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NEET Paper Security: दुनिया के किन देशों में सेना कराती है बड़े एग्जाम, कैसे होती है क्वेश्चन पेपर की सुरक्षा?

NEET Paper Security: भारत सरकार अब पेपर लीक और परीक्षा की सुरक्षा की वजह से भारतीय वायु सेना की मदद लेने‌ पर विचार कर रही है. आइए जानते हैं कि कौन से देश पहले से सेना की मदद लेते आ रहे हैं.

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  • परीक्षा सुरक्षा हेतु भारत वायु सेना की मदद लेने पर विचार हो रहा है।
  • चीन में Gaokao परीक्षा में बख्तरबंद वाहनों से पेपर ले जाया जाता है।
  • अल्जीरिया में परीक्षा के दौरान इंटरनेट बंद कर दिया जाता है।
  • भारत में रक्षा परीक्षाओं में सैन्य शैली की सुरक्षा पहले से है।

NEET Paper Security: पेपर लीक और परीक्षा की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत सरकार कथित तौर पर भारतीय वायु सेना से मदद लेने पर विचार कर रही है. ऐसा इसलिए ताकि इस बात को पक्का किया जा सके कि आने वाली नीट यूजी परीक्षा पूरी तरह से सुरक्षित तरीके से आयोजित हो. यह विचार भले ही अजीब लगे लेकिन भारत पहला ऐसा देश नहीं है जो बड़ी परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सैन्य शैली की प्रणाली का इस्तेमाल करने जा रहा है. आइए जानते हैं दुनिया भर के उन देशों के बारे में जो पहले से ही नकल और पेपर लीक को रोकने के लिए सशस्त्र बल, पुलिस इकाई, निगरानी तकनीक और सख्त लॉकडाउन प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं.

चीन की परीक्षा 

चीन दुनिया की सबसे कठिन विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं में से एक आयोजित करता है. इसे Gaokao के नाम से जाना जाता है. क्योंकि हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं इस वजह से चीनी सरकार इसकी सुरक्षा को काफी गंभीरता से लेती है.  क्वेश्चन पेपर को पीपल्स आर्म्ड पुलिस द्वारा संचालित बख्तरबंद वाहनों का इस्तेमाल करके ले जाया जाता है. पेपर के कंटेनर पर जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाते हैं ताकि केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से आवाजाही की लाइव निगरानी की जा सके. चीन परीक्षा केंद्र के आसपास नकल-रोधी ड्रोन और सैन्य-ग्रेड सिग्नल जैमर भी तैनात करता है. 

अल्जीरिया की सिक्योरिटी 

परीक्षा के पेपर लीक होने की बार-बार होने वाली घटनाओं के बाद अल्जीरिया ने दुनिया की सबसे सख्त नकल रोधी रणनीतियों में से एक को अपनाया है. National Baccalaureate Exam  के दौरान सरकार ने बार-बार पूरे देश में अस्थायी रूप से इंटरनेट बंद किया है. परीक्षा के समय हर दिन कई घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवा बंद कर दी जाती हैं. प्रिंटिंग प्रेस और पेपर भंडारण सुविधा की सुरक्षा लगातार सैन्य कर्मी और पुलिस बलों द्वारा की जाती हैं. 

सीरिया और इराक की परीक्षा सिक्योरिटी 

सीरिया और इराक जैसे देश भी परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा के लिए खास तौर से आंतरिक अस्थिरता और सुरक्षा खतरों की वजह से सैन्य भागीदारी पर काफी ज्यादा निर्भर है. व्यवस्था को बनाए रखने और नकल करने वाले गिरोह को सक्रिय होने से रोकने के लिए परीक्षा केंद्र के बाहर सशस्त्र सैनिक और चौकियां तैनात की जाती हैं. 

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भारत में सिक्योरिटी 

भारत में NDA, CDS और AFCAT जैसी रक्षा संबंधी परीक्षाओं के लिए सैन्य शैली की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही काफी ज्यादा आम हैं. इन परीक्षाओं के क्वेश्चन पेपर को सशस्त्र बल और पुलिस  एजेंसी की भागीदारी वाले सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ले जाया और सुरक्षित रखा जाता है. 

कैसे रखे जाते हैं क्वेश्चन पेपर सुरक्षित? 

ज्यादातर देश परीक्षा पत्रों को लीक और छेड़छाड़ से बचाने के लिए एक शानदार सुरक्षा प्रणाली का पालन करते हैं. काफी ज्यादा सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस में कर्मचारियों को अक्सर बाहरी दुनिया से तब तक अलग रखा जाता है जब तक कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती. छपाई में शामिल कर्मचारियों को बाहरी लोगों से स्वतंत्र रूप से बातचीत करने या फिर परिसर छोड़ने की अनुमति नहीं हो सकती. इसी के साथ छपाई के दौरान निकलने वाले कागज के टुकड़ों और बेकार सामग्री को भी जानकारी लीक होने से बचाने के लिए निगरानी में नष्ट कर दिया जाता है.

क्वेश्चन पेपर को आमतौर पर सील बंद कंटेनर में पैक किया जाता है. इन्हें कई तालों से सुरक्षित किया जाता है. पारंपरिक डबल लॉक प्रणाली के तहत दो अलग-अलग अधिकारियों के पास अलग-अलग चाबियां होती हैं. क्वेश्चन पेपर तक पहुंच सिर्फ तभी संभव हो पाती है जब दोनों व्यक्ति एक साथ उपस्थित हों. परिवहन के दौरान सुरक्षा को पक्का करने के लिए पुलिस एस्कॉर्ट वाहन अक्सर परिवहन काफिले के साथ चलते हैं. इसी के साथ परीक्षा केंद्र पर क्वेश्चन पेपर वाले सील बंद लिफाफे को परीक्षा शुरू होने से कुछ ही मिनट पहले खोला जाता है.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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