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E Rickshaw Fare: क्या दिल्ली की तरह हर राज्य में बढ़ सकता है ई-रिक्शा का किराया, जानें क्या हैं इसके नियम?

E Rickshaw Fare: दिल्ली में ई रिक्शा का न्यूनतम किराया बढ़ा दिया गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या दूसरे राज्यों में भी इसी तरह किराया बढ़ाया जा सकता है.

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  • दिल्ली में ई-रिक्शा का न्यूनतम किराया ₹20 हुआ.
  • ई-रिक्शा का किराया राज्य सरकारें तय करती हैं.
  • स्थानीय स्थिति के आधार पर किराए में भिन्नता संभव.
  • किराया बढ़ोतरी में फेडरेशन और यूनियन की भूमिका.

E Rickshaw Fare: इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए शुक्रवार से दिल्ली में ई-रिक्शा का न्यूनतम किराया ₹20 तय कर दिया है. हालांकि सरकार ने अभी तक इसे आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया है. इस कदम के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. क्या दूसरे राज्यों में भी इसी तरह किराए में बढ़ोतरी हो सकती है? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.

भारत में ई-रिक्शा का किराया कौन तय करता है? 

भारत में ई-रिक्शा का किराया केंद्र सरकार नियंत्रित नहीं करती है. इसके बजाय मोटर वाहन अधिनियम के तहत यह अधिकार राज्य सरकार और उनके संबंधित परिवहन विभागों के पास होता है. इसका मतलब है कि हर राज्य के पास अपनी आर्थिक और स्थानीय स्थिति के आधार पर किराया तय करने और उसमें बदलाव करने का पूरा अधिकार है. 

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किराए में बढ़ोतरी हर राज्य में अलग क्यों हो सकती है? 

बिजली की कीमत, बैटरी की लागत, रखरखाव का खर्च और महंगाई हर राज्य में काफी अलग-अलग होती है. इसी वजह से जो किराया दिल्ली में सही बैठता है वह बिहार, महाराष्ट्र या फिर तमिलनाडु जैसे राज्यों में सही नहीं हो सकता. 

स्थानीय फेडरेशन और यूनियन की भूमिका 

इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन जैसे संगठन एक बड़ी भूमिका निभाते हैं. लेकिन उनका फैसला ही अंतिम नहीं होता. वे दबाव समूह के तौर पर काम करते हैं, ड्राइवर को लीड करते हैं, चर्चा करते हैं और सरकार के सामने किराए में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखते हैं. आखिरकार ऐसे बदलावों को मंजूरी देने और लागू करने का अधिकार सिर्फ राज्य के अधिकारियों के पास होता है. 

हर राज्य में परिचालन के नियम अलग 

सभी राज्य ई-रिक्शा के साथ एक जैसा बर्ताव नहीं करते.  उदाहरण के लिए बिहार जैसे कुछ राज्यों में सुरक्षा कारणों से ई रिक्शा को राजमार्ग पर चलाने की अनुमति नहीं है. इस तरह के नियमों का असर कमाई पर पड़ता है और बदले में इससे किराए में बदलाव की मांग उठती है.

टैक्स, सब्सिडी और उनका असर 

ई-रिक्शा पर लगभग 5% जीएसटी लगता है. साथ ही कई राज्यों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी भी देते हैं. हालांकि इन फायदों के साथ अक्सर कुछ नियामक शर्तें भी जुड़ी होती हैं. जैसे परमिट, रास्ते संबंधित प्रतिबंध और परिचालन दिशा निर्देश. आसान शब्दों में कहें तो दिल्ली की तरह दूसरे राज्यों में भी ई-रिक्शा का किराया बढ़ सकता है, क्योंकि यह फैसला राज्य सरकार और स्थानीय परिवहन विभाग के हाथ में होता है.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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