Rahul Gandhi Security: राहुल गांधी की सुरक्षा पर हर दिन कितना पैसा खर्च होता है, देख लीजिए हिसाब-किताब?
Rahul Gandhi Security: राहुल गांधी को सीआरपीएफ की जेड-प्लस और एएसएल सुरक्षा मिली हुई है, जिस पर लगभग लाखों रुपये रोज खर्च होते हैं. इस सुरक्षा व्यवस्था का पूरा खर्च सरकारी नियमों के तहत होता है.

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दिनों चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर काफी हमलावर नजर आ रहे हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त पर राजनीतिक निशाना साधने के साथ ही वे देश के कई अहम मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं. हालांकि राजनीतिक बयानों के बीच अक्सर आम लोगों का ध्यान देश के इन बड़े नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी जाता है. राहुल गांधी जैसे हाई-प्रोफाइल नेता की सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त होती है, जिस पर हर दिन भारी-भरकम राशि खर्च होती है. आइए समझते हैं कि उनकी सुरक्षा का पूरा हिसाब-किताब क्या है और इसका ढांचा कैसे काम करता है.
राहुल गांधी का सुरक्षा घेरा और उसका खर्चा
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को देश की सर्वोच्च जेड-प्लस श्रेणी के साथ एडवांस सिक्योरिटी लाइजन यानी एएसएल का सुरक्षा कवच मिला हुआ है. मीडिया रिपोर्टों और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुमान के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था को चालू रखने में हर दिन करीब 1.5 लाख रुपये तक का खर्चा आता है. अगर महीने के हिसाब से देखें, तो यह रकम लगभग 50 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है. हालांकि सरकार की तरफ से किसी एक व्यक्ति की दैनिक या सालाना सुरक्षा पर होने वाले सटीक खर्च का कोई आधिकारिक और सार्वजनिक ब्योरा जारी नहीं किया जाता, क्योंकि यह अति-संवेदनशील मामला है.
कौन से जवान संभालते हैं सुरक्षा की कमान?
राहुल गांधी की चौबीसों घंटे सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ के हाथों में होती है. इस विशेष जेड-प्लस घेरे में लगभग 55 उच्च प्रशिक्षित जवान और ब्लैक कैट स्टाइल के कमांडो हमेशा तैनात रहते हैं. इनके पास बेहद आधुनिक हथियार और हाई-टेक संचार उपकरण होते हैं. राहुल गांधी के काफिले के साथ तीन अलग-अलग पाली यानी शिफ्टों में जवान तैनात किए जाते हैं, ताकि हर समय चुस्त-दुरुस्त सुरक्षाकर्मी अलर्ट मोड पर रहें. इसके अलावा उन्हें बुलेट-प्रूफ कार और आगे-पीछे चलने वाली एस्कॉर्ट गाड़ियों का पूरा काफिला प्रदान किया जाता है.
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क्या होता है एडवांस सिक्योरिटी लाइजन सिस्टम?
जेड-प्लस सुरक्षा के साथ मिलने वाली एएसएल यानी एडवांस सिक्योरिटी लाइजन सुविधा काफी खास और एडवांस मानी जाती है. इसके तहत राहुल गांधी जब भी देश में कहीं जाने का प्लान बनाते हैं, तो उनके वहां पहुंचने से पहले ही सुरक्षा एजेंसियां एक्टिव हो जाती हैं. एएसएल टीम सबसे पहले उस शहर, सभा स्थल और आने-जाने वाले रास्तों का पूरा निरीक्षण करती है. स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर पूरे रूट की गहन जांच की जाती है, सैनिटाइजेशन होता है और सुरक्षा संबंधी कोई भी कमी दिखने पर उसे मौके पर ही ठीक किया जाता है.
जेड-प्लस सुरक्षा में कितना खर्चा?
भारत में जेड-प्लस सुरक्षा व्यवस्था पर सामान्य तौर पर हर महीने 30 लाख से 45 लाख रुपये तक का खर्च बैठता है. इस बजट में मुख्य रूप से जवानों की सैलरी, उनकी स्पेशल ट्रेनिंग, आधुनिक हथियारों का रखरखाव, सैटेलाइट कम्यूनिकेशन डिवाइस और काफिले की दर्जनों गाड़ियों का पेट्रोल-डीजल शामिल होता है. जेड-प्लस घेरे में केंद्र के कम से कम 10 से अधिक स्पेशल एनएसजी या सीआरपीएफ कमांडो सीधे आंतरिक घेरे में रहते हैं, जबकि बाहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित राज्य की पुलिस फोर्स और स्थानीय इंटेलिजेंस टीम पर होती है.

कैसे तय किया जाता है सुरक्षा का स्तर?
किसी भी नेता या नागरिक को यह वीआईपी सुरक्षा अचानक नहीं मिल जाती, बल्कि यह पूरी तरह खतरे के आकलन पर तय होती है. इसके लिए खुफिया ब्यूरो यानी आईबी और अलग-अलग राज्यों की सीआईडी टीम अपनी गोपनीय रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजती हैं. अगर खुफिया रिपोर्ट में यह पुष्टि हो जाए कि संबंधित व्यक्ति की जान को किसी आतंकी संगठन, उग्रवादियों या आपराधिक गिरोहों से गंभीर खतरा है, तभी सुरक्षा का स्तर तय होता है. गृह मंत्रालय की कमेटी समय-समय पर इस खतरे की दोबारा समीक्षा करती है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा घटा या बढ़ा सकती है.
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