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Naval Mines: समुद्र में बिना आग के कैसे फटती हैं माइंस, जानें कितनी होती हैं ये खतरनाक?

Naval Mines: समुद्र के नीचे छिपी माइंस एक काफी खतरनाक हथियार साबित हो सकती है. आइए जानते हैं कि बिना किसी आग के ये कैसे फटती हैं.

Naval Mines: समुद्र की सतह के नीचे युद्ध के सबसे शांत लेकिन सबसे विनाशकारी खतरों में से एक है समुद्री माइंस. इन विस्फोटक उपकरणों को फटने के लिए आग, चिंगारी या फिर किसी दिखाई देने वाले इग्निशन की जरूरत नहीं होती. इसके बजाय वे एडवांस्ड सेंसर और रासायनिक प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं. पानी के नीचे छिपी हुई एक अकेली माइन ही कुछ ही सेकंड में बड़े से बड़े जहाज को नष्ट कर सकती है.

कॉन्टैक्ट माइंस 

सबसे आसान प्रकारों में से एक हैं कॉन्टैक्ट माइंस. ये माइन सींग जैसी उभरी हुई संरचना से लैस होती हैं. जब भी कोई जहाज इनमें से किसी सींग को छूता है तो उसके अंदर मौजूद कांच की एक छोटी शीशी टूट जाती है जिससे एसिड निकलता है. यह एसिड एक बैटरी को सक्रिय कर देता है जो डेटोनेटर तक बिजली का करंट भेजती है. इसे बिना किसी आग के तुरंत विस्फोट हो जाता है.

इन्फ्लुएंस माइंस 

इन्फ्लुएंस माइंस काफी ज्यादा एडवांस्ड होती हैं. इन्हें भौतिक संपर्क की जरूरत नहीं होती. इन माइंस में ऐसे सेंसर लगे होते हैं जो पर्यावरण में होने वाले बदलाव का पता लगाते हैं. वे जहाज के धातु के ढांचे के चुंबकीय क्षेत्र को महसूस कर सकती है. एक बार जब किसी भी तरह का बदलाव एक निश्चित सीमा तक पहुंच जाता है तो यह माइंस अपने आप फट जाती हैं.

रिमोट कंट्रोल्ड माइंस 

कुछ माइंस को दूर से मैन्युअल रूप से कंट्रोल किया जा सकता है. यह रिमोट कंट्रोल माइंस तब तक निष्क्रिय रहती है जब तक कि किनारे या फिर किसी नियंत्रण केंद्र से कोई संकेत नहीं भेजा जाता. ये सटीक समय को तय करने की सुविधा देती है. 

क्यों है ये खतरनाक?

इस तरह की माइंस समुद्री युद्ध में सबसे घातक हथियार में से एक हैं. कुछ हजार डॉलर जितना कम खर्च होने के बावजूद ये अरबों डॉलर के युद्धपोत या फिर मालवाहक जहाज को नष्ट कर सकती हैं. उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका दिखाई ना देना है. 

इन माइंस को साफ करना एक मुश्किल और समय लेने वाली प्रक्रिया है. माइंस सफाई अभियान में माइंस बिछाने की तुलना में काफी ज्यादा मुश्किल का सामना करना पड़ता है. इस काम में कम से कम 200 गुना ज्यादा संसाधन की जरूरत होती है. युद्ध समाप्त होने के बाद भी ये माइंस दशकों तक सक्रिय रह सकती हैं. संघर्ष समाप्त होने के बहुत बाद तक भी कई माइंस जहाजों और मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए खतरा बनी रहती हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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