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RSS पर लगता है मनुस्मृति को मानने का आरोप, जानें इसे किसने लिखा था और क्यों है इतना विवाद

मनुस्मृति में 12 अध्याय हैं, जिनमें 2684 श्लोक हैं. कुछ संस्करणों में श्लोकों की संख्या 2964 भी है. कहा जाता है कि इस किताब में शूद्रों के शिक्षा पाने और महिलाओं के अधिकारों को खारिज किया गया है.

मनुस्मृति बनाम भारत का संविधान विवाद काफी पुराना है और बार-बार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) पर मनुस्मति को मानने के आरोप लगते हैं. कांग्रेस से लेकर अंबेडकरवादी पार्टियां, आरएसएस और भाजपा पर मनुस्मृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाती हैं. यहां तक कि आम लोगों के बीच भी मनुस्मृति हमेशा से चर्चा का विषय बनी रही है और इस पर बहस चलती रहती है, लेकिन इस मनुस्मृति में ऐसा क्या है जिसको लेकर देश में इतना बवाल मचता है? आखिर इसे किसने लिखा था? आज हम इन्हीं सवालों के जवाब तलाशेंगे. 

मनु ने लिखी थी मनुस्मृति

कहा जाता है कि इसे भगवान मनु द्वारा लिखा गया, जो इस दुनिया में आने वाले पहले इंसान थे. उन्हें आदिपुरुष भी किया गया है. माना जाता है कि ईसा से कुछ सौ साल पहले मनुस्मृति की रचना हुई थी, लेकिन कुछ लोग इस किताब को ईसा से लगभग दो हजार साल पुरानी बताते हैं. मनुस्मृति में समाज को चलाने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं की बात की गई है, जिसमें धर्म से लेकर मनुष्य के कर्मों के बारे में भी बताया गया है. इस पुस्तक में सामाजिक न्याय व्यवस्था और महिलाओं के अधिकारों पर भी बहुत कुछ कहा गया है. 

12 अध्यायों में है किताब

मनुस्मृति में 12 अध्याय हैं, जिनमें 2684 श्लोक हैं. कुछ संस्करणों में श्लोकों की संख्या 2964 भी है. कहा जाता है क मनुस्मृति के पहले अध्याय में प्रकृति के निर्माण, चार युगों, चार वर्णों और उनके पेशे और ब्राह्मणों की महानता के बारे में बताया गया है. दूसरा अध्याय ब्रह्मचर्य, तीसरा शादी-विवाह, श्राद्ध जैसे रीति-रिवाजों पर आधारित है. चौथे अध्याय में गृहस्थ धर्म के कर्तव्य, खाने या न खाने के नियमों के बारे में बताया गया है. पांचवा अध्याय महिलाओं के कर्तव्यों पर आधारित है. इसके आठवें अध्याय में न्याय, अपराध, वचन और राजनीतिक मामलों पर बात की गई है. इस तरह इसके 12 अध्याय में अलग-अलग विषयों पर बात की गई है.

क्यों होता है इस किताब पर विवाद?

मनुस्मृति पर सबसे ज्यादा विवाद उसमें बताई गई वर्ण और जातीय व्यवस्था पर है. इसके अलावा मनुस्मृति में महिलाओं के अधिकारों और कर्तव्यों पर भी बात की गई है. मनुस्मृति के विचारों का चुनौती करने वालों का कहना है कि इस किताब ने शूद्रों के शिक्षा पाने के अधिकार को खारिज कर दिया. वहीं ब्राह्मणों को महान बताया गया. इतना ही नहीं दावा किया जाता है कि मनुस्मृति महिलाओं के अधिकारों को सीमित करती है. महिलाओं और दलितों पर मनुस्मृति के विचारों पर ही सबसे ज्यादा विवाद होता है. आरएसएस पर यह आरोप लगता है कि वह भारत के संविधान को खत्म कर मनुस्मृति को बढ़ावा देना चाहती है. 

किसने दी थी मनुस्मृति के विचारों को चुनौती? 

कहा जाता है कि महात्मा ज्योतिबा फुले मनुस्मृति को चुनौती देने वाले पहले व्यक्ति थे. उन्होंने मजदूरों, सीमांत किसानों, वंचितों और शोषितों की हालत देखकर ब्राह्माणों और व्यापारियों की आलोचना की थी. इसके बाद 25 जुलाई, 1927 को महाराष्ट्र के कोलाबा जिले में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भी मनुस्मृति को सार्वजनिक तौर पर जलाया था. उन्होंने अपनी किताब 'फिलॉसफी ऑफ हिंदूइज्म' में लिखा है, मनु ने चार वर्ण व्यवस्था की वकालत की थी. उन्होंने इन चार वर्णों को अलग-अलग बताकर जाति व्यवस्था की नींव रखी. हालांकि, ये नहीं कहा जा सकता है कि मनु ने जाति व्यवस्था की रचना की, लेकिन उन्होंने इस व्यवस्था के बीच जरूरत बोए थे. 

यह भी पढ़ें: कौन थे बहादुर शाह जफर, जिनकी पेंटिंग पर औरंगजेब समझकर पोत दी गई कालिख

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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