भारत को UN में कैसे मिलेगी स्थायी सीट, जानें देश के लिए यह क्यों जरूरी?
India UNSC Seat: हाल ही में भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता को लेकर चर्चा चल रही है. आइए जानते हैं भारत को यह सदस्यता कैसे मिल सकती है और इससे भारत को क्या फायदा होगा.

- स्थायी सीट भारत को वीटो पावर, वैश्विक आवाज देगी।
India UNSC Seat: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की मांग को चार यूरोपीय देशों का समर्थन मिला है. पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशन महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई पहली V4+ भारत विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत की दावेदारी का समर्थन किया. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर स्थाई सीट के लिए भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग और इसे हासिल करने की मुश्किल प्रकिया की तरफ ध्यान आकर्षित किया है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए यूनाइटेड नेशन चार्ट में संशोधन की जरूरत होती है. अनुच्छेद 108 के तहत ऐसे संशोधन के लिए यूनाइटेड नेशन महासभा के दो तिहाई सदस्यों की मंजूरी की जरूरत होती है. इसका मतलब है कि भारत को कम से कम 129 देशों के समर्थन की जरूरत होगी.
हालांकि महासभा में दो तिहाई बहुमत हासिल करना ही काफी नहीं होगा. प्रस्तावित संशोधन की सुरक्षा परिषद के सभी पांच मौजूदा स्थायी सदस्यों, जिन्हें आमतौर पर P5 के रूप में जाना जाता है, के द्वारा भी अनुमोदित किया जाना होगा. यह देश संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और चीन हैं.
इस वजह से यह प्रक्रिया काफी ज्यादा मुश्किल हो जाती है क्योंकि हर मौजूदा स्थायी सदस्य की अनुमोदन प्रक्रिया में बड़ी भूमिका होती है. अगर P5 में से कोई एक भी संशोधन को मंजूरी नहीं देता तो भारत की दावेदारी आगे नहीं बढ़ सकती.

चीन का विरोध एक बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक भारत को अपनी स्थाई सदस्यता की दावेदारी के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम से समर्थन मिला है. हालांकि चीन भारत की स्थायी सदस्यता और वीटो अधिकारों की मांग का विरोध करता रहा है. चीन का रुख भारत की दावेदारी के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. ऐसा इसलिए क्योंकि यूनाइटेड नेशंस चार्टर में संशोधन को प्रभावी बनाने के लिए उसकी मंजूरी जरूरी होगी.
इस वजह से भारत दूसरे देशों और समूहों के बीच राजनयिक समर्थन जुटाता रहा है. यह ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ जी4 समूह का भी हिस्सा है. इन चारों देशों ने सुरक्षा परिषद को बदलती वैश्विक व्यवस्था का अधिक प्रतिनिधित्व करने वाला बनाने के लिए लगातार सुधारों की वकालत की है.
भारत के लिए यह क्यों जरूरी?
स्थायी सीट भारत को सुरक्षा परिषद के फैसले लेने की प्रक्रिया में निरंतर भूमिका देगी. भारत पहले भी आठ बार गैर-स्थायी सदस्य रह चुका है. लेकिन यह कार्यकाल सिर्फ 2 साल के होते हैं. स्थायी सदस्य बनने से भारत को बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों जैसे संघर्ष, प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और युद्ध रोकने की कोशिश पर होने वाली चर्चा और फैसलों में लगातार शामिल होने का मौका मिलेगा.
वीटो पावर और राष्ट्रीय हित
स्थायी सदस्यता का एक सबसे बड़ा फायदा वीटो पावर होगा. स्थायी सदस्य के तौर पर भारत सुरक्षा परिषद के किसी ऐसे प्रस्ताव को रोक सकेगा जो उसे अपने राष्ट्रहितों के खिलाफ लगे.
यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, सीमा से जुड़े मुद्दों और भारत के रणनीतिक हितों पर सीधा असर डालने वाले दूसरे मामलों में खास तौर पर जरूरी हो सकता है. वीटो पावर से भारत को सुरक्षा परिषद के बड़े फैसलों पर ज्यादा असर डालने का मौका भी मिलेगा.
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ग्लोबल साउथ के लिए मजबूत आवाज
भारत ने तेजी से खुद को विकासशील देश और ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज के तौर पर पेश किया है. स्थायी सीट मिलने से भारत को विकासशील और गरीब देशों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए एक मजबूत मंच मिल सकता है. यूएनएससी में स्थायी मौजूदगी से भारत को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक शासन पर चर्चाओं में सीधे शामिल होते हुए इन मुद्दों को ज्यादा लगातार तरीके से उठाने का मौका मिलेगा.
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भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव
स्थायी सीट मिल जाने से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति भी काफी मजबूत होगी. इससे भारत को शांति और सुरक्षा से जुड़े दुनिया के सबसे जरूरी संसाधनों में से एक में स्थायी भूमिका मिलेगी. इस वजह से भारत की है मांग सिर्फ कोई और अंतरराष्ट्रीय पद पाने के बारे में नहीं है. यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर असर डालने वाले फसलों में ज्यादा भागीदारी की उसकी इच्छा से जुड़ी है.
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