लाल किले में कैसे खोल सकते हैं अपनी दुकान? कहां करना होता है आवेदन
लाल किले के ऐतिहासिक मीना बाजार की दुकानें 99 साल की पुरानी लीज पर संचालित होती हैं. आइए जानें कि नए व्यावसायिक स्टॉल या कैफे खोलने के लिए कहां आवेदन करना होता है.

भारत की राजधानी दिल्ली व्यापार का बड़ा केंद्र है, जहां नया व्यवसाय शुरू करने के लिए भारी-भरकम बजट की जरूरत होती है. ऐसी स्थिति में ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों पर दुकान होना किसी भी व्यापारी के लिए फायदे का सौदा माना जाता है. लाल किले के परिसर में प्रतिदिन हजारों भारतीय व विदेशी पर्यटक आते हैं, जिस वजह से यहां व्यावसायिक गतिविधि का विशेष आकर्षण रहता है. आपको पता है कि लाल किले के अंदर भी दुकानें लगती हैं और उसे मीना बाजार कहा जाता है और वही असली मीना बाजार बताई जाती है. चलिए जानें कि वहां दुकान कैसे खोल सकते हैं.
लाल किले का छत्ता बाजार
लाल किले के भीतर प्रवेश करते ही जो मशहूर बाजार दिखाई देता है, उसे छत्ता चौक या छत्ता बाजार के नाम से जाना जाता है. इस ऐतिहासिक बाजार की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां सीधे तौर पर कोई नई दुकान नहीं खरीदी जा सकती और न ही आम रेंट एग्रीमेंट से ली जा सकती है. यहां स्थित दुकानें 99 साल की लीज पर आवंटित की गई थीं. इन दुकानों का सालाना किराया केवल 16 रुपये के आसपास दर्ज है, जबकि पुराने दुकानदारों की पीढ़ियां इसी नाममात्र के किराये पर हर साल लाखों रुपये का कारोबार करती हैं.
मुगलकालीन महिलाओं का खास बाजार
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, इस बाजार का निर्माण मुगल काल के दौरान विशेष रूप से राजपरिवार की महिलाओं की सहूलियत के लिए किया गया था. उस समय महल की स्त्रियों को बाहरी बाजारों में जाने की अनुमति नहीं होती थी, इसलिए किले के अंदर ही खरीदारी की व्यवस्था की गई थी. यद्यपि आगरा के किले वाले बाजार को भी मीना बाजार कहा जाता है, लेकिन इतिहासकार दिल्ली के लाल किले में स्थित छत्ता चौक को ही वास्तविक मीना बाजार मानते हैं. उस जमाने में राजपूत रानियां व शाही महिलाएं स्वयं यहां दुकानें लगाया करती थीं और केवल महिलाओं को ही खरीदारी की अनुमति थी.
यह भी पढ़ें: क्या इनकम टैक्स ऑफिसर किसी को लगा सकता है हथकड़ी, जानें क्या कहते हैं नियम?

दुनिया का पहला शॉपिंग मॉल
इतिहासकारों की मानें तो लाल किले के इस मीना बाजार को दुनिया का पहला शॉपिंग मॉल माना जा सकता है. यह एक पूरी तरह से ढका हुआ बाजार था, जिसकी योजना तत्कालीन वास्तुकला की दृष्टि से बेहद उन्नत थी. इस अनोखे बाजार की शुरुआत सबसे पहले मुगल बादशाह हुमायूं के शासनकाल में हुई थी. इसके बाद बादशाह अकबर ने इसका विस्तार किया और आगे चलकर शाहजहां ने लाल किले के निर्माण के साथ इसे और भव्य रूप प्रदान किया.
मीना बाजार में क्या मिलता है सामान?
वर्तमान समय में इस ऐतिहासिक बाजार में देश-विदेश के पर्यटक जमकर खरीदारी करते हैं. यहां मुख्य रूप से हस्तशिल्प, पारंपरिक आभूषण, एंटीक पीस, कश्मीरी कालीन, हाथ से बनी क्रॉकरी और घर की सजावट के ऐतिहासिक सामान मिलते हैं. इस बाजार में कई प्राचीन व दुर्लभ दिखने वाली वस्तुओं की शुरुआती कीमत महज 100 रुपये से शुरू होती है. एक सामान्य पर्यटक 2,000 से 3,000 रुपये के बजट में यहां से बेहतरीन और यादगार चीजें खरीद सकता है.
लाल किले में दुकान खोलने की क्या है प्रक्रिया?
लाल किला एक संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक है, इसलिए यहां अपनी इच्छा से या निजी सौदे से दुकान नहीं खोली जा सकती है. यदि किले के अंदर कैफे, सोवेनियर शॉप, स्टॉल या अन्य व्यावसायिक सेवाएं शुरू करनी हों, तो इसका अधिकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और दिल्ली पर्यटन विभाग के पास होता है. इसके लिए सरकार द्वारा आधिकारिक ई-टेंडर जारी किए जाते हैं. आम जनता या व्यापारी केवल इसी पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से जगह पाने का आवेदन कर सकते हैं.

टेंडर भरने का क्या है पूरा तरीका?
लाल किले परिसर में दुकान या काउंटर हासिल करने के लिए इच्छुक आवेदकों को सरकार के सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट पोर्टल (CPP Portal) या संबंधित विभाग की वेबसाइट पर नियमित नजर रखनी होती है. जब भी कोई नोटिस (NIT) जारी होता है, तो आवेदन प्रक्रिया शुरू होती है. इसमें हिस्सा लेने के लिए आवेदक के पास क्लास-3 डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) होना अनिवार्य है. व्यापारियों को तय शर्तों के तहत तकनीकी और वित्तीय बोली के साथ सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होता है, जिसके बाद सर्वाधिक योग्य बोलीदाता को लाइसेंस आवंटित किया जाता है.
यह भी पढ़ें: कहां के लोग खाते हैं सबसे ज्यादा प्याज, भारत किस नंबर पर?





















