EV Federation: क्या हर शहर में अलग होती है इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन, जानें दिल्ली में इसका अध्यक्ष कौन?
EV Federation: दिल्ली में ई-रिक्शा के किराए में बढ़ोतरी की गई है. इसी बीच आइए जानते हैं क्या हर शहर में इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन अलग-अलग होती है.

- दिल्ली में ई-रिक्शा का न्यूनतम किराया ₹20 तय हुआ।
- इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन दिल्ली के अध्यक्ष अनुज शर्मा हैं।
- शहरों में स्थानीय ई-रिक्शा यूनियनें अपने मुद्दे उठाती हैं।
- राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय निकाय नीतिगत वकालत का काम करते हैं।
EV Federation: शुक्रवार से दिल्ली में ई-रिक्शा का न्यूनतम किराया ₹20 तय कर दिया गया है. यह फैसला इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन ने लिया है. हालांकि दिल्ली सरकार ने इसे अभी तक आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या हर शहर में इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन अलग-अलग होती है और साथ ही दिल्ली में कौन है इसका अध्यक्ष?
दिल्ली में अध्यक्ष कौन है?
दिल्ली में इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन के अध्यक्ष अनुज शर्मा हैं. यह संगठन ई-रिक्शा चालकों का प्रतिनिधित्व करने और किराए की संरचना, परिचालन चुनौती और चालकों के कल्याण जैसे मुद्दों को सुलझाने में एक बड़ी भूमिका निभाता है.
क्या ईवी फेडरेशन सभी शहरों में एक जैसी है?
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन एक जैसी नहीं है. अलग-अलग शहरों और राज्यों में उनके अपने स्थानीय संघ या फिर यूनियन होते हैं. ये उस क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं. क्योंकि परिवहन के नियम और कानून ज्यादातर राज्य या फिर शहर के स्तर पर होते हैं इस वजह से ये फेडरेशन स्थानीय चिंताओं को दूर करने के लिए स्वतंत्र रूप से काम करते हैं.
यह भी पढ़ें: तेल और गैस के बाद सबसे ज्यादा किस चीज का होता होर्मुज से इंपोर्ट, क्या भारत में इनकी कीमतों पर पड़ा असर?
स्थानीय इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन की भूमिका
दिल्ली जैसे शहरों में ये फेडरेशन चालकों और अधिकारियों के बीच एक पुल का काम करती है. वे किराए पर बातचीत करने, परमिट से जुड़े मुद्दे उठाने और इस बात को पक्का करने में मदद करते हैं कि चालकों के हितों की रक्षा हो.
राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर के संगठन
शहर स्तरीय निकायों के अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले बड़े संगठन भी हैं. उदाहरण के लिए नेशनल फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल संगठन एक वैश्विक संगठन के रूप में काम करता है. यह दुनिया भर में इलेक्ट्रिक व्हीकल से जुड़े हित धारकों के बीच नीतिगत वकालत और कोऑर्डिनेशन पर ध्यान केंद्रित करता है.
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को सोसाइटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे निकाय लीड करते हैं. यह संगठन इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति, सब्सिडी और बुनियादी ढांचे के विकास को आकार देने के लिए सरकारों के साथ मिलकर काम करते हैं.
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल काफी ज्यादा डायवर्स हैं और तेजी से विकसित हो रहे हैं. शहर, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग फेडरेशन होने से यह पक्का होता है कि जमीनी स्तर के मुद्दों और बड़े पैमानों पर नीतिगत मामलों को प्रभावित ढंग से सुलझाया जा सके.
यह भी पढ़ें: क्या भारत की तरह पाकिस्तान में भी है मेट्रो, जानें वहां कितना लगता है किराया



















