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पॉलिटिक्स से कब तक रिटायर होंगे डोनाल्ड ट्रंप? जानें अमेरिका में इसे लेकर क्या है नियम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिका की कमान संभाली हुई है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप कब तक राजनीति में सक्रिय रह सकते हैं. जानिए इसको लेकर नियम क्या है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शपथ लेने के बाद लगातार अपने फैसलों से लोगों को चौंका रहे हैं. ट्रंप ने शपथ लेने के बाद से कई बडे फैसले लिए हैं. जिसमें मुख्यरूप से अवैध प्रवासियों को उनके देश भेजना और टैरिफ लगाना शामिल है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पॉलिटिक्स से डोनाल्ड ट्रंप कब रिटायर होंगे. जानिए इसको लेकर क्या नियम है. 

डोनाल्ड ट्रंप
 

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 47वें प्रेसिडेंट पद के लिए दूसरी बार बीते 20 जनवरी को शपथ ग्रहण किया था. जिसके बाद से वो अपने फैसलों को लेकर सक्रिय हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप देश की राजनीति में कब तक रह सकते हैं और इसको लेकर अमेरिका में क्या नियम है. आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यकाल

बता दें कि अमेरिका में कोई भी नेता अधिकतम दो बार राष्ट्रपति बन सकता है. अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के मुताबिक  एक व्यक्ति केवल दो बार राष्ट्रपति पद के लिए चुना जा सकता है. इससे पहले 1940 में फ्रेंकलिन डी. रूज़वेल्ट को चार बार राष्ट्रपति चुना गया था. लेकिन इस संशोधन के बाद अब कोई भी व्यक्ति अधिकतम 8 साल तक ही राष्ट्रपति रह सकता है. इस बार डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति की शपल ली है, यानी ये उनका आखिरी कार्यकाल है.

राजनीति में कब तक रह सकते हैं सक्रिय

बता दें कि अमेरिका में कोई भी व्यक्ति जब तक चाहता है, तब तक राजनीति में सक्रिय रह सकता है. हालांकि दो बार राष्ट्रपति बनने के बाद व्यक्ति तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकता है. इसके अलावा अगर किसी नेता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहता है, तो वह संविधान के मुताबिक किसी भी पद पर नहीं रह सकता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ है, तो वो राजनीति में सक्रिय रह सकता है. 

क्या है कॉग्निटिव टेस्ट?

आपने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले भी कॉग्निटिव टेस्ट का जिक्र सुना होगा. अब सवाल ये है कि  यह टेस्ट क्या होता है. बता दें कि इस टेस्ट में मस्तिष्क के कार्य जैसे सोचना, सीखना, याद रखना और निर्णय और भाषा का उपयोग करना शामिल है. कॉग्निटिव टेस्ट एक मान्य प्रक्रिया है, जो कमियों, उनकी घटना के कारणों और मस्तिष्क के क्षेत्रों को प्रभावित करने की पहचान करने का प्रयास करती है.  एक्सपर्ट के मुताबिक कॉग्निटिव टेस्ट उन लोगों के लिए है, जिनकी याददाश्त कमजोर है. ये टेस्ट उन लोगों को कराना चाहिए जिनकी याददाश्त कम हो रही है. जिन लोगों को ध्यान केंद्रित करने या निर्णय लेने में कठिनाई होती है, उन्हें भी यह टेस्ट कराना चाहिए. हालांकि कॉग्निटिव टेस्ट कराने वालों के लिए उम्र एक महत्वपूर्ण कारक है. क्योंकि 60 साल का होने के बाद हर दशक में डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है. 75 साल की उम्र के बाद यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है. अमेरिका में सिर्फ राष्ट्रपति ही नहीं राजनीति में सक्रिय कोई भी व्यक्ति अगर इस टेस्ट भी फेल होता है, तो उसे कोई अहम पद नहीं दिया जाता है.

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