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Fiber Rebar: 10x12 का कमरा बनाने में कितना लगेगा फाइबर सरिया, लोहे के मुकाबले कितना पड़ेगा सस्ता?

Fiber Rebar: अगर आप 10×12 का कमरा बनाने का विचार कर रहे हैं तो पारंपरिक सरिये के उलट फाइबर सरिया एक बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. आइए जानते हैं कितना आएगा खर्चा.

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  • फाइबर सरिया, स्टील की तुलना में 75% हल्का होता है।
  • कम मात्रा की जरूरत से कुल लागत कम आती है।
  • फाइबर सरिये में जंग नहीं लगता, रखरखाव की लागत बचती है।
  • हल्का होने से ट्रांसपोर्ट और लगाने का काम आसान होता है।

Fiber Rebar: जब 10×12 फुट का एक छोटा कमरा बनाया जाता है तो सबसे जरूरी फैसलों में से एक होता है छत की स्लैब के लिए सही मजबूती देने वाला मटीरियल चुनना. पारंपरिक रूप से स्टील के सरिये का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अब फाइबर सरिया एक आधुनिक विकल्प के तौर पर उभर रहा है. इन दोनों के बीच का फर्क सिर्फ वजन में नहीं बल्कि इनकी कीमत और लंबे समय तक टिकने की क्षमता में भी है. 

कितने सरिये की जरूरत होती है?

इस आकार की एक आम छत के स्लैब के लिए आमतौर पर लगभग 200 से 250 किलोग्राम स्टील के सरिये की जरूरत होती है. हालांकि फाइबर सरिया काफी हल्का होता है. यह स्टील के सरिये के मुकाबले लगभग 75% हल्का होता है. इसी वजह से वैसे ही मजबूती पाने के लिए सिर्फ लगभग 50 से 70 किलो फाइबर सरिये की जरूरत पड़ती है.

वजन का फर्क और उसका असर

फाइबर सरिये का सबसे बड़ा फायदा इसका हल्का होना है. जहां स्टील के लिए 200 किलो से ज्यादा वजन की जरूरत होती है वहीं फाइबर सरिया लगभग एक चौथाई वजन में ही वही काम कर सकता है. इससे ना सिर्फ मटीरियल की खपत कम होती है बल्कि इसे संभालना और लगाना भी काफी आसान हो जाता है.

कीमत की तुलना 

भारत में मौजूदा बाजार रेट को देखें तो स्टील के सरिये की कीमत लगभग ₹55 से ₹65 प्रति किलोग्राम है. इससे 10×12 की स्लैब का कुल खर्च लगभग ₹13000 से ₹16000 तक आता है. दूसरी तरफ फाइबर सरिये की कीमत प्रति किलोग्राम काफी ज्यादा होती है. यह ₹150 से ₹300 के बीच होती है. लेकिन इसकी काफी कम मात्रा की जरूरत पड़ती है इस वजह से कुल खर्च घटकर लगभग ₹10000 से ₹15000 तक आ जाता है.

फाइबर सरिया सस्ता क्यों पड़ता है? 

भले ही फाइबर सरिया प्रति किलोग्राम ज्यादा महंगा लगता हो लेकिन कुल मिलाकर यह 20% से 40% तक ज्यादा किफायती साबित हो सकता है.  ऐसा इसलिए क्योंकि आपको काफी कम मटीरियल की जरूरत पड़ती है. वजन कम होने की वजह से ट्रांसपोर्ट का खर्च भी कम आता है और काम भी आसान और तेज हो जाता है. 

फाइबर सरिये के फायदे 

फाइबर सरिये में जंग नहीं लगता. इस वजह से भविष्य में होने वाले रखरखाव का खर्च बच जाता है. साथ ही स्टील के मुकाबले इसे काटना और लगाना भी ज्यादा आसान होता है.  ये सभी बातें लंबे समय में पैसे बचाने में मदद करती हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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