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Artemis II: कैसे चोक हो गया आर्टेमिस II का टॉयलेट, इसके बाद कैसे फ्रेश हुए ऐस्ट्रोनॉट्स?

Artemis II: आर्टेमिस II मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान का टॉयलेट चोक हो गया. आइए जानते हैं अंतरिक्ष यात्रियों ने इस परेशानी से कैसे छुटकारा पाया.

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Artemis II: 2 अप्रैल 2026 को नासा ने कैनेडी स्पेस सेंटर से ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन लॉन्च किया. इस मिशन के जरिए चार अंतरिक्ष यात्रियों को 5 दशकों से भी ज्यादा समय में पहली बार चांद की ओर मानव युक्त यात्रा पर भेजा गया. लेकिन लॉन्चिंग के कुछ ही घंटे बाद अंतरिक्ष यान के टॉयलेट में एक परेशानी सामने आई. इस अंतरिक्ष यान का टॉयलेट चोक हो गया. आइए जानते हैं कि इस समस्या से अंतरिक्ष यात्रियों ने कैसे छुटकारा पाया.

पानी की कमी की वजह से पंप खराब 

लॉन्च के कुछ ही समय बाद टॉयलेट सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया. ऐसा इसलिए क्योंकि पंप को पानी से ठीक से चालू नहीं किया गया था. इसके बिना सिस्टम काम नहीं कर सकता था. मिशन कंट्रोल से मिले निर्देशों का पालन करते हुए अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ने जरूरी पानी डाला, जिससे सिस्टम फिर से चालू हो गया और क्रू एक शुरुआती संकट से बच गया.

 क्या थी दूसरी समस्या? 

तीसरे दिन तक जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 3,20,000 किलोमीटर दूर था टॉयलेट फिर से जाम हो गया. लेकिन इस बार इसकी वजह अंतरिक्ष की बेहद कठोर परिस्थितियां थीं. अंतरिक्ष के जमा देने वाले तापमान की वजह से बाहरी वेंट लाइन में पेशाब पूरी तरह से जम गया. इससे कचरा निपटाने वाला सिस्टम पूरी तरह से बंद हो गया. 

जलने की गंध ने समस्या बढ़ा दी 

अंतरिक्ष यात्रियों ने टॉयलेट वाले हिस्से से जलने जैसी गंध भी महसूस की. इसकी वजह शायद सिस्टम के पास की इन्सुलेशन का ज्यादा गर्म होना था. इससे यान के अंदर और चिंता बढ़ गई.

अंतरिक्ष यात्रियों ने बिना टॉयलेट के गुजारा कैसे किया? 

सिस्टम के खराब हो जाने पर अंतरिक्ष यात्रियों को दूसरे उपायों पर निर्भर रहना पड़ा. पेशाब करने के लिए एक कंटीन्जेंसी यूरिन डिवाइस का इस्तेमाल किया गया. यह एक तरह का प्लास्टिक बैग होता है. ठोस कचरे के लिए अंतरिक्ष यात्रियों ने सील बंद बैगों का इस्तेमाल किया. यह पहले के अंतरिक्ष मिशन में इस्तेमाल होने वाले बैग जैसा ही होता है. 

बर्फ पिघलाने के लिए सूरज की रोशनी का इस्तेमाल 

जमी हुई रुकावट को दूर करने के लिए मिशन कंट्रोल ने एक नया तरीका अपनाया. अंतरिक्ष यान को सूरज की तरफ घुमा दिया गया ताकि सूरज की रोशनी वेंट सिस्टम को स्वाभाविक रूप से गर्म कर सके और जमे हुए पेशाब को पिघला सके.

यह भी पढ़ें: शेख हसीना को कब तक शरण दे सकता है भारत, क्या इसके भी हैं कुछ नियम?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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