IAF Drone: कितने रुपये में बनकर तैयार होता है भारतीय वायुसेना का 'योद्धा', कैसे करता है काम?
IAF Drone: भारतीय वायु सेना की ताकत अब बढ़ाने वाली है. सरकार ने कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ड्रोन के विकास को मंजूरी दे दी है. आइए जानते हैं इसे बनाने में कितना खर्चा आएगा.

IAF Drone: भारतीय वायु सेना की क्षमता में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है. अब खतरनाक बचाव अभियानों के दौरान इंसानी जान जोखिम में नहीं पड़ेगी. सरकार ने एक स्वदेशी कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ड्रोन के विकास को मंजूरी दे दी है. इसे अक्सर क्षमताओं के मामले में भविष्य का योद्धा बताया जा रहा है. इस एडवांस्ड मानव रहित हवाई वाहन को उन फंसे हुए पायलटों और कर्मियों को दुश्मन के इलाके से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है, जहां हेलीकॉप्टर को भी काम करने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है. आइए जानते हैं कि इसे बनाने में कितना खर्चा आता है.
क्या है इसकी लागत?
इस ड्रोन की सटीक लागत अभी तक आधिकारिक तौर पर नहीं बताई गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह अभी भी विकास के चरण में है. हालांकि इसी तरह के दूसरे एडवांस्ड स्वदेशी मानव रहित हवाई वाहन प्लेटफार्म के आधार पर इसकी अनुमानित लागत प्रति यूनिट ₹50 करोड़ से ₹90 करोड़ के बीच होने की संभावना है.
यह परियोजना भारत की मेक I कैटिगरी के तहत विकसित की जा रही है. इसके तहत भारत सरकार विकास लागत का 70% वहन करेगी और निजी उद्योग भागीदार बाकी के 30% का योगदान देंगे.
ऊंचाई पर काम करने की क्षमता
इस ड्रोन की सबसे जरूरी विशेषताओं में से एक इसका रनवे मुक्त स्वभाव है. पारंपरिक विमान के उलट इसे किसी तैयार रनवे की जरूरत नहीं होती. इससे यह ऊबड़-खाबड़ और कच्ची जमीन पर भी उड़ान भर सकता है और उतर सकता है. यह ड्रोन 16000 से 20000 फीट की ऊंचाई पर काम कर सकता है.
ऑटोनॉमस एक बड़ी खासियत
इस ड्रोन को पूरी तरह से ऑटोनॉमस प्लेटफार्म के रूप में डिजाइन किया जा रहा है. यह बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने आप उड़ान भरने, नेविगेट करने और उतरने में सक्षम होगा. जरूरी बात यह है कि यह GNSS रहित वातावरण, यानी कि उन इलाकों में जहां जीपीएस सिगनल उपलब्ध नहीं होते या जाम कर दिए जाते हैं, में भी काम करेगा. इससे यह युद्धकाल या फिर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की स्थिति के दौरान ज्यादा विश्वसनीय बन जाता है.
खोज और बचाव कार्य क्षमता
मूल रूप से यह ड्रोन बचाव अभियानों के लिए बनाया गया है. यह इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर सिस्टम से लैस होगा. यह सिस्टम फंसे हुए पायलटों और सैनिकों का पता लगाने में मदद करता है.
इसी के साथ यह ड्रोन कम से कम 400 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकता है. इस क्षमता की वजह से यह चार व्यक्तियों तक को ले जा सकता है और घायल कर्मियों के लिए स्ट्रेचर ले जा सकता है. बचाव अभियान के अलावा यह ड्रोन लॉजिस्टिक्स में भी बड़ी भूमिका निभाएगा. यह दूर दराज और बर्फ से ढके इलाकों में भोजन, दवा और उपकरण जैसी जरूरी चीजें पहुंचा सकता है.
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Source: IOCL



























