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UN में स्थायी सीट मिल जाए तो क्या बदल जाएगा, जानें कितनी बढ़ जाएगी भारत की पावर?

India permanent UN Seat: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सीट को लेकर रूस ने भारत का साथ दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर भारत को सीट मिल जाती है तो उसे क्या फायदा होगा.

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  • रूस ने भारत की यूएन स्थायी सीट का समर्थन किया।
  • स्थायी सदस्यता से भारत को वीटो शक्ति मिलेगी।
  • भारत ग्लोबल साउथ की सशक्त आवाज़ बनकर उभरेगा।

India permanent UN Seat: रूस ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत की लंबे समय से चले आ रही मांग का समर्थन किया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते हुए रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के ज्यादा प्रतिनिधित्व का समर्थन किया है. अगर भारत को स्थायी सदस्यता मिल जाती है तो वैश्विक कूटनीतिक व्यवस्था में उसकी स्थिति में भी एक बड़ा बदलाव आएगा.

स्थायी सीट मिलने से भारत को अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, प्रतिबंधों और दूसरे बड़े वैश्विक मुद्दों से जुड़े फैसलों में ज्यादा प्रभावशाली भूमिका मिलेगी. इससे भारत को दुनिया की सबसे जरूरी फैसले लेने वाली जगह में स्थायी स्थान भी मिलेगा.

भारत को वीटो पावर मिलेगी 

सबसे बड़ा बदलाव वीटो पावर का होगा. अभी सिर्फ पांच स्थायी सदस्यों, अमेरिका, रूस, चीन, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के पास यह शक्ति है. स्थायी सीट मिल जाने के बाद भारत सुरक्षा परिषद के किसी भी बड़े प्रस्ताव के खिलाफ वोट करके उसे रोक सकता है. इससे भारत को यूएनएससी में एक ऐसी संवैधानिक स्थिति मिलेगी जो उसे अभी अस्थायी सदस्य के तौर पर नहीं मिली है. भारत का वीटो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों से भी जुड़े मुद्दों, जिनमें पाकिस्तान और चीन से जुड़े मामले भी शामिल हैं, के लिए काफी जरूरी हो सकता है.


UN में स्थायी सीट मिल जाए तो क्या बदल जाएगा, जानें कितनी बढ़ जाएगी भारत की पावर?

वैश्विक स्तर पर फैसले लेने में भारत की भूमिका बढ़ेगी 

अभी भारत चुने जाने पर सीमित 2 साल के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के तौर पर काम करता है. स्थायी सदस्यता मिल जाने के बाद लगातार भागीदारी के लिए बार-बार चुनाव लड़ने की जरूरत खत्म हो जाएगी.

अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष, शांति स्थापना, प्रतिबंधों, सैन्य हस्तक्षेप और वैश्विक सुरक्षा नीति से जुड़ी चर्चाओं में भारत की लगातार मौजूदगी बनी रहेगी. इससे देश को लंबे वक्त तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय फैसलों को आकार देने में ज्यादा लगातार तरीके से भाग लेने का मौका मिलेगा. 

ग्लोबल साउथ के लिए एक मजबूत आवाज 

स्थायी सदस्यता विकासशील देशों के प्रतिनिधि के तौर पर भारत की भूमिका को और मजबूत कर सकती है. भारत ने अक्सर वैश्विक संस्थानों में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के ज्यादा प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर दिया है. स्थायी सीट मिलने से भारत को एक मजबूत संस्थागत मंच मिलेगा. यहां से वह विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठा सकेगा. 

भारत की वैश्विक स्थिति पर असर 

स्थायी सीट मिलना भारत के लिए कूटनीतिक स्तर पर एक बड़ी बढ़त होगी. इससे भारत उन स्थायी सदस्यों में शामिल हो जाएगा जो दुनिया के सबसे अहम मुद्दों को सुलझाने के लिए जिम्मेदार हैं. ऐसी स्थिति भारत की गठबंधन बनाने, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत करने और बहूपक्षीय कूटनीति के जरिए अपने हितों को आगे बढ़ाने की क्षमता को मजबूत कर सकती है.


UN में स्थायी सीट मिल जाए तो क्या बदल जाएगा, जानें कितनी बढ़ जाएगी भारत की पावर?

क्या इससे भारत को एनएसजी में शामिल होने में मदद मिल सकती है? 

स्थायी सदस्यता से दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की स्थिति काफी मजबूत हो सकती है.  न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप की इसमें काफी ज्यादा चर्चा होती है. भारत ने एनएसजी की सदस्यता के लिए कोशिश की है. लेकिन चीन के साथ मतभेद इसमें बाधा रहे हैं. स्थायी सीट मिल जाने से एनएसजी की सदस्यता की गारंटी तो नहीं मिलेगी लेकिन भारत की बेहतर कूटनीतिक स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ी बातचीत में उसके प्रभाव को बढ़ा सकती है. 

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भारत की वैश्विक भूमिका में बड़ा बदलाव 

इस वजह से स्थायी सीट मिलने से कई बड़े बदलाव आएंगे. वीटो पावर, यूएनएससी के फैसले लेने की प्रक्रिया में लगातार भागीदारी, ज्यादा कूटनीतिक प्रभाव और ग्लोबल साउथ के लिए एक मजबूत संस्थागत आवाज. 

हालांकि स्थायी सदस्यता के साथ ज्यादा जिम्मेदारियां भी आएंगी. भारत को संघर्षों, प्रतिबंधों, शांति बनाए रखने और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुश्किल अंतरराष्ट्रीय फैसलों में लगातार हिस्सा लेना होगा.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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