एक्सप्लोरर

Hezbollah Drones: किस तकनीक से ड्रोन बना रहा हिज्बुल्लाह, जिसे ट्रैक करने में नाकाम हो रहा इजरायल?

Hezbollah Drones: हिज्बुल्लाह कुछ ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है जिन्हें इजरायल के रडार ट्रैक नहीं कर पा रहे हैं. आइए जानते हैं कि किस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • इजरायल के हमले में गाजा स्थित इस्लामिक जिहाद कमांडर मारा गया।
  • हिज्बुल्लाह फाइबर ऑप्टिक केबल से जुड़े ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है।
  • पारंपरिक रडार और जैमिंग सिस्टम इन ड्रोन को पकड़ नहीं पाते।
  • ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, लॉन्च की जगह भी छिपी रहती है।

Hezbollah Drones: लेबनान में सीजफायर की स्थिति के बावजूद हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. सोमवार को लेबनान की बेका घाटी में इजरायल के एक हमले में कथित तौर पर वाएल अब्देल हलीम मारा गया. यह कमांडर गाजा स्थित फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद से जुड़ा था.  बढ़ते संघर्ष के बीच अब ध्यान एक नई तरह की ड्रोन टेक्नोलॉजी पर गया है. इसका इस्तेमाल कथित तौर पर हिज्बुल्लाह कर रहा है. यह एक ऐसा सिस्टम है जिसे इजरायल के आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक रक्षा नेटवर्क के लिए पकड़ना या फिर रोकना मुश्किल साबित हो रहा है.

हिज्बुल्लाह किस ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है? 

रिपोर्ट्स और सैन्य विश्लेषण के मुताबिक हिज्बुल्लाह पारंपरिक वायरलेस रेडियो सिस्टम के बजाय फाइबर ऑप्टिक केबल से जुड़े फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन तैनात कर रहा है. इस टेक्नोलॉजी ने रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान काफी सुर्खियां बटोरी थी. जहां युद्ध के मैदान में इसी तरह के ड्रोन का बड़े पैमाने पर परीक्षण किया गया था. पारंपरिक ड्रोन के उलट जो रेडियो फ्रीक्वेंसी या फिर सैटेलाइट संचार पर निर्भर होते हैं ये ड्रोन ऑपरेटर से बेहद पतले फाइबर ऑप्टिक केबलों के जरिए भौतिक रूप से जुड़े रहते हैं.

क्योंकि संचार वायरलेस संकेत के बजाय केबल के जरिए होता है इस वजह से पारंपरिक इलेक्ट्रिक युक्त प्रणालियों को इन्हें पकड़ने या फिर रोकने में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है.

इन ड्रोन को जाम करना मुश्किल क्यों? 

ज्यादातर आधुनिक सैन्य ड्रोन रक्षा प्रणाली रेडियो फ्रीक्वेंसी का पता लगाकर काम करती हैं. इसके बाद ड्रोन और उसके ऑपरेटर के बीच के संकेत को जाम या फिर ब्लॉक कर देती हैं. हालांकि फाइबर ऑप्टिक फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन हवा में रेडियो संकेत प्रसारित नहीं करते. क्योंकि कोई वायरलेस संचार नहीं हो रहा होता इस वजह से इजरायल की इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग प्रणाली को कथित तौर पर इनके संचालन में बाधा डालने में मुश्किल होती है.

क्यों है इन्हें पकड़ना मुश्किल? 

रिपोर्ट से पता चलता है कि इनमें से कई ड्रोन काफी छोटे होते हैं और हल्के फाइबर ग्लास सामग्री का इस्तेमाल करके बनाए जाते हैं. यही वजह है कि वे काफी कम रडार और थर्मल संकेत उत्पन्न करते हैं. इससे पारंपरिक रडार प्रणालियों के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा यह ड्रोन काफी कम ऊंचाई पर उड़ते हैं. इससे वे आयरन डोम जैसी बड़ी हवाई रक्षा प्रणालियों की पकड़ में आने से बच जाते हैं.

लॉन्च की जगह का पता लगाना मुश्किल 

क्योंकि फाइबर ऑप्टिक ड्रोन कोई इलेक्ट्रॉनिक या फिर वायरलेस सिग्नल नहीं छोड़ता इस वजह से खुफिया एजेंसी को यह पता लगाने में मुश्किल होती है कि यह ड्रोन कहां से लॉन्च किए जा रहे हैं.

यह भी पढ़ेंः रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा भारत, जानें अब तक कितना क्रूड ऑयल मंगाया?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

वंदे मातरम को लेकर अंग्रेज क्या सोचते थे, कब-कब लगाया प्रतिबंध?
वंदे मातरम को लेकर अंग्रेज क्या सोचते थे, कब-कब लगाया प्रतिबंध?
 XI JINPING Dinner Menu: शी जिनपिंग क्या खाएंगे-क्या नहीं, विदेश दौरे पर कैसे तय होता है मेन्यू?
शी जिनपिंग क्या खाएंगे-क्या नहीं, विदेश दौरे पर कैसे तय होता है मेन्यू?
Tenure Of Governor In India: एक राज्य में कितने साल तक रह सकते हैं गवर्नर, क्या है नियम?
एक राज्य में कितने साल तक रह सकते हैं गवर्नर, क्या है नियम?
Mount Huygens: धरती पर एवरेस्ट तो चांद पर सबसे ऊंची चोटी कौन-सी, वहां पहुंचना कितना मुश्किल?
धरती पर एवरेस्ट तो चांद पर सबसे ऊंची चोटी कौन-सी, वहां पहुंचना कितना मुश्किल?

वीडियोज

Janhit With Chitra Tripathi: Nripendra Mishra...Champat Rai के टारगेट पर क्यों आए? | Donation Scam
Chirag Paswan Exclusive: CM Samrat को लिखी चिट्ठी का क्या राज? EXCLUSIVE बातचीत में खुला राज!
Sandeep Chadhary: राष्ट्रगीत बहाना...मुस्लिम वोटबैंक पर निशाना? | Vande Mataram Row| BJP | Congress
Sugar Price Hike: चीनी के दाम बढ़े तो सरकार ने कसी लगाम, स्टॉक पर रोक | Breaking | New Price
Chitra Tripathi: 2 छंद Vs 6 छंद, राष्ट्रगीत पर जंग क्योंं? विश्लेषकों का विश्लेषण| Vande Mataram Row

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
TMC नेता सुजीत बोस की जमानत पर बड़ा ट्विस्ट! जज ने खुद को केस से किया अलग
TMC नेता सुजीत बोस की जमानत पर बड़ा ट्विस्ट! जज ने खुद को केस से किया अलग
आशुतोष रांका पर हमले पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बयान, 'CJP का चरित्र...'
आशुतोष रांका पर हमले पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बयान, 'CJP का चरित्र...'
'रणबीर कपूर से बेहतर', 'रामायण' में यश के 'रावण' लुक पर फिदा हुए हनी सिंह
'रणबीर कपूर से बेहतर', 'रामायण' में यश के 'रावण' लुक पर फिदा हुए हनी सिंह
वनडे इंटरनेशनल में कभी जीरो पर आउट ना होने वाले बल्लेबाज
वनडे इंटरनेशनल में कभी जीरो पर आउट ना होने वाले बल्लेबाज
तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी का अमेरिका दौरा रद्द, केंद्र पर लगाया ये आरोप
तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी का अमेरिका दौरा रद्द, केंद्र पर लगाया ये आरोप
सिंगापुर में भारतीय नागरिक दिवालिया, मजदूरों का बकाया नहीं देने का आरोप
सिंगापुर में भारतीय नागरिक दिवालिया, मजदूरों का बकाया नहीं देने का आरोप
राहुल गांधी के सामने साहिल लोचव की वकील ने पुलिस पर लगाए चौंकाने वाले आरोप
राहुल गांधी के सामने साहिल लोचव की वकील ने पुलिस पर लगाए चौंकाने वाले आरोप
दिल्ली में 9वीं की तीसरी भाषा का नियम वापस, R3 में फेल होने पर भी दे सकेंगे 10वीं बोर्ड
दिल्ली में 9वीं की तीसरी भाषा का नियम वापस, R3 में फेल होने पर भी दे सकेंगे 10वीं बोर्ड
Embed widget