प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड कंपनी में क्या होता है अंतर? जान लीजिए जवाब
प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड कंपनी में क्या अंतर होता है? जाने शेयर, स्वामित्व, निवेशकों की भूमिका और कानूनी नियमों से जुड़े अहम फर्क, जो हर बिजनेस और निवेशक के लिए जानना जरूरी है.

आज का दौर स्टार्टअप और नए बिजनेस का दौर है. हर दिन कोई न कोई नया बिजनेस शुरू हो रहा है और कई युवा नौकरी करने के बजाय अपना उद्यम खड़ा करने का सपना देख रहे हैं. ऐसे में अक्सर प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड कंपनी जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं. हालांकि, बहुत से लोग इन दोनों के बीच का अंतर नहीं जानते और कंफ्यूज हो जाते हैं. ऐसे में आपको बता दें कि इनके नियम, शेयर व्यवस्था और काम करने के तरीके में बड़ा फर्क होता है. वहीं अगर आप बिजनेस, निवेश या कंपनी से जुड़ी जानकारी में रुचि रखते हैं, तो इन दोनों के बारे में जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.
क्या होती है प्राइवेट लिमिटेड कंपनी?
प्राइवेट लिमिटेड कंपनी आमतौर पर छोटे और मध्यम स्तर के कारोबार के लिए बनाई जाती है. इस तरह की कंपनी शुरू करने के लिए कम से कम दो सदस्यों की जरूरत होती है. इसमें कंपनी के शेयर आम जनता को नहीं बेचे जा सकते और न ही ये शेयर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते हैं. साथ ही कंपनी का मालिकाना हक सीमित लोगों के पास रहता है, जिससे उसके फैसले भी अपेक्षाकृत जल्दी लिए जा सकते हैं. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में अधिकतम 200 सदस्य हो सकते हैं. यही वजह है कि कई स्टार्टअप और पारिवारिक कारोबार इस मॉडल को पसंद करते हैं. कंपनी के नाम के अंत में “Private Limited” लिखा जाता है, जिससे इसकी पहचान होती है.
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पब्लिक लिमिटेड कंपनी कैसे करती है काम?
पब्लिक लिमिटेड कंपनी का दायरा काफी बड़ा होता है. ऐसी कंपनी बनाने के लिए कम से कम सात सदस्यों की जरूरत होती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अपने शेयर आम लोगों को बेच सकती है. यदि कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो जाए, तो कोई भी व्यक्ति उसके शेयर खरीदकर निवेशक बन सकता है. बड़ी कंपनियां अक्सर विस्तार और पूंजी जुटाने के लिए इस मॉडल को अपनाती हैं. चूंकि इसमें आम जनता का पैसा लगा होता है, इसलिए इन कंपनियों को सरकार और नियामक संस्थाओं के कई नियमों का पालन करना पड़ता है. साथ ही उन्हें समय-समय पर अपनी वित्तीय जानकारी और कारोबार से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक करने होते हैं ताकि निवेशकों को सही जानकारी मिल सके.
दोनों कंपनियों में क्या है सबसे बड़ा फर्क?
प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड कंपनी के बीच सबसे बड़ा अंतर शेयरों की उपलब्धता और स्वामित्व का होता है. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के शेयर सीमित लोगों के बीच ही रहते हैं, जबकि पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयर आम जनता खरीद सकती है. प्राइवेट कंपनी में नियंत्रण कुछ लोगों के हाथ में रहता है, जबकि पब्लिक कंपनी में बड़ी संख्या में निवेशक हिस्सेदार हो सकते हैं. इसके अलावा पब्लिक लिमिटेड कंपनी को अधिक कानूनी नियमों और पारदर्शिता का पालन करना पड़ता है. वहीं प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में नियम अपेक्षाकृत सरल होते हैं. यही कारण है कि छोटे व्यवसाय अक्सर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में शुरुआत करते हैं, जबकि बड़े स्तर पर विस्तार करने वाली कंपनियां आगे चलकर पब्लिक लिमिटेड कंपनी का रूप ले सकती हैं. इसलिए किसी भी कंपनी के प्रकार को समझना निवेश और बिजनेस से जुड़े फैसले लेने में मददगार साबित हो सकता है.
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