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इस अवॉर्ड के लिए धर्मेंद्र ने सिलवाए थे सूट, लेकिन कभी नहीं हुए सम्मानित, किसे मिलता है यह पुरस्कार?

धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में फूल और पत्थर, शोले, चुपके-चुपके, सत्यकाम, प्रतिज्ञा, यादों की बारात जैसी कई सुपरहिट फिल्में कीं. इसके बावजूद उन्हें कभी बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड नहीं मिला.

हिंदी सिनेमा के ही-मैन कहे जाने वाले धर्मेंद्र मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में डिस्चार्ज होकर घर पहुंच गए हैं. दरअसल, काफी समय से बीमार चल रहे धर्मेंद्र को सांस लेने में दिक्कत के चलते वेंटिलेटर पर रखा गया था. हालांकि, अब उनकी तबीयत ठीक है. क्या आप जानते हैं कि अपने करियर के दौरान धर्मेंद्र एक अवॉर्ड के लिए हर साल सूट सिलवाते थे, लेकिन उन्हें वह अवॉर्ड कभी नहीं मिला. क्या आपको पता है कि यह अवॉर्ड किन लोगों को मिलता है?

इस अवॉर्ड के लिए हर साल सिलवाते थे सूट

धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में फूल और पत्थर, शोले, चुपके-चुपके, सत्यकाम, प्रतिज्ञा, यादों की बारात जैसी कई सुपरहिट फिल्में की. इसके बावजूद उन्हें कभी भी बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड नहीं मिला. वहीं फिल्मफेयर अवॉर्ड पाना धर्मेंद्र का सपना था. धर्मेंद्र ने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं पिछले 37 सालों से फिल्मफेयर अवॉर्ड की ट्रॉफी का इंतजार कर रहा हूं. हर साल में एक नया सूट सिलवाता था और मैचिंग टाई लेता था. इस उम्मीद में कि शायद इस बार मुझे यह अवॉर्ड मिल जाए लेकिन मुझे यह अवॉर्ड कभी नहीं मिला.

रेशम की डोरी के लिए फिल्मफेयर में हुआ था आखिरी बार नॉमिनेशन

धर्मेंद्र ने अपने करियर में लगभग 300 से ज्यादा फिल्में की. 1974 में रिलीज हुई रेशम की डोरी उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक गिनी जाती है. रेशम की डोरी ही वह फिल्म थी, जिसके लिए धर्मेंद्र को फिल्मफेयर अवॉर्ड की बेस्ट एक्टर कैटेगरी में आखिरी बार नॉमिनेशन मिला था. इसके बाद धर्मेंद्र को फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर की कैटेगरी में कभी नॉमिनेशन तक नहीं मिला था. वहीं इस साल फिल्म फेयर अवॉर्ड की बेस्ट एक्टर कैटेगरी में यह अवॉर्ड राजेश खन्ना को मिला था.

आखिर किसे मिलता है यह अवाॅर्ड?

फिल्मफेयर अवाॅर्ड हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का सबसे फेमस अवाॅर्ड माना जाता है. इसकी शुरुआत साल 1954 में हुई थी. हर साल या अवाॅर्ड उन कलाकारों को दिया जाता है, जिन्होंने सिनेमा में अपने काम से दर्शकों का दिल जीता हो. बेस्ट एक्टर कैटेगरी में अब तक दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रणबीर कपूर जैसे कई कलाकारों को यह अवार्ड दिया जा चुका है.

धर्मेंद्र को मिला था लाइफटाइम अचीवमेंट अवाॅर्ड

धर्मेंद्र को फिल्मफेयर अवाॅर्ड तो कभी नहीं मिला, लेकिन 1997 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया था. यह अवॉर्ड उन्हें अभिनेता दिलीप कुमार ने दिया था. यह अवॉर्ड लेते समय धर्मेंद्र स्टेज पर बहुत इमोशनल हो गए थे और उन्होंने कहा था कि इस ट्रॉफी में मैं अपने 15 अवॉर्ड देख सकता हूं जो मुझे मिलने चाहिए थे लेकिन नहीं मिले. 

ये भी पढ़ें: Dharmendra Death: मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में इलाज कराना कितना महंगा? यहीं एडमिट हैं एक्टर धर्मेंद्र

कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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