के ऐसे ही 5 सबसे खतरनाक और रूह कंपा देने वाले पेशों के बारे में बात करेंगे, जहां जोखिम की कोई सीमा नहीं है.
समंदर के बीच सबसे अकेला और जानलेवा सफर
लाइटहाउस कीपर की नौकरी को दुनिया के सबसे एकांत और जोखिम भरे कामों में गिना जाता है. इस पेशे से जुड़े लोग समंदर के बीचों-बीच बने संकरे और ऊंचे लाइटहाउस में महीनों तक बिल्कुल अकेले वक्त बिताते हैं. इनका मुख्य काम अंधेरी रातों में लहरों के बीच से गुजरने वाले विशाल जहाजों को रास्ता दिखाने के लिए रोशनी की व्यवस्था को चालू रखना होता है. भयंकर समुद्री तूफान, ऊंची उठती लहरें और बाहरी दुनिया से पूरी तरह संपर्क कट जाने के बाद भी इन्हें अपनी जगह पर डटे रहना पड़ता है, जहां कोई आपातकालीन मदद तुरंत नहीं पहुंच सकती है.
कबाड़ में तब्दील होते जहाजों के बीच मौत का खेल
पुराने और विशालकाय समुद्री जहाजों को काटकर उन्हें लोहे के कबाड़ में बदलना बेहद खतरनाक माना जाता है. भारत के गुजरात में स्थित अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड को दुनिया का सबसे बड़ा जहाज तोड़ने वाला केंद्र माना जाता है. यहां काम करने वाले मजदूर बेहद विषम परिस्थितियों में गैस कटर के जरिए भारी-भरकम जहाजों के हिस्सों को अलग करते हैं. इन पुराने जहाजों के भीतर कई तरह के जहरीले केमिकल, बचा हुआ कच्चा तेल और हानिकारक गैसें मौजूद रहती हैं. गैस कटर की एक छोटी सी चिंगारी से यहां बड़े धमाके होते हैं, या भारी लोहा गिरने से मजदूरों की जान चली जाती है.
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यूरेनियम खदानों में छिपा हुआ धीमा जहर
यूरेनियम एक ऐसा दुर्लभ और शक्तिशाली खनिज है, जिसका उपयोग न्यूक्लियर पावर और परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जाता है. लेकिन इसे जमीन की गहराइयों से निकालने वाले यूरेनियम माइनर्स हर सेकंड अपनी जिंदगी को दांव पर लगाते हैं. इन अंधेरी खदानों में काम करने के दौरान मजदूरों को लगातार खतरनाक रेडिएशन (अदृश्य विकिरण) का सामना करना पड़ता है. यदि सुरक्षा उपकरणों या कपड़ों में थोड़ी सी भी लापरवाही हो जाए, तो इस रेडिएशन के सीधे संपर्क में आने से फेफड़ों की गंभीर बीमारियां और कैंसर जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याएं बहुत कम उम्र में ही घेर लेती हैं.
गहरे समंदर के अंधेरे में जिंदगी की तलाश
डीप सी डाइवर्स यानी समुद्री गोताखोरों का काम किसी हॉलीवुड फिल्म के खतरनाक मिशन जैसा दिखाई देता है, लेकिन असलियत में यह बेहद डरावना है. ये पेशेवर गोताखोर समुद्र की सतह से हजारों फीट नीचे जाकर विशाल तेल पाइपलाइनों की मरम्मत करते हैं, डूबे जहाजों की जांच करते हैं या पानी के अंदर चलने वाले निर्माण कार्यों को अंजाम देते हैं. गहरे पानी के भीतर का डरावना अंधेरा, पानी का अत्यधिक शारीरिक दबाव और ऑक्सीजन सिलेंडर की सीमित सप्लाई हर सेकंड उनकी परीक्षा लेती है. पानी के नीचे जरा सी यांत्रिक गड़बड़ी का मतलब सीधे तौर पर मौत होता है.
भयंकर तूफानों के बीच ऑयल रिग्स की चुनौती
अगाध समंदर के बीचो-बीच खड़े विशालकाय लोहे के मंच यानी ऑयल रिग्स पर काम करना किसी चुनौती से कम नहीं है. यहां काम करने वाले कर्मचारी कई-कई हफ्तों तक अपने परिवार से दूर समुद्र के हिचकोलों के बीच बंद रहते हैं. खुले समुद्र में आने वाले भीषण चक्रवाती तूफान, अचानक होने वाला गैस रिसाव और मशीनी दुर्घटनाएं यहां की रोजमर्रा की हकीकत हैं. इस काम के खतरे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2010 में हुए मशहूर 'डीपवॉटर होराइजन ऑयल स्पिल' हादसे में पूरे 11 मजदूरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था.
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Source: IOCL


























