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भारत में कहां बनता है सबसे ऊंचा रावण, कितनी आती है इसकी लागत?

दशहरे पर रावण के पुतले तो कई जगह जलाए जाते हैं, लेकिन कुछ पुतले अपनी ऊंचाई और लागत के कारण चर्चा में रहते हैं. जानिए कहां तैयार हुआ 221 फुट का विशाल रावण और इसे बनाने में कितना खर्च आया.

दशहरा आते ही देशभर में रावण दहन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. कहीं छोटे तो कहीं कई मंजिलों जितने ऊंचे रावण के पुतले बनाए जाते हैं. इन पुतलों को तैयार करने में कारीगर महीनों मेहनत करते हैं और लाखों रुपये खर्च होते हैं. इस साल  भी दिल्ली के रावण की ऊंचाई से लेकर इसे बनाने में इस्तेमाल हुए सामान और लागत तक, हर चीज लोगों का ध्यान खींच रही है. भारत के सबसे ऊंचे रावण का रिकॉर्ड किसके नाम है, इस कड़ी में पिछले साल का रिकॉर्ड भी चर्चा में है 

इस बार का रिकॉर्ड दिल्ली के नाम 

अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में दशहरा मेले के लिए 221 फुट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है. इसकी ऊंचाई इसे इस साल के बड़े आकर्षणों में शामिल करती है. पुतले को बनाने में एक हजार से ज्यादा बांस और बड़ी मात्रा में लोहे का इस्तेमाल होने की बात सामने आई है. इसे तैयार करने में तीन महीने से ज्यादा का समय लगा.  

कितनी आई इसे बनाने की लागत ?

दिल्ली के द्वारका में बने इस रावण के पुतले की लागत करीब 38 से 45 लाख रुपये बताई जा रही है .  इतनी बड़ी संरचना बनाने में कच्चे माल, कारीगरों की मेहनत, ढांचे को खड़ा करने और दूसरी व्यवस्थाओं पर खर्च हुई है यह लगात. इसे हरियाण के बराड़ा कारीगरों द्वारा बनाया गया है 

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राजस्थान के कोटा में भी बना था 222 फुट का रावण

भारत में सबसे ऊंचे रावण की बात करें, तो राजस्थान के कोटा का नाम भी सामने आता है. साल 2025 में यहां राष्ट्रीय दशहरा मेले के लिए करीब 221.5 से 222 फुट ऊंचा रावण बनाया गया था.  इसे बनाने का ठेका करीब 44 लाख रुपये में दिया गया था. इसे तैयार करने में लगभग चार महीने लगे और पुतले का वजन करीब 13.5 टन था. इस पुतले को बनाने में अंबाला के कारीगरों की टीम ने काम किया था. 

इतने बड़े पुतले बनाने में क्या लगता है?

विशाल रावण के पुतले बनाने के लिए बांस, लोहे का ढांचा, कपड़ा, रस्सियां और चेहरे के लिए फाइबरग्लास जैसे सामान इस्तेमाल किए जाते हैं. पुतले की ऊंचाई बढ़ने के साथ उसे खड़ा रखने और सुरक्षित तरीके से तैयार करने की चुनौती भी बढ़ जाती है. इसलिए कारीगरों को डिजाइन से लेकर उसे मैदान में खड़ा करने तक कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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