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दाऊद इब्राहिम कैसे बन गया अंडरवर्ल्ड डॉन, मुंबई पर अकेले ऐसे किया था राज

Dawood Ibrahim Underworld Don: दाऊद इब्राहिम का एक समय मुंबई के क्राइम की दुनिया में बोलबाला था. बड़े बड़े बिजनेसमैन उसके यहां हाजिरी लगाते थे. चलिए आपको बताते हैं कि कैसा था दाऊद इब्राहिम सफर.

Dawood Ibrahim Underworld Don: वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई फिल्म का एक डायलॉग है,  'इस खेल में जो पावर है न, उसका नशा ही अलग है'. इस पावर के नशे के लिए देश की आर्थिक राजधानी मुंबई काफी मशहूर है. एक तरफ विशाल समुद्र है तो दूसरी तरफ बॉलीवुड से लेकर देश-विदेश की बड़ी-बड़ी कंपनियां. यानी पैसा पानी के इस तरफ भी है और पानी के रास्ते होने वाले व्यापार में उस तरफ भी. अंडरवर्ल्ड 20वीं सदी के मध्य से लेकर 1990 के दशक तक मुंबई में काफी फला फूला, जिसने करीम लाला हाजी मस्तान और दाऊद जैसे अंडरवर्ल्ड डॉन को जन्म दिया.

चलिए आपको बताते हैं कि कैसे समुद्र की लहरों और बड़ी-बड़ी इमारतों के बीच एक ऐसा डॉन पैदा हुआ, जिसकी गुनाहों की इमारत आज भी खड़ी है. 

साधारण परिवार से सफर शुरू
दाऊद इब्राहिम का सफर एक साधारण से परिवार से शुरू हुआ था, जो अपराध की शिखर तक पहुंचा. देश का व्यापारिक और आर्थिक केंद्र होने की वजह से मुंबई तस्करों के लिए एक अड्डा बन गया था . यहां समुद्री मार्गों से बंदरगाहों के जरिए से आयात-निर्यात होता था, इसलिए यहां से अवैध व्यापार और तस्करी के काफी विकल्प सामने आए. कई अपराधियों ने यहां अपना साम्राज्य स्थापित किया. उन्हीं से से एक था दाऊद, जिसका जन्म 26 दिसंबर 1955 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के मुमका गांव में एक हवलदार के घर में हुआ. दाऊद को बचपन से ही लग्जरी लाइफ जीनी थी, जिसने उसको क्राइम के दुनिया में एंट्री करा दी. 

सात साल की उम्र से ही अपराध 
दाऊद को शाही जिंदगी जीने का इतना शौक था कि उसने सिर्फ सात साल की उम्र से ही चोरी और डकैती जैसे कामों को अंजाम देना शुरू कर दिया और बाद में तस्करी भी करने लगा. उसके पिता ने ही उसे पहली बार गिरफ्तार किया था और हथकड़ी लगाई थी. पिता ने उस बहुत समझने की कोशिश की और बाद उसको घर से निकाल दिया.  दाऊद ने घर से निकलने के बाद करीम लाला के गैंग को ज्वाइन किया. उस समय करीब 1980 तक मुंबई में करीम लाला और हाजी मस्तान गैंग का राज चलता था. साल 1981 में पठान गैंग ने दाऊद के भाई शब्बीर की हत्या कर दी. भाई की मौत के बाद दाऊद तिलमिला उठा. 

दाऊद के भाई के मौत के बाद गैंगवार
दाऊद की एंट्री से पहले अंडरवर्ल्ड में किसी भी तरह का कोई खून खराबा नहीं होता था. सबके इलाके बंटे हुए थे. पठान गैंग के हाथों दाऊद के भाई शब्बीर की हत्या के बाद अंडरवर्ल्ड का एक नया अध्याय शुरू हुआ गैंगवार का. इसने दाऊद गैंग और पठान गैंग के बीच खूनी संघर्ष को जन्म दिया. उसने पांच साल बाद करीम लाला के भाई रहीम खान को मौत के घाट उतार दिया और अपने भाई का बदला ले लिया. उसके बाद दाऊद का ऐसा राज शुरू हुआ, जो करीम लाला और हाजी मस्तान से भी काफी आगे निकला और पूरी मुंबई के क्राइम दुनिया पर राज किया. 

डी-कंपनी और फिल्मों में पैसा 
गैंग के बीच जारी संघर्ष के बीच दाऊद दुबई चला गया. उसका खौफ इतना था कि बड़े-बड़े बिजनेसमैन उसके यहां दरबार लगाते थे. वह दुबई से बैठकर अपने कारोबार को फैला रहा था और मुंबई में उसके गैंग को छोटा राजन चलाता था. मीडिया ने दाऊद के इस गैंग को डी-कंपनी का नाम दिया, जिसका मकसद सोने की तस्करी, जबरन वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी और रियल एस्टेट वालों से रंगदारी मांगना जैसे अवैध काम करना था. दाऊद ने दुबई में बैठकर अपने क्राइम की दुनिया को दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका तक फैलाया. बताया जाता है कि दाऊद के पास इतना पैसा था कि वह फिल्मों में पैसा लगाता था और लोगों को काम दिलाता था.

मुंबई बम धमाका 
साल 1993 के दौरान मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों के पीछे दाऊद को मास्टरमांइड माना जाता है. 12 मार्च 1993 को मुंबई में 12 जगहों धमाके हुए, जिनमें  257 लोग मारे गए और 713 लोग घायल हुए थे. इन धमाकों में करीब 27 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा था. मुंबई में हुए इन धमाकों के मास्टरमाइंड दाऊद को नहीं गिरफ्तार किया जा सका. पुलिस ने अपने बयान में कहा था कि दाऊद ने देश से बाहर रहकर यह सब करवाया.  बताया जाता है कि दाऊद बाद में पाकिस्तान भाग गया, जहां से वह अपना नेटवर्क चलाता है.

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