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Uttar Pradesh Name History: यूपी का नाम यूपी कैसे पड़ा, अंग्रेज या मुगल किससे है इसका असली कनेक्शन?

Uttar Pradesh Name History: उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर चर्चाएं चल रही हैं. इसी बीच आइए जानते हैं की यूपी का नाम यूपी कैसे पड़ा.

Uttar Pradesh Name History: उत्तर प्रदेश के संभावित बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि आखिर उत्तर प्रदेश को यह नाम कैसे मिला. क्या इसकी उत्पत्ति मुगलों से हुई या फिर अंग्रेजों से. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

 अंग्रेजों  से पहले का क्षेत्र 

मुगल काल के दौरान जो क्षेत्र आज उत्तर प्रदेश है उसे कभी भी एक राजनीतिक या फिर प्रशासनिक इकाई के रूप में नहीं माना गया. इसके बजाय इसे कई सूबों में बांटा गया था. जैसे सूबा-ए-आगरा, सूबा-ए-अवध और सूबा-ए-इलाहाबाद. हर प्रांत पर अलग-अलग शासन होता था जिसकी अपनी राजस्व प्रणाली और प्रशासनिक संरचना थी.

हालांकि मुगलों ने इस क्षेत्र की संस्कृति, भाषा, वास्तुकला और शहरी केंद्रों को गहराई से प्रभावित किया लेकिन उन्होंने इसे कभी भी एक नाम के तहत एकजुट नहीं किया. यही वजह है कि एतिहासिक रिकॉर्ड में उत्तर प्रदेश के बराबर मुगल युग का कोई भी नाम नहीं है.

ब्रिटिश शासन और एक एकीकृत पहचान का जन्म 

इस क्षेत्र का वास्तविक एकीकरण ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के तहत शुरू हुआ. यह पूरी तरह से प्रशासनिक सुविधा की वजह से था. 1836 में, अंग्रेजों ने पहली बार उत्तरी भारत के बड़े हिस्सों को उत्तर पश्चिमी प्रांत नाम के तहत एक साथ सामूहिक किया. ऐसा पहली बार था जब इस जगह को एक एकल प्रशासनिक इकाई के रूप में माना गया. 

1856 में अंग्रेजों द्वारा अवध पर कब्जा करने के बाद उन्होंने इस जगह को और पुनर्गठित किया. 1902 में इसका नाम बदलकर 'आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत' कर दिया गया. 1937 तक नाम को छोटा कर के सिर्फ संयुक्त प्रांत कर दिया गया. इस बिंदु से 'यूपी' नाम अधिकारियों और आम जनता के बीच लोकप्रिय हो गया. 

स्वतंत्रता और एक नए नाम पर बहस 

1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद संयुक्त प्रांत नाम को तेजी से औपनिवेशिक शासन के प्रति के रूप में देखा जाने लगा. भारतीय इतिहास और पहचान में निहित नाम अपनाने पर जोर दिया गया. आर्यावर्त सबसे लोकप्रिय विकल्प बना और उसे राज्य विधानसभा में बहुमत वोट मिला. दूसरे सुझावों में अवध, ब्रह्मवर्त, मध्य देश और राम-कृष्ण प्रदेश शामिल थे. 

उत्तर प्रदेश नाम क्यों चुना गया 

एक राजनीतिक और भाषाई समझौते से आखिरकार बहस खत्म हुई. आर्यावर्त को लेकर दक्षिणी राज्यों के नेताओं ने आपत्ति जताई. गोविंद बल्लभ पंत जैसे नेताओं ने ऐसे नाम की वकालत की जो निरंतरता बनाए रखें और साथ ही औपनिवेशिक प्रतीकों को भी हटा दे. इसका समाधान निकला उत्तर प्रदेश. इस चुनाव से जाना पहचाना संक्षिप्त नाम 'यूपी' भी बना रहा. यह औपचारिक बदलाव यूनाइटेड प्रोविंसेज आदेश 1950 के जरिए किया गया था. यह 24 जनवरी 1950 को लागू हुआ. यही वजह है कि हर साल 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस के रूप में मनाया जाता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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