एक दिन में कितनी ट्रेनें चलाता है रेलवे, कितनी कमाई- कितना खर्च?
Indian Railways: भारत का रेलवे नेटवर्क काफी ज्यादा बड़ा है. आइए जानते हैं कि भारतीय रेलवे एक दिन में कितनी कमाई करती है.

- भारतीय रेलवे प्रतिदिन 24000 से अधिक ट्रेनें संचालित करती है।
- आय का मुख्य स्रोत माल ढुलाई है (कुल का 60-62%)।
- संचालन खर्च 690-720 करोड़, वेतन-पेंशन सबसे बड़े।
- यात्री टिकटों पर सब्सिडी से रेलवे को भारी नुकसान होता है।
Indian Railways: भारतीय रेलवे को अक्सर देश की जीवन रेखा कहा जाता है और इसका पैमाना ही इसकी वजह बताता है. हर दिन देश के बड़े रेल नेटवर्क पर हजारों यात्री और माल गाड़ियां चलती हैं. यह लाखों लोगों के साथ-साथ कोयला, सीमेंट, अनाज और खाद जैसी जरूरी चीजें भी पहुंचाती हैं. लेकिन इस बड़े कामकाज के पीछे उतना ही बड़ा वित्तीय सिस्टम भी काम करता है. रेलवे हर दिन सैकड़ों करोड़ रुपये कमाती है. लेकिन इसके बावजूद भी उस पैसे का एक बड़ा हिस्सा तुरंत सैलरी, पेंशन, ईंधन, बिजली, रख रखाव और दूसरे ऑपरेटिंग खर्चे में चला जाता है. तो असल में हर दिन कितनी ट्रेन चलती हैं, पैसा कहां से आता है और इतना बड़ा सिस्टम इतनी कम वित्तीय बचत के साथ कैसे चलता है? आइए जानते हैं.
हर दिन 24000 से ज्यादा ट्रेन
भारतीय रेलवे हर दिन 24000 से 25000 ट्रेन चलाती है. इन्हें मोटे तौर पर यात्री और माल ढुलाई सेवा में बांटा गया है. रोजाना लगभग 13500 से 14000 यात्री ट्रेन चलती हैं. इनमें आम यात्री सेवाएं, एक्सप्रेस और मेल ट्रेन, उपनगरी सेवा और वंदे भारत और अमृत भारत जैसी प्रीमियम ट्रेन शामिल हैं. यह ट्रेन मिलकर हर दिन लगभग 2 से 2.5 करोड़ यात्रियों को सेवा देती है.
यात्री सेवाओं के साथ-साथ हर दिन 11000 से ज्यादा माल गाड़ियां भी चलती हैं. यह ट्रेन भारत के उद्योग और बिजली क्षेत्र के लिए जरूरी कच्चा माल और तैयार सामान पहुंचाती हैं.

रेलवे पैसा कहां से कमाती है?
भारतीय रेलवे की सालाना कमाई लगभग 2.74 लाख करोड़ है. इसका मतलब है की औसत दैनिक कमाई कई 100 करोड़ रुपये है. दिलचस्प बात यह है कि यात्री टिकट रेलवे की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है ही नहीं. माल ढुलाई का इसमें सबसे बड़ा हिस्सा है. माल ढुलाई से रोजाना की कमाई का लगभग 60% से 62% हिस्सा आता है. यानी लगभग 465 करोड़ रोजाना. इस कारोबार का एक बड़ा हिस्सा कोयले की ढुलाई से आता है और उसके बाद सीमेंट, लोहा, खाद और अनाज जैसी चीज आती हैं. यात्री सेवाओं से रोजाना लगभग 200 से 232 करोड़ की कमाई होती है. यह कुल कमाई का लगभग 31% है. बाकी कमाई गैर किराया स्रोत से होती है. इसमें पार्सल सेवा, विज्ञापन, कबाड़ के नीलामी और लीजिंग से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं.

सारा पैसा कहां जाता है?
इतने बड़े नेटवर्क को चलाने में काफी ज्यादा खर्च आता है. रोजाना का ऑपरेटिंग खर्च लगभग 690 से 720 करोड़ है. इससे सालाना ऑपरेटिंग खर्च लगभग 2.62 लाख करोड़ हो जाता है. सबसे बड़े खर्चों में से एक रेलवे का वर्कफोर्स है. इंडियन रेलवे में 12 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं इस वजह से सैलरी इसके खर्च का एक बड़ा हिस्सा है.
इसी के साथ रिटायर हो चुके रेलवे कर्मचारियों को पेंशन देना भी एक बड़ा आर्थिक बोझ है. एक और बड़ा खर्च ट्रैक्शन एनर्जी है. यानी की ट्रेन को चलाने के लिए जरूरी बिजली और डीजल.
अब जब लगभग पूरा ब्रॉड गेज नेटवर्क बिजली से चलने वाला हो गया है तो बिजली काफी ज्यादा जरूरी हो गई है. रेलवे लंबे समय में अपनी ऊर्जा लागत को कम करने के लिए सोलर पावर की तरफ भी ध्यान दे रहा है.
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ऑपरेटिंग रेश्यो का क्या मतलब है?
इंडियन रेलवे की आर्थिक सेहत को अक्सर उसके ऑपरेटिंग रेश्यो से मापा जाता है. अगर ऑपरेटिंग रेश्यो 98.43% है तो इसका मतलब है कि रेलवे ऑपरेटिंग रेवेन्यू के हर ₹100 कमाने के लिए लगभग ₹98.43 खर्च करता है. इससे दूसरी आर्थिक जरूरत को ध्यान में रखने से पहले ऑपरेटिंग सरप्लस के तौर पर काफी कम रकम बचती है. इस वजह से रेलवे सिस्टम में इतनी बड़ी रकम के लेनदेन के बावजूद है इसे काफी ज्यादा मुनाफा कमाने वाला बिजनेस नहीं कहा जा सकता.
पैसेंजर टिकट कितने सस्ते क्यों हैं?
सबसे बड़ी वजहों में से एक ही है कि इंडियन रेलवे सामाजिक सेवा का काम भी करती है. किफायती ट्रेन यात्रा भारत के मिडिल क्लास और कम इनकम वाले लोगों के लिए काफी जरूरी है. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक रेलवे एक यात्री को 1 किलोमीटर तक ले जाने में लगभग ₹1.38 खर्च करता है. इसी के साथ औसत किराया सिर्फ 73 पैसे मिलता है.
दूसरे शब्दों में यात्रियों को आम यात्रा पर काफी सब्सिडी मिलती है. इससे पैसेंजर ऑपरेशन में काफी नुकसान होता है. इसका अनुमान सालाना लगभग 60000 करोड़ है.
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